मिशन-2027 का शंखनाद: पश्चिम के चक्रव्यूह को भेदने उतरी नवीन-योगी-पंकज की तिकड़ी

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वेस्ट यूपी में बीजेपी की तिकड़ी, 71 सीट साधने का प्लान, BJP का मिशन-2027 का आगाज

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। हर बार की तरह इस बार भी पार्टी ने अपने महा-अभियान का श्रीगणेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश (West UP) की धरती से किया है। बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि लखनऊ के सिंहासन का रास्ता वेस्ट यूपी की सियासी पगडंडियों से होकर ही गुजरता है। यही कारण है कि बीजेपी ने पश्चिम क्षेत्र की सभी 71 विधानसभा सीटों को साधने के लिए एक विशेष त्रिशूल यानी ‘तिकड़ी’ को मैदान में उतार दिया है। इस रणनीति के केंद्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की तिकड़ी है। यह तिकड़ी मेरठ और सहारनपुर मंडलों के 14 जिलों में फैले बीजेपी के सांगठनिक पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों पर जमीनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष के चक्रव्यूह को भेदने के लिए एक सुनियोजित ‘मेगा प्लान’ पर काम कर रही है।

वेस्ट यूपी में बीजेपी का सियासी भूगोल और चुनौती

सांगठनिक दृष्टि से बीजेपी का पश्चिम क्षेत्र बेहद विस्तृत है। इसमें मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिले शामिल हैं—सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और रामपुर। इन 14 जिलों के अंतर्गत कुल 71 विधानसभा सीटें आती हैं। यदि अतीत के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए क्लीन स्वीप जैसी स्थिति पैदा की थी। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के गठबंधन ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, जिससे बीजेपी की सीटें घटकर 40 रह गईं और विपक्ष के खाते में 31 सीटें गईं। इसके बाद हालिया लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र की 14 सीटों में से 7 पर बीजेपी और 7 पर विपक्ष ने कब्जा जमाया। मुरादाबाद मंडल और ग्रामीण इलाकों के कई बूथों पर बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसी नुकसान की भरपाई करने और 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए बीजेपी ने इस क्षेत्र में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

‘नितिन-योगी-पंकज’ की तिकड़ी का महा-प्लान

वेस्ट यूपी की 71 सीटों पर दोबारा वर्चस्व स्थापित करने के लिए बीजेपी की इस नई तिकड़ी के पास प्रत्येक स्तर के लिए एक विशिष्ट जिम्मेदारी है-
नितिन नवीन (सांगठनिक चाणक्य): राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का वेस्ट यूपी का यह पहला महत्वपूर्ण दौरा है। वे संगठन की बारीकियों को परखने और जमीनी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए जाने जाते हैं। उनका मुख्य फोकस बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा करना है। वे उन कमजोर और संवेदनशील बूथों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां पार्टी को पिछले दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।
योगी आदित्यनाथ (प्रशासनिक चेहरा और नैरेटिव किंग): मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वेस्ट यूपी में उनका मुख्य काम कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास कार्यों के दम पर जनता के बीच पैठ बनाना है। इसके साथ ही, ‘बटेंगे तो कटेंगे’ और ’80 बनाम 20′ जैसे बयानों के जरिए वे राष्ट्रवाद और सामाजिक ध्रुवीकरण के नैरेटिव को धार दे रहे हैं, जो वेस्ट यूपी की राजनीति में हमेशा से निर्णायक रहा है।
पंकज चौधरी (सोशल इंजीनियरिंग के शिल्पकार): प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी का काम सांगठनिक स्तर पर विभिन्न जातियों के बीच संतुलन बनाना है। बीजेपी ने हाल ही में पश्चिम क्षेत्र की जो नई कार्यकारिणी घोषित की है, उसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (दलित) और युवाओं को भारी तरजीह दी गई है। पंकज चौधरी का लक्ष्य सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट तैयार करना है।

71 सीटें साधने की पंचसूत्रीय रणनीति

हारी हुई और संवेदनशील सीटों पर ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’: बीजेपी के इस प्लान का सबसे अहम हिस्सा उन सीटों और पोलिंग बूथों की पहचान करना है, जहां ग्रामीण और किसान मतदाता पार्टी से छिटक गए थे। नितिन नवीन स्वयं मेरठ और सहारनपुर में मैराथन बैठकें कर करीब 5,000 शक्ति केंद्र संयोजकों और बूथ अध्यक्षों से सीधा संवाद कर रहे हैं। रणनीति स्पष्ट है—जो बूथ कमजोर हैं, वहां स्थानीय सामाजिक समीकरणों को सुधारकर नए सिरे से किलेबंदी की जाए।

‘Gen-Z’ और युवा वर्ग से सीधा जुड़ाव

बीजेपी भली-भांति जानती है कि नए और पहली बार मतदान करने वाले युवा (Gen-Z) किसी भी चुनाव का रुख बदल सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मेरठ से ‘युवा संवाद सम्मेलनों’ की शुरुआत की गई है। भारतीय जनता युवा मोर्चा को जिम्मेदारी दी गई है कि वे डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया और चौपालों के जरिए केंद्र व राज्य सरकार की रोजगार और स्टार्टअप से जुड़ी योजनाओं को युवाओं तक पहुंचाएं।

सोशल इंजीनियरिंग और नई कार्यकारिणी का संतुलन

पश्चिम यूपी की राजनीति जाट, गुर्जर, दलित, त्यागी, राजपूत, सैनी और मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। विपक्ष के जातीय ध्रुवीकरण को रोकने के लिए बीजेपी ने अपनी क्षेत्रीय टीम में 300 से अधिक पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं और नए चेहरों को शामिल किया है। इसमें गैर-यादव OBC और गैर-जाटव दलित चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है ताकि एक सर्वसमावेशी हिंदू सामाजिक ताना-बाना बुना जा सके।

रालोद के साथ गठबंधन को जमीनी स्तर पर उतारना

वर्तमान में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) बीजेपी के साथ NDA गठबंधन का हिस्सा है। 2022 में जो जाट-मुस्लिम समीकरण बीजेपी के खिलाफ गया था, उसे अब जाट-किसान और बीजेपी के पारंपरिक कैडर के मिलन से बेअसर करने की योजना है। इस तिकड़ी का एक प्रमुख काम यह भी है कि धरातल पर बीजेपी और रालोद के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो, जिससे किसान आंदोलन का बचा-कुचा असर पूरी तरह समाप्त हो जाए।

कानून-व्यवस्था और राष्ट्रवाद का नैरेटिव

वेस्ट यूपी अतीत में दंगों और रंगदारी की घटनाओं से संवेदनशील रहा है। योगी सरकार इस क्षेत्र में सुधरी हुई कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। वेस्ट यूपी के जिलों और कस्बों में पोस्टर्स और अभियानों के जरिए जनता को यह याद दिलाया जा रहा है कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में यहां सुरक्षा की क्या स्थिति थी। यह मुद्दा सीधे तौर पर महिला मतदाताओं और व्यापारियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

यूपी में सत्ता बनाए रखने की चुनौती

बीजेपी का ‘मिशन-2027’ केवल एक चुनावी अभियान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बादशाहत को अक्षुण्ण रखने की एक बड़ी परीक्षा है। वेस्ट यूपी की 71 सीटों पर नितिन नवीन, योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी की तिकड़ी ने जिस तरह से बूथ स्तर से लेकर सोशल इंजीनियरिंग तक का चक्रव्यूह रचा है, उसने विपक्षी दलों के खेमे में हलचल बढ़ा दी है। क्रांतिधरा मेरठ और शक्तिपीठ सहारनपुर से शुरू हुआ यह अभियान यदि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहता है, तो 2027 में बीजेपी के लिए सत्ता की हैट्रिक लगाना बेहद आसान हो जाएगा। हालांकि, विपक्ष की घेराबंदी और स्थानीय किसान-युवा मुद्दों से निपटना इस तिकड़ी के लिए आने वाले समय में एक बड़ी और वास्तविक चुनौती होगी।

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