यूरोप ने दिया बड़ा तोहफा, भारत से बिना शुल्क खरीदेगा 19 लाख टन स्टील

The CSR Journal Magazine
भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अभी अंतिम चर्चा हो रही है, लेकिन इससे पहले ही ईयू ने भारत को एक महत्वपूर्ण तोहफा दिया है। भारत को सालाना 19 लाख टन इस्पात निर्यात के लिए विशेष शुल्क दर कोटा (TRQ) दिया गया है। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने दी है। इस कोटे के माध्यम से, भारत को उम्मीद है कि वह निर्यातक के तौर पर शेष 9 लाख टन का अतिरिक्त निर्यात कर सकेगा, जिससे कुल कोटा बढ़कर 28 लाख टन तक पहुँच जाएगा।

भारत की इस्पात निर्यात क्षमता में बढ़ोतरी

इस विशेष कोटे के साथ, भारत ने यूरोपीय संघ में अपने इस्पात निर्यात के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए बाजार पहुंच सुनिश्चित कर ली है। पिछले वित्तवर्ष में भारत ने लगभग 30 लाख टन इस्पात उत्पादों का निर्यात किया था। शुल्क दर कोटे को यूरोपीय संघ के इस्पात सरप्लस क्षमता रेगुलेशन के तहत दिया गया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर इस्पात के अतिरिक्त उत्पादन की वजह से यूरोपीय संघ के उद्योग की सुरक्षा करना है।

शुल्क मुक्त कोटे का प्रभाव

ईयू के रेगुलेशन के अंतर्गत 1.83 करोड़ टन का शुल्क-मुक्त कोटा प्रदान किया गया है। अगर इस कोटे से अधिक आयात किया जाता है, तो 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। इस्पात के उत्पादन के संदर्भ में ‘मेल्ट एंड पोर’ व्यवस्था लागू की गई है, जो इस्पात के उत्पादन की पारदर्शिता को बढ़ाएगी। यह व्यवस्था इस्पात व्यापार में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यह निर्धारित करती है कि इस्पात किस देश में पिघलाया और ढाला गया है।

निर्यातकों को मिल रहा लाभ

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि एक जुलाई से लागू हुए नए रेगुलेशन के बाद भारतीय निर्यातकों ने इस कोटे का सुरुआत कर दिया है और अब वे 27 देशों वाले यूरोपीय संघ को स्टील भेज रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस्पात क्षेत्र के लिए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लाभ पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं। जो निर्यात कोटे के तहत हो रहे हैं, उन पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ प्राप्त हो रहा है।

भविष्य की उम्मीदें

इस नए कदम से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार संबंधों को मजबूती मिलेगी। भारत की इस्पात उद्योग को विकसीत करने और वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने का एक सुनहरा अवसर मिला है। यह निर्यात कोटे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बडी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में भारत का इस्पात निर्यात और भी बढ़ सकता है।

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