UPI पर चार्ज का मामला पहुंचा SC, जानिए क्या बदलेगा

The CSR Journal Magazine

सरकार ने दी सफाई, लेकिन CJI ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज़्यादा के कुछ खास UPI ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ ट्रांजैक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर MDR लगाने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि गेटवे का उपयोग करने वाले 96 प्रतिशत लोग इससे छूट के दायरे में आते हैं।

मामले की तकनीकी पहलू पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला कानूनी से अधिक तकनीकी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) समेत सभी पक्षों को चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 14 और 15 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन्स को रद्द करने की मांग की गई है।

सरकार का बचाव, UPI का असर गरीबों पर नहीं पड़ेगा

CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने बहस में केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल वेंकटरमन ने कहा कि जब से UPI आया है, काले धन के लेन-देन में कमी आई है। याचिकाकर्ता के वकील ने इस पर जोर दिया कि UPI से ट्रांजैक्शन करने वाले 96% लोग इससे छूट का लाभ उठाएंगे। वेंकटरमन ने कहा कि यह चार्ज सिर्फ कुछ विशेष लोगों पर लागू होगा, और लोगों के बीच जरूरी सेवाओं के लिए चार्ज की सीमा ₹5 तय की गई है।

क्या है MDR का असल मतलब?

MDR एक चार्ज है जो मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के लिए लागू होता है, न कि UPI पेमेंट करने वाले ग्राहकों के लिए। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें। UPI ऐप्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से मना किया गया है, जिससे लोगों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

केंद्र का नया फ्रेमवर्क, लेकिन हैं मुद्दे

इस महीने की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने UPI के लिए नया फ्रेमवर्क घोषित किया। इसके तहत ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% का MDR लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे और सभी प्रकार की UPI सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त रहेंगी। यह चार्ज केवल मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए है।

पैसे के लेन-देन में होगी पारदर्शिता

केंद्र का यह भी कहना है कि UPI पेमेंट की प्रणाली में पैसे के लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहेगी। ASG ने बताया कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन में लागत होती है और UPI भी इससे अछूता नहीं है। सरकार का कहना है कि इसमें कोई कानूनी वसूली नहीं है, बल्कि यह केवल सेवा प्रदाताओं के बीच सेटलमेंट फी है। इस पर सरकार अपना एक रुपया भी नहीं ले रही है।

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