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March 14, 2026

महाराष्ट्र में अवैध धर्म परिवर्तन पर कड़ा कानून: 7 साल की सजा और 1.5 लाख जुर्माना

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ विधेयक पेश किया गया है। इस विधेयक का लक्ष्य बल, धोखाधड़ी या प्रलोभन से होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकना है। इसमें 7 साल तक की सजा और एक लाख से लेकर 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। विशेष मामलों में यह सजा और भी कड़ी हो सकती है। स्वैच्छिक धर्मांतरण के लिए भी एक निर्धारित प्रक्रिया बनाई गई है, जिसमें 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होगा।

मार्गदर्शन और दंड की प्रणाली

यह विधेयक राज्य के गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) पंकज भोयर द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बल, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलत जानकारी, दबाव, विवाह समेत अन्य कपटपूर्ण तरीकों से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगाना है। अवैध धर्मांतरण के मामलों में एफआईआर धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति, उसके रिश्तेदार या अन्य संबंधित व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई जा सकती है। इसके अतिरिक्त, पुलिस को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार भी दिया गया है।

कड़ी सजाओं का प्रावधान

विधेयक में अवैध धर्मांतरण के लिए अधिकतम 7 साल तक की सजा और 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यदि मामला नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति से जुड़ा हो, तो इसके लिए और अधिक सख्त सजाओं का प्रावधान किया गया है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए 10 साल तक की सजा और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

संस्थाओं पर भी होगी कार्रवाई

किसी संस्था या संगठन की भूमिका यदि ऐसे धर्मांतरण में पाई जाती है, तो उसकी पंजीकरण रद्द की जा सकती है और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कारावास तथा जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संस्थानों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता भी बंद की जा सकती है।

कानूनी प्रक्रियाएं और प्रावधान

इस विधेयक के तहत अपराधों को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों की जांच उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और मुकदमों की सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी। विधेयक में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है, जिसमें धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी।

धर्म परिवर्तन के बाद की जिम्मेदारियां

धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को 21 दिनों के भीतर घोषणा पत्र जमा करना होगा। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती, तो धर्म परिवर्तन को अमान्य (Null and Void) माना जाएगा। इसके साथ ही, विधेयक में अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, जिसमें भरण-पोषण और बच्चों की अभिरक्षा संबंधी प्रावधान भी मौजूद हैं।

आने वाले दिनों में संभावित चर्चा

विधेयक विधानसभा में पेश होने के बाद इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह कानून अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाता है और समाज में एक नई बहस को जन्म देता

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