महाराष्ट्र में धर्म स्वतंत्रता कानून: 60 दिन पहले देनी होगी धर्म परिवर्तन की सूचना, गैर-कानूनी धर्मांतरण से जन्मे बच्चे के धर्म को लेकर भी कानून में विशेष व्यवस्था
महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहा ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’अब नई कानूनी व्यवस्था लेकर आने वाला है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह कानून 28 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। इस कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, दबाव, गलत जानकारी, अनुचित प्रभाव अथवा शादी के बहाने कराए जाने वाले गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
दोनों सदनों मे पास हुआ बिल
महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों से मार्च 2026 में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरा। विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पहले से सूचना देने, धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित प्राधिकारी को जानकारी देने और शिकायत की स्थिति में जांच की व्यवस्था जैसे प्रावधान किए गए हैं। आधिकारिक विधायी दस्तावेज में भी कहा गया है कि अधिनियम राज्य सरकार की राजपत्र अधिसूचना के जरिए निर्धारित तारीख से लागू होगा।
क्या है नए कानून का मुख्य उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य किसी व्यक्ति के स्वेच्छा से धर्म बदलने के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करना नहीं, बल्कि बल, धोखे, लालच, गलत प्रस्तुतीकरण, अनुचित प्रभाव या अन्य गैर-कानूनी तरीकों से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है। गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने विधानसभा में कानून का बचाव करते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन वास्तव में व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा से हो। कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है और इसके प्रावधान सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होंगे।
स्वेच्छा से धर्म बदलना भी अब प्रक्रिया के दायरे में
नए कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक 60 दिन पहले सूचना देने से जुड़ी है। यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित जिला प्राधिकारी को सूचना देनी होगी। कानून का उद्देश्य यह पता लगाना है कि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा से हो रहा है या उस पर किसी प्रकार का दबाव, धोखा, लालच या अनुचित प्रभाव तो नहीं है। विधेयक के अनुसार धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी संबंधित प्राधिकारी को घोषणा या आवश्यक जानकारी देने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य भविष्य में धर्म परिवर्तन की वैधता को लेकर होने वाले विवादों को कम करना और आधिकारिक रिकॉर्ड बनाए रखना बताया गया है।
किन तरीकों से कराया गया धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा?
कानून में ‘अवैध धर्म परिवर्तन’ की परिभाषा को व्यापक रखा गया है। इसके तहत किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के लिए मजबूर करना, धोखा देना, गलत जानकारी देना, धमकी देना या अनुचित प्रभाव डालना अपराध की श्रेणी में आ सकता है। इसके अलावा प्रलोभन (allurement) को भी कानून में विशेष रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें उपहार, आर्थिक लाभ, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, विवाह का वादा, बेहतर जीवनशैली का लालच या धार्मिक उपचार/चमत्कारी उपचार जैसी पेशकशें शामिल हो सकती हैं। इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति को आर्थिक या सामाजिक लाभ का लालच देकर अथवा विवाह का वादा करके धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकती है।
शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन पर भी कड़ी नजर
कानून में विवाह और धर्म परिवर्तन के बीच संबंध को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि विवाह का इस्तेमाल किसी व्यक्ति का धर्म बदलवाने के लिए किया जाता है और इसमें धोखा, दबाव, प्रलोभन या अन्य गैर-कानूनी तरीका शामिल है, तो इसे अपराध माना जा सकता है। यानी केवल अलग-अलग धर्म के दो लोगों का विवाह करना अपने आप में इस कानून के तहत अपराध नहीं है। कानून का फोकस गैर-कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कानून का बचाव करते हुए कहा था कि इसका लक्ष्य स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन अथवा अंतरधार्मिक विवाह को रोकना नहीं, बल्कि जबरन और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण पर कार्रवाई करना है।
बच्चे के धर्म को लेकर क्या कहता है कानून?
इस कानून का एक विशेष और चर्चा में रहने वाला प्रावधान बच्चे के धर्म से संबंधित है। विधेयक के अनुसार यदि किसी विवाह के पीछे गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन का मामला साबित होता है और उस संबंध से बच्चे का जन्म होता है, तो बच्चे के धर्म को लेकर उसकी मां के धर्म परिवर्तन से पहले वाले धर्म को आधार माना जाएगा। यही वह प्रावधान है जिसकी वजह से कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हुई है। इस व्यवस्था के समर्थकों का तर्क है कि इससे कथित गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के आधार पर बच्चे की धार्मिक पहचान को बदलने की कोशिश पर रोक लगेगी। दूसरी ओर, आलोचकों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पारिवारिक कानून और धार्मिक पहचान से जुड़े सवाल उठाए हैं। विधेयक में इस विषय पर विशेष प्रावधान का उल्लेख किया गया है। (Moneycontrol)
पहली बार अपराध पर 7 साल तक की सजा
कानून में गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सामान्य तौर पर शादी के बहाने गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन कराने के मामले में 7 वर्ष तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। यदि मामला किसी नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से जुड़े व्यक्ति के धर्म परिवर्तन से संबंधित है, तो सजा 7 वर्ष तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने तक जा सकती है।
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी कड़ी कार्रवाई
कानून सामूहिक धर्म परिवर्तन को भी अलग तरीके से देखता है। दो या उससे अधिक लोगों के एक साथ धर्म परिवर्तन को ‘मास कन्वर्जन’ की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में 7 वर्ष तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति बार-बार इसी प्रकार का अपराध करता है, तो उसके लिए सजा और अधिक कठोर हो सकती है। दोबारा अपराध करने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
शिकायत कौन कर सकेगा?
कानून की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था शिकायत दर्ज कराने को लेकर है। केवल कथित पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन और अन्य करीबी रिश्तेदार भी निर्धारित परिस्थितियों में शिकायत कर सकते हैं। सरकार का तर्क है कि कई बार धर्म परिवर्तन के दबाव या धमकी के कारण संबंधित व्यक्ति स्वयं पुलिस के पास शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में परिवार के सदस्यों को शिकायत का अधिकार देने से संभावित गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन की जानकारी पुलिस तक पहुंच सकेगी। (GKToday)
पुलिस में शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान
विधेयक में पुलिस के स्तर पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। कानून के तहत गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से संबंधित शिकायत मिलने पर पुलिस को उसे दर्ज करने की प्रक्रिया अपनानी होगी। इस प्रावधान को लेकर सरकार का कहना है कि धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता को शुरुआती स्तर पर ही कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए और शिकायतों को केवल इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि मामला निजी या पारिवारिक है।
प्रलोभन की परिभाषा काफी व्यापक
कानून में प्रलोभन की श्रेणी में कई प्रकार के लाभों को शामिल किया गया है। इसमें नकद या वस्तु के रूप में लाभ, उपहार, रोजगार, मुफ्त शिक्षा, विवाह का वादा, बेहतर जीवनशैली और धार्मिक उपचार जैसे दावे शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी धार्मिक संस्था द्वारा सामान्य धार्मिक गतिविधि, शिक्षा या सेवा अपने आप में अपराध नहीं मानी जाएगी; मामला तब कानून के तहत आएगा जब इन गतिविधियों का इस्तेमाल गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से किया गया हो। इस अंतर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि कानून स्वैच्छिक धार्मिक आस्था और गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के बीच अंतर करने का दावा करता है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल
विधेयक पारित होने के दौरान विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसके कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी। आलोचकों का कहना था कि 60 दिन पहले सूचना देने की बाध्यता और शिकायत की व्यापक व्यवस्था व्यक्ति की निजता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी आशंका जताई कि कानून का इस्तेमाल स्वेच्छा से अंतरधार्मिक संबंध या धर्म परिवर्तन करने वाले वयस्कों को परेशान करने के लिए किया जा सकता है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि कानून किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करना है जहां धर्म परिवर्तन बल, धोखे, दबाव या प्रलोभन के जरिए कराया जाता है।
संवैधानिक अधिकार बनाम राज्य का नियमन
भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अंत:करण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। हालांकि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसे संवैधानिक प्रतिबंधों के अधीन है। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति की स्वेच्छा से धर्म अपनाने की स्वतंत्रता बरकरार रहेगी, लेकिन दूसरे व्यक्ति को धोखे, बल या लालच से धर्म बदलने के लिए मजबूर करने की स्वतंत्रता संविधान नहीं देता। यही तर्क सरकार ने विधेयक के दौरान भी रखा था।
महाराष्ट्र देश के उन राज्यों में शामिल
धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला कानून बनाने वाला महाराष्ट्र अब उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां इस विषय पर विशेष कानून मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों में भी धर्म परिवर्तन से जुड़े कानून लागू हैं। हालांकि प्रत्येक राज्य के कानून की भाषा, प्रक्रिया और दंड व्यवस्था अलग-अलग है।
अमृता फडणवीस ने किया कानून का स्वागत
नागपुर में एक कार्यक्रम में पहुंचीं अमृता फडणवीस ने सरकार की ओर से महिलाओं और समाज के हित में बनाए जा रहे कानूनों का स्वागत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जो भी कानून महिलाओं की प्रगति और सुरक्षा के लिए उपयोगी हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का आने वाला समय युवाओं का है और महिलाओं के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। वहीं, वंदे मातरम से जुड़े विवाद पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि संसद से कानून बन चुका है तो सभी नागरिकों को उसका पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलों से जुड़े सवाल पर अमृता फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र देश का अग्रणी राज्य है और उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र में ही कार्य करते रहना चाहिए।
आगे क्या बदलेगा?
धर्म स्वतंत्रता कानून लागू होने के बाद महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिए एक औपचारिक कानूनी ढांचा तैयार हो जाएगा। स्वेच्छा से धर्म बदलने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया और पूर्व सूचना की शर्तों का पालन करना होगा, जबकि बल, धोखे, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव या गैर-कानूनी विवाह के जरिए धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों की जांच कानून के तहत की जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि किसी मामले में वास्तव में धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक था या गैर-कानूनी तरीके से कराया गया था, इसका निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। कानून का उद्देश्य जहां जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना बताया गया है, वहीं इसके प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर उठने वाली संवैधानिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी बहस भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगी।
कानून की प्रमुख बातें एक नजर में
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महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला राज्य कानून है।
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बल, धोखे, गलत प्रस्तुतीकरण, अनुचित प्रभाव और प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन पर रोक।
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स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिन पहले सूचना देने का प्रावधान।
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शादी के बहाने गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा।
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सामान्य उल्लंघन में 7 वर्ष तक की जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
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नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति तथा SC/ST से जुड़े मामलों में 7 वर्ष तक जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
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सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 7 वर्ष तक जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
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दोबारा अपराध करने पर 10 वर्ष तक की जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
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माता-पिता, भाई-बहन और करीबी रिश्तेदारों को शिकायत करने का प्रावधान।
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गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के आधार पर हुए विवाह से जन्मे बच्चे के धर्म को लेकर मां के धर्म परिवर्तन से पहले वाले धर्म को आधार बनाने का विशेष प्रावधान।
स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन पर सही अमल
महाराष्ट्र का नया धर्म स्वतंत्रता कानून राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत लाने की कोशिश है। सरकार इसे जबरन और धोखाधड़ी वाले धर्मांतरण के खिलाफ सुरक्षा के रूप में देख रही है, जबकि आलोचक इसके कुछ प्रावधानों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता की कसौटी पर परखने की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में कानून का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन और अदालतें स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन तथा गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के बीच अंतर को किस तरह लागू करती हैं।
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