भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी की वापसी, नितिन नबीन ने तैयार की नई फौज

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नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान: BJP में बड़ा बदलाव, स्मृति ईरानी की वापसी!

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को पार्टी की बहुप्रतीक्षित नई राष्ट्रीय टीम और केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची घोषित कर दी है। इस नए सांगठनिक फेरबदल को आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों और ‘मिशन 2029’ की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस नई टीम में जहां पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया गया है, वहीं कई नए सांगठनिक चेहरों को शामिल कर युवा ऊर्जा को भी तरजीह दी गई है। इस पूरी घोषणा का सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय संगठन के मुख्य पटल पर धमाकेदार वापसी है, जिन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है और उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य की कमान सौंपी गई है।

नितिन नबीन की नई टीम: 7 महीने का इंतजार खत्म

नितिन नबीन ने इस साल 20 जनवरी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाला था. अध्यक्ष पद संभालने के बाद से ही उनकी नई टीम के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म था। लगभग 7 महीनों के लंबे इंतजार और मैराथन बैठकों के दौर के बाद सोमवार को आखिरकार इस सूची को अंतिम रूप देकर जारी किया गया। नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि अनुभव और ऊर्जा के इस बेहतरीन मिश्रण के साथ यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रत्येक कार्यकर्ता ‘विकसित भारत’ के संकल्प और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगा।

स्मृति ईरानी की बड़ी सांगठनिक वापसी और उत्तर प्रदेश का प्रभार

इस सांगठनिक फेरबदल का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश स्मृति ईरानी की नियुक्ति से मिला है। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से निर्णय प्रक्रिया से थोड़ी दूर रहीं वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी को अब राष्ट्रीय महासचिव का बेहद महत्वपूर्ण पद देकर पार्टी में उनके ऊंचे कद को पुनः स्थापित किया गया है। उन्हें न केवल महासचिव बनाया गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।  उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनावी राज्य की कमान स्मृति ईरानी जैसे आक्रामक और प्रभावशाली चेहरे को सौंपना यह स्पष्ट करता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्मृति ईरानी का सांगठनिक अनुभव और उत्तर प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूत बढ़त दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची: पुराने दिग्गजों पर भरोसा बरकरार

नितिन नबीन की नई कार्यकारिणी में कुल 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इस सूची में पार्टी ने अपने पुराने और दिग्गज क्षत्रपों पर पूरा भरोसा जताया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा गया है। इसके अतिरिक्त, पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले राम माधव की भी मुख्य संगठन में बड़ी वापसी हुई है और उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की पूरी सूची इस प्रकार है-
वसुंधरा राजे सिंधिया (राजस्थान)
तीरथ सिंह रावत (उत्तराखंड)
राम माधव (दिल्ली)
बैजयंत जय पांडा (ओडिशा)
डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश)
रेखा वर्मा (उत्तर प्रदेश)
वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोषी (गुजरात)
डॉ. भारती प्रविण पवार (महाराष्ट्र)
मनप्रीत सिंह बादल (पंजाब)
लाल सिंह आर्य (मध्य प्रदेश)
प्रो. एम. नागराजा (कर्नाटक)
प्रो. तारिक मंसूर (उत्तर प्रदेश)
डॉ. मधुचंद्र कर (पश्चिम बंगाल)
इस सूची से साफ है कि भाजपा ने देश के सभी हिस्सों- उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम को आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल और उत्तर प्रदेश से मुस्लिम चेहरे के रूप में प्रो. तारिक मंसूर को शामिल करना पार्टी की सर्वसमावेशी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राष्ट्रीय महासचिव: संगठन की रीढ़

पार्टी संगठन को सुचारू रूप से चलाने की मुख्य जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिवों के कंधों पर होती है। अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी इस टीम में 8 राष्ट्रीय महासचिवों की नियुक्ति की है। बी.एल. संतोष पूर्व की भांति राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, जो आरएसएस और भाजपा के बीच मुख्य सांगठनिक कड़ी हैं। इनके अलावा महासचिवों की सूची में विनोद तावड़े, सुनील बंसल, स्मृति ईरानी, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देव, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के सांगठनिक मामलों में लंबा अनुभव रखने वाले सुनील बंसल और राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को महासचिव पद पर बनाए रखना या लाना यह दर्शाता है कि पार्टी चुनावी राज्यों के प्रबंधन को अत्यधिक प्राथमिकता दे रही है।

पीयूष गोयल बने नए राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष

एक और बड़ा और चौंकाने वाला नाम केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का है, जिन्हें भाजपा का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।  पीयूष गोयल की छवि एक कुशल वित्तीय प्रबंधक और साफ-सुथरी राजनीति करने वाले नेता की रही है, इसलिए उन्हें पार्टी के केंद्रीय कोष की जिम्मेदारी सौंपना बेहद स्वाभाविक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है। उनके साथ राजस्थान के राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

विभिन्न मोर्चों और सांगठनिक इकाइयों में नए चेहरे

टीम नितिन नबीन में केवल शीर्ष स्तर पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न सहयोगी मोर्चों (Morchas) में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं-
युवा मोर्चा: युवाओं को पार्टी से जोड़ने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का नया अध्यक्ष डॉ. हेमंत जोशी (गुजरात) को बनाया गया है।
महिला मोर्चा: महिलाओं के बीच पैठ मजबूत करने के लिए रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा की राष्ट्रीय कमान सौंपी गई है।
किसान मोर्चा: ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में पार्टी के आधार को सुदृढ़ करने के लिए बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पूर्वोत्तर और मीडिया कमान: पार्टी के कद्दावर प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट (पूर्वोत्तर राज्यों) का समन्वयक (Coordinator) बनाया गया है। वहीं, उत्तराखंड के अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक (Media Convenor) के रूप में निरंतरता दी गई है।

33 प्रतिशत महिला आरक्षण और ‘Gen-Z’ वोटर्स पर विशेष ध्यान

इस नई टीम के गठन की आंतरिक परतों को देखें तो भाजपा ने आगामी सांगठनिक बदलावों में महिलाओं को न्यूनतम 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की अपनी नीति को जमीन पर उतारा है। कुल 13 उपाध्यक्षों में से 6 महिला नेता हैं, जो मुख्य नीति-निर्धारण में महिलाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, विभिन्न प्रदेशों में बढ़ रहे युवा और पहली बार मतदान करने वाले ‘Gen-Z’ वोटर्स को साधने के लिए नए पदाधिकारियों में कई युवा चेहरों को सचिव (16 राष्ट्रीय सचिव) के रूप में मौका दिया गया है।  अकेले उत्तर प्रदेश से इस टीम में 6 पदाधिकारियों को जगह मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश के सबसे बड़े सूबे पर केंद्रीय नेतृत्व का कितना गहरा ध्यान केंद्रित है।

नई टीम पर सबकी निगाहें

निश्चित रूप से, भाजपा की यह नई टीम सांगठनिक दृढ़ता और चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए एक पूर्ण संतुलित खाका पेश करती है। अब देखना यह होगा कि नितिन नबीन की अध्यक्षता में तैयार हुई यह नई फौज आने वाले महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को कितनी बड़ी सफलता दिला पाती है।

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