हामिद अंसारी ने नेहरू के बयान का किया जिक्र, ‘हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता’ को बताया खतरा; BJP ने साधा निशाना

The CSR Journal Magazine

अंसारी का विवादित बयान

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज़्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। यह बयान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक टिप्पणी के संदर्भ में दिया गया। अंसारी के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हामिद अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कट्टरपंथियों और अलगाववादियों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलेंगे।

बीजेपी का हमला

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी हामिद अंसारी को निशाना बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी ने हिंदुओं को चरमपंथी करार दिया है और यह सब राहुल गांधी के कहने पर किया गया है। भंडारी ने कहा, ‘हिंदू समूहों को लश्कर-ए-तैयबा से भी बड़ा खतरा बताया गया था। कांग्रेस आतंकवाद का समर्थन करने वाली और हिंदू-विरोधी पार्टी है।’

अंसारी का संदर्भ

हामिद अंसारी ने दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की किताब ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का जिक्र किया। उन्होंने नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक में उन उभरते रुझानों पर चिंता जताई जो नागरिक राष्ट्रवाद के सिद्धांत को चुनौती देते हैं। अंसारी ने कहा, ‘हाल के वर्षों में, हमने ऐसे रुझानों को देखा है जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बढ़ रहे हैं।’

नेहरू की चेतावनी

अंसारी ने कार्यक्रम में नेहरू की वह चेतावनी भी याद की, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज़्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता थी।’ यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज की गई थी। अंसारी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि नेहरू की ये टिप्पणियाँ आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम का आयोजन

हामिद अंसारी ने ये बातें 18 सितंबर को नई दिल्ली में इंडियन इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘रिमेंबरिंग ए पॉलीमैथ: द लाइफ़ एंड टाइम्स ऑफ़ अब्दुल गफूर नूरानी’ नामक कार्यक्रम में कहीं। उनके इस भाषण के दौरान, अंसारी ने नूरानी की आलोचना का भी उल्लेख किया, जिसमें नागरिक राष्ट्रवाद से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बदलाव की बात की गई थी।

कट्टरपंथ के खतरों की चर्चा

हाल ही में, देश में सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाले कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कट्टरपंथ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंसारी का बयान इस दिशा में एक नई बहस को जन्म दे सकता है, जिसमें धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की परिभाषा पर विचार किया जाएगा। उनके विचारों ने उन चिंताओं को दोबारा सामने लाया है, जो अक्सर नजरअंदाज की जाती हैं।

अंसारी का चिंताजनक दृष्टिकोण

हामिद अंसारी ने यह भी बताया कि हाल के समय में हमें ऐसे रुझानों को देखने को मिला है जो नागरिक राष्ट्रवाद के स्थापित सिद्धांत के खिलाफ हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक नई और काल्पनिक प्रथा के रूप में उभर रही है, जो समाज में विभाजन पैदा कर सकती है।

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