सफेद कमीज-लुंगी में 16 आरोपियों का एक जैसा लुक, जज ने लगाई फटकार

The CSR Journal Magazine

कोच्चि में अभिमन्यु हत्याकांड की सुनवाई शुरू

केरल के कोच्चि में 2018 के चर्चित अभिमन्यु हत्याकांड की सुनवाई शुरू होते ही अदालत में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। इस मामले के 16 आरोपी एक जैसे कपड़े, टोपी और चेहरे पर मास्क लगाकर अदालत पहुंचे। सभी ने सफेद हाफ-स्लीव कमीज, सफेद लुंगी यानी मुंडू और काले जूते पहने हुए थे। उनका हुलिया इतना मिलता-जुलता था कि उन्हें अलग-अलग पहचानना मुश्किल हो रहा था। इस पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.के. बालकृष्णन ने गुस्से में आकर सभी आरोपियों को मास्क हटाने का निर्देश दिया।

जज की सख्त चेतावनी

जज ने स्पष्ट कहा कि वे चेहरा ढककर अदालत में पेश नहीं हो सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई आरोपी पहचान छिपाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि अभिमन्यु की हत्या के लगभग आठ साल बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई है। अदालत में अब चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान से जुड़े सबूत पेश कर रहा है।

अभिमन्यु की हत्या का मामला

अभिमन्यु, जो कि केरल के महाराजा कॉलेज में बीएससी केमिस्ट्री का छात्र था, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का नेता भी था। 2 जुलाई 2018 की तड़के कॉलेज कैंपस में हुई झड़प के दौरान उसे चाकू मार दिया गया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियों के दौरान दीवार पर लिखने और पोस्टर लगाने को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया है।

चश्मदीद गवाहों की पहचान

सुनवाई के पहले दिन अभियोजन पक्ष के पहले चश्मदीद गवाह सुबिन से पूछताछ की गई। सुबिन, जो महाराजा कॉलेज में अभिमन्यु का सहपाठी था, ने अदालत को बताया कि आरोपियों के बाल और दाढ़ी एक जैसे तरीके से कटे हुए थे। इसके बावजूद उसने कई आरोपियों की पहचान की, जिनमें मुख्य संदिग्ध भी शामिल था। गवाह ने कहा कि अदालत में की गई पहचान पुलिस को दिए गए उसके पहले के बयान और तहसीलदार की मौजूदगी में हुई पहचान परेड से मेल खाती है।

तीन आरोपियों की पहचान में कठिनाई

हालांकि, वह अदालत में मौजूद तीन आरोपियों की पहचान नहीं कर सका। यह बात सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभियोजन पक्ष को अदालत में आरोपियों के खिलाफ अपने सबूत और गवाहों के बयान पेश करने हैं। लेकिन गवाह की पहचान अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम फैसला अदालत को सबूतों के आधार पर करना है।

बंद कमरे में सुनवाई की मांग

आरोपियों ने पहले अदालत से मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि खुली अदालत में सुनवाई और मीडिया कवरेज से उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है और गवाहों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। लेकिन एर्नाकुलम की प्रधान जिला एवं सत्र अदालत ने इन-कैमरा ट्रायल की मांग खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोपियों की आशंकाएं खुली अदालत में सुनवाई रोकने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।

गवाहों की जिरह पर विवाद

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह मांग भी रखी कि सातों चश्मदीद गवाहों की मुख्य गवाही पूरी होने के बाद ही उनकी जिरह की जाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि अगर एक गवाह की जिरह दूसरे गवाह के मुख्य बयान से पहले हुई, तो बाद में गवाही देने वाले लोग पहले पूछे गए सवालों से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, अभियोजन पक्ष और अभिमन्यु के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने इस मांग का विरोध किया।

सुनवाई की प्रक्रिया जारी

अदालत ने अभियोजन पक्ष से इस याचिका पर लिखित आपत्ति दाखिल करने को कहा। सुनवाई के तय कार्यक्रम के अनुसार, गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 12 नवंबर तक जारी रहेगी। केरल हाई कोर्ट ने इससे पहले निर्देश दिया था कि मुकदमा चार महीने के भीतर पूरा किया जाए।

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