नई दिल्ली: भारत में कचरे के निस्तारण को लेकर सिविक सेंस की भारी कमी है। इस कारण देश के अधिकांश शहरों की सड़कें कचरे से भरी नजर आती हैं। भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने गंदगी फैलाने वालों पर कड़ी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में धर्मगुरुओं को भी अपने विचार रखनी चाहिए।
बढ़ते कचरे के पीछे क्या है कारण?
लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय का कहना है कि सड़कों पर कचरा बढ़ता जा रहा है। जब लोग गरीबी से बाहर निकलकर मध्यम वर्ग में पहुँचते हैं, वे यात्रा करने, घूमने-फिरने और बाहर खाने-पीने लगते हैं। इस कारण छोटे वेंडर्स का काम बढ़ने से कचरे की समस्या अधिक हो रही है।
सफाई की लड़ाई: जीतने की चुनौती
उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती जनसंख्या और सिविक सेंस की कमी के कारण, कचरे का ढेर केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे गांवों में भी बढ़ रहा है। सरकारी सफाई कर्मचारी हर सुबह कचरा हटाने की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे वे जीत नहीं पा रहे हैं।
खिड़की से कचरा फेंकने का चलन
रिटायर्ड सैन्यकर्मी ने कहा कि “स्वच्छ भारत” केवल नारे तक ही सीमित रहेगा, जब तक लोग खुद कदम नहीं उठाते। अमीर लोग अपनी “खास हैसियत” दिखाते हुए अक्सर गाड़ी की खिड़की से कचरा फेंकते हैं, जिससे अन्य लोग भी उसी का अनुसरण करते हैं।
धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी
उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी धार्मिक नेता या राजनेता इस जिम्मेदारी के बारे में क्यों नहीं बात करता। आखिर इसका हल कौन निकालेगा? भारत तेजी से कचरे का देश बनता जा रहा है, और इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
सेना का भी ध्यान
पांडेय ने यह भी उल्लेख किया कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें अपने कार्यों के प्रति सजग रहना चाहिए। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
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