हिमाचल में एनालॉग पनीर पर पूरी तरह बैन, UP-महाराष्ट्र के बाद तीसरा राज्य; होटल-ढाबों के लिए भी नए नियम

The CSR Journal Magazine
हिमाचल प्रदेश में असली पनीर के नाम पर बिक रहे एनालॉग पनीर और दूसरे नकली डेयरी उत्पादों पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रदेश सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग की सिफारिश के बाद इन उत्पादों की बिक्री, भंडारण और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है। सरकार ने यह फैसला लगातार सामने आ रहे खराब खाद्य नमूनों और उपभोक्ताओं को असली पनीर के नाम पर दूसरे उत्पाद दिए जाने की शिकायतों के बाद लिया है। नए आदेश के बाद एनालॉग से बने डेयरी उत्पादों की सप्लाई और कारोबार करना आसान नहीं होगा।

UP और महाराष्ट्र के बाद हिमाचल ने लिया फैसला

एनालॉग डेयरी उत्पादों पर सख्त कार्रवाई करने वाला हिमाचल प्रदेश अब उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा राज्य बन गया है। खाद्यापूर्ति विभाग के कार्यकारी निदेशक जितेंद्र साजटा ने भी सरकार की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने की पुष्टि की है। इस फैसले का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा जो एनालॉग पनीर की खरीद-बिक्री या सप्लाई करते हैं। सरकार ने साफ किया है कि प्रतिबंधित उत्पादों के कारोबार पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

दिखता असली पनीर जैसा, लेकिन होता अलग

एनालॉग पनीर देखने में काफी हद तक असली पनीर जैसा दिखाई देता है। इसकी कीमत भी आम तौर पर कम होती है, इसलिए कई जगह इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस तरह के उत्पादों में दूध से बने पारंपरिक पनीर की जगह वनस्पति तेल और दूसरे घटकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाया है। हालांकि, किसी उत्पाद के स्वास्थ्य प्रभाव का आकलन उसके सटीक घटकों और खाद्य सुरक्षा मानकों के आधार पर किया जाता है। इसलिए हर एनालॉग उत्पाद को एक ही तरह से स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानना सही नहीं होगा।

होटल-ढाबों को बताना होगा कौन सा पनीर परोस रहे

सरकार के नए नियमों का असर सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को अपने मेन्यू में स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि ग्राहकों को किस प्रकार का पनीर परोसा जा रहा है। इसका मकसद ग्राहकों को उनके खाने में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद की जानकारी देना है। इससे लोग अपनी पसंद के मुताबिक पनीर का चुनाव कर सकेंगे।

बिल से लेकर बैच नंबर तक रखना होगा रिकॉर्ड

पैकेटबंद पनीर का कारोबार करने वाले व्यापारियों को अब खरीद से जुड़े बिल, उत्पाद का सोर्स, उत्पादन स्थल और बैच की जानकारी रखना जरूरी होगा। सरकार की कोशिश है कि पनीर की सप्लाई चेन का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। इससे किसी संदिग्ध या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद का स्रोत पता लगाने में खाद्य विभाग को मदद मिल सकेगी।

खुले में सप्लाई पर भी सख्ती

अब तक कई जगह वाहनों के जरिए खुले में एनालॉग पनीर की सप्लाई किए जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे उत्पादों की खरीद और सप्लाई का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं होने से खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने निगरानी की चुनौती रहती थी। नए आदेश के बाद ऐसे कारोबार पर नजर रखने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि उपभोक्ताओं को पनीर के नाम पर ऐसा उत्पाद न मिले जिसकी जानकारी उन्हें पहले से न हो।

क्या होगा असर?

हिमाचल में इस प्रतिबंध के बाद पनीर की बिक्री और सप्लाई व्यवस्था पर निगरानी बढ़ेगी। होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पनीर की जानकारी ग्राहकों को मिलने से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं कारोबारियों के लिए बिल और सोर्स का रिकॉर्ड रखना जरूरी होने से खाद्य विभाग के लिए संदिग्ध उत्पादों की जांच करना आसान हो सकता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos