कानपुर मर्डर मिस्ट्री: पत्नी शालू जेल से रिहा, पिता की हत्या की साजिश में पति सुब्रत मनोचा गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine

कानपुर का चर्चित विनीत मनोचा हत्याकांड: 21 दिन बाद जेल से रिहा हुईं बहू शालू, बेटा सुब्रत ही निकला पिता की हत्या का असली मास्टरमाइंड

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कल्याणपुर इलाके के ‘रतन ऑर्बिट’ अपार्टमेंट में बीते 5 सितंबर को हुए दवा कारोबारी विनीत मनोचा (63) हत्याकांड में एक बेहद चौंकाने वाला और नाटकीय मोड़ आया है। पुलिस की शुरुआती थ्योरी को पूरी तरह पलटते हुए अदालत ने मृतक की बहू शालू मनोचा को बेकसूर मानते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया है, जबकि हत्या की साजिश रचने के आरोप में खुद विनीत मनोचा के बेटे सुब्रत मनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 21 दिनों तक बिना किसी अपराध के सलाखों के पीछे रहने के बाद आखिरकार सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे शालू मनोचा जेल से बाहर आ गईं।

शुरुआती जांच और बहू की गिरफ्तारी की कहानी

दरअसल, 5 सितंबर को जब पूरा परिवार एक पार्टी में गया हुआ था, तब अपार्टमेंट में घुसकर दवा कारोबारी विनीत मनोचा की चाकू मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआती तफ्तीश के दौरान पुलिस ने एक पूर्व कर्मचारी/नौकर विशाल गौतम के बयान के आधार पर बहू शालू मनोचा को 6 सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विशाल गौतम ने पुलिस के सामने दावा किया था कि शालू ने ही उसे अपने ससुर की हत्या करने के लिए 6 लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसमें 2 लाख रुपये एडवांस और 4 लाख रुपये काम होने के बाद देने का वादा किया गया था। इस बयान के आधार पर पुलिस ने शालू, विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था।

डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स ने पलटी पूरी बाजी

इस हत्याकांड की गुत्थी तब सुलझी जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की और आरोपियों को 24 घंटे की कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की। पुलिस की लीगल टीम, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और सर्विलांस सेल ने जब मोबाइल फोन के डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और सीसीटीवी फुटेज को खंगाला, तो चौंकाने वाले डिजिटल साक्ष्य सामने आए। इन सबूतों ने शालू की भूमिका को पूरी तरह खारिज कर दिया और सीधे तौर पर मृतक के बेटे सुब्रत मनोचा की तरफ इशारा किया। कड़ी पूछताछ के आगे टूटते हुए बेटे सुब्रत मनोचा ने आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ही इस पूरे हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड निकला। उसने न सिर्फ अपने पिता की हत्या की साजिश रची और नौकर विशाल को सुपारी दी, बल्कि इस बेहद शातिराना कत्ल में अपनी ही पत्नी शालू को फंसाने का घिनौना ताना-बाना भी बुना ताकि वह खुद कानून की नजरों से बच सके।

अदालत का आदेश और शालू की रिहाई

विवेचना के दौरान जब शालू के खिलाफ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का कोई भी सबूत नहीं मिला, तो कानपुर पुलिस ने अपनी पिछली थ्योरी को सुधारते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत में शालू के पक्ष में एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। पुलिस ने अदालत को लिखित रूप से अवगत कराया कि शालू पूरी तरह निर्दोष है। शालू मनोचा के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने अदालत में दलीलें पेश कीं, जिसके बाद सीजेएम कोर्ट ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर शालू की न्यायिक अभिरक्षा को समाप्त करने का आदेश दिया। जेल अधीक्षक को निर्देश जारी किए गए कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। जेल से बाहर आने के बाद शालू ने बेहद भावुक होकर कहा कि उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनके पति ही इस पूरे जघन्य अपराध के पीछे थे। उन्होंने कहा कि बिना कुछ किए ही उन्हें 21 दिनों तक जेल की प्रताड़ना झेलनी पड़ी, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। फिलहाल पुलिस ने सुब्रत, विशाल और राजकिशोर को सलाखों के पीछे भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।

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