त्योहार की खुशी पर महंगे सफर की मार, दिवाली-छठ पर हवाई टिकटों ने बिगाड़ा बजट

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ट्रेन में सीटों का संकट, हवाई किराये ने बढ़ाई मुश्किलें; दिवाली-छठ पर घर पहुंचना हुआ महंगा

दिवाली और छठ पूजा के मौके पर उत्तर प्रदेश और बिहार जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों के सामने इस बार दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक ओर लंबी दूरी की ट्रेनों में आरक्षित सीटें मिलना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर हवाई सफर का किराया भी कई यात्रियों के बजट से बाहर होता दिखाई दे रहा है। खासकर मुंबई, बेंगलुरु और दूसरे बड़े शहरों में नौकरी या कारोबार करने वाले बिहार के लोगों के लिए त्योहार पर घर पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है। दिए गए किराया विवरण के अनुसार, मुंबई से पटना के लिए एकतरफा हवाई किराया 25,643 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि बेंगलुरु से पटना जाने के लिए यात्रियों को 26,053 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। समस्या सिर्फ हवाई किराये तक सीमित नहीं है। दिवाली और छठ के दौरान बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। मुंबई, पुणे, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी परिवार त्योहार मनाने के लिए अपने गांव और कस्बों की ओर लौटते हैं। ऐसे में रेलगाड़ियों में सीटों की मांग बढ़ने से आरक्षण मिलना कठिन हो जाता है। जिन यात्रियों को समय पर रेल टिकट नहीं मिलता, उन्हें विमान का विकल्प चुनना पड़ता है। इसका असर हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

मुंबई-पटना और बेंगलुरु-पटना का किराया 25 हजार रुपये के पार

त्योहारों के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों में आई तेजी का सबसे बड़ा असर बिहार जाने वाले यात्रियों पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध किराया विवरण के मुताबिक, 7 नवंबर 2026 यानी दिवाली से एक दिन पहले मुंबई से पटना का एकतरफा हवाई किराया 25,643 रुपये और बेंगलुरु से पटना का किराया 26,053 रुपये दर्ज किया गया था। इसी दिन मुंबई से वाराणसी के लिए 15,926 रुपये और बेंगलुरु से वाराणसी के लिए 17,698 रुपये तक का किराया सामने आया। ये आंकड़े 13 अक्टूबर को उपलब्ध टिकटों की कीमतों पर आधारित थे। सामान्य दिनों में यही सफर काफी कम खर्च में किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अक्टूबर की कुछ सामान्य तारीखों में मुंबई से पटना के लिए लगभग 8,700 रुपये और बेंगलुरु से पटना के लिए करीब 13,000 रुपये का किराया उपलब्ध था। हालांकि, अलग-अलग विमानन कंपनियों, उड़ानों और बुकिंग की शर्तों के कारण इन कीमतों में अंतर हो सकता है। इस तुलना से साफ है कि त्योहारों के आसपास यात्रा की तारीख बदलने से भी खर्च में बड़ा अंतर पड़ सकता है। जिन परिवारों में चार या पांच सदस्य एक साथ यात्रा करते हैं, उनके लिए स्थिति और कठिन हो जाती है। उदाहरण के तौर पर, यदि चार लोगों को प्रति व्यक्ति 25,000 रुपये से अधिक का टिकट खरीदना पड़े, तो केवल एक तरफ की हवाई यात्रा पर ही एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो सकता है। वापसी का टिकट और अन्य यात्रा खर्च इसमें अलग से जुड़ेंगे।

आखिर क्यों बढ़ जाते हैं हवाई टिकटों के दाम?

त्योहारों के समय हवाई किराये बढ़ने के पीछे सबसे प्रमुख कारण मांग और उपलब्ध सीटों के बीच का अंतर है। दिवाली और छठ के दौरान हजारों लोग एक ही समय में अपने घर पहुंचना चाहते हैं। लेकिन किसी भी मार्ग पर विमानों की सीटों की संख्या सीमित होती है। जब कम समय में बड़ी संख्या में यात्री टिकट खरीदने लगते हैं, तो कम कीमत वाली श्रेणियों के टिकट पहले बिक जाते हैं। इसके बाद बची सीटों के लिए यात्रियों को अपेक्षाकृत अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। हवाई टिकटों की कीमतें कई बार तारीख, उड़ान के समय, बुकिंग की अवधि और उपलब्ध सीटों के आधार पर बदलती रहती हैं। सुबह या शाम की सुविधाजनक उड़ानों में मांग अधिक होने पर किराया दूसरी उड़ानों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। सीधे विमान से यात्रा करने की सुविधा भी कुछ यात्रियों को महंगा टिकट खरीदने के लिए मजबूर करती है, क्योंकि उनके पास लंबी छुट्टी नहीं होती। ईंधन, विमान संचालन, हवाई अड्डों और अन्य परिचालन खर्च भी विमानन कंपनियों की लागत का हिस्सा हैं। हालांकि, किसी खास उड़ान के किराये में हुई वृद्धि को केवल ईंधन की कीमतों से जोड़ना सही नहीं होगा। त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या, उपलब्ध सीटें और टिकट खरीदने का समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

72 प्रतिशत यात्रियों ने बताया कि इस बार यात्रा महंगी हुई

त्योहारी यात्रा के बढ़ते खर्च का असर यात्रियों के अनुभवों में भी सामने आया है। नागरिक सहभागिता मंच लोकलसर्किल्स के एक सर्वेक्षण में 277 जिलों के हवाई यात्रियों से प्रतिक्रियाएं ली गईं। सर्वेक्षण में शामिल 72 प्रतिशत यात्रियों ने कहा कि 2025 की तुलना में 2026 में घर जाने के लिए उन्हें अधिक किराया देना पड़ रहा है। इनमें 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि वे पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक खर्च कर रहे हैं, जबकि 9 प्रतिशत ने कहा कि उनका खर्च दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल लोगों के अनुभवों पर आधारित हैं। इन्हें देश के प्रत्येक मार्ग पर किराये में हुई वृद्धि का आधिकारिक औसत नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी ये संकेत देते हैं कि त्योहारों के समय हवाई यात्रा का खर्च अनेक परिवारों के लिए चिंता का विषय बन रहा है।

ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची, यात्रियों के सामने सीमित विकल्प

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए रेल यात्रा परंपरागत रूप से सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक है। मुंबई, पुणे, दिल्ली, सूरत और बेंगलुरु से बड़ी संख्या में लोग पटना, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, छपरा और गोरखपुर सहित विभिन्न शहरों की ओर जाते हैं। त्योहारों के समय नियमित ट्रेनों में आरक्षित सीटों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों को प्रतीक्षा सूची वाले टिकट पर निर्भर रहना पड़ सकता है। कई लोगों के लिए केवल घर पहुंचना ही नहीं, बल्कि समय पर पहुंचना भी जरूरी होता है। छठ पूजा में परिवार के साथ घाट पर जाना, पूजा की तैयारियां करना और व्रत से जुड़ी व्यवस्थाओं में शामिल होना महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रतीक्षा सूची के टिकट के कंफर्म होने का इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को छुट्टी की सीमाओं का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसी वजह से कुछ यात्री महंगे होने के बावजूद हवाई यात्रा चुनते हैं।
रेलवे ने इस चुनौती से निपटने के लिए त्योहारों के दौरान विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है। 13 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के लिए 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 के बीच 8,454 विशेष रेलगाड़ी फेरे अधिसूचित किए गए थे। इसके अलावा, इस अवधि में लगभग 3.4 लाख नियमित रेलगाड़ी फेरे संचालित करने की योजना बताई गई थी। इस व्यवस्था से यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं, लेकिन हर विशेष ट्रेन हर शहर या यात्री के गंतव्य तक नहीं जाती। किसी ट्रेन में अतिरिक्त फेरे घोषित होने का अर्थ यह भी नहीं है कि उसमें सभी तारीखों पर सीटें उपलब्ध होंगी। यात्रियों को अपने प्रस्थान स्टेशन, गंतव्य और यात्रा की तारीख के अनुसार उपलब्धता की जांच करनी चाहिए।

विशेष ट्रेनें चलने के बावजूद क्यों बनी हुई है परेशानी?

त्योहारी विशेष ट्रेनों से यात्रियों को राहत देने की कोशिश की जाती है, लेकिन यात्रियों की जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं। किसी को मुंबई से पटना जाना है, किसी को पुणे से दरभंगा, तो किसी को बेंगलुरु से सहरसा या मुजफ्फरपुर पहुंचना है। कई बार विशेष ट्रेन का मार्ग सीधे गंतव्य तक नहीं जाता, जिससे यात्रियों को बीच में ट्रेन बदलनी पड़ती है। इसके अलावा, परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक ही ट्रेन में सीटें मिलना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अकेले यात्रा करने वाले व्यक्ति की तुलना में बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को अधिक सुविधाजनक विकल्प की जरूरत होती है। लंबी दूरी के सफर में प्रतीक्षा सूची, भीड़ और समय पर पहुंचने की चिंता भी बनी रहती है। रेलवे की ओर से अतिरिक्त सेवाओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन यात्रियों के लिए इनकी जानकारी समय रहते मिलना भी उतना ही जरूरी है। केवल विशेष ट्रेन की घोषणा देखना पर्याप्त नहीं है। यह जानना आवश्यक है कि ट्रेन किस दिन चलेगी, किन स्टेशनों पर रुकेगी और उसमें आरक्षण की स्थिति क्या है।

क्या यात्रियों के पास दूसरे विकल्प भी हैं?

महंगे हवाई टिकट और नियमित ट्रेनों में सीटों की कमी के बीच यात्रियों के पास कुछ दूसरे विकल्प भी हैं। सबसे पहले, यदि यात्रा की तारीख में एक या दो दिन का बदलाव संभव है, तो अलग-अलग तारीखों के किराये की तुलना करनी चाहिए। कई बार त्योहार से ठीक पहले के सबसे व्यस्त दिन की जगह उससे पहले या बाद की तारीख चुनने पर कम कीमत का टिकट मिल सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर तारीख पर किराया कम ही हो। दूसरा विकल्प नजदीकी हवाई अड्डों और वैकल्पिक गंतव्यों की जांच करना है। उदाहरण के लिए, पटना के बजाय वाराणसी या किसी अन्य सुविधाजनक शहर तक विमान से पहुंचकर आगे की रेल या सड़क यात्रा की संभावना देखी जा सकती है। लेकिन ऐसा करने से पहले दोनों यात्राओं का कुल खर्च, बीच में लगने वाला समय और उपलब्ध रेल या सड़क परिवहन की स्थिति जांचना जरूरी है। केवल विमान का टिकट सस्ता होने के आधार पर फैसला लेने से कुल खर्च बढ़ भी सकता है।
तीसरा विकल्प विशेष ट्रेनों की उपलब्धता जांचना है। रेलवे की आधिकारिक आरक्षण व्यवस्था और राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली के माध्यम से ट्रेन की समय-सारणी, वर्तमान स्थिति तथा उपलब्धता की जानकारी ली जा सकती है। यात्रा की तारीख और गंतव्य के अनुसार विकल्प तलाशने से उपयोगी ट्रेन मिल सकती है। तत्काल आरक्षण भी कुछ यात्रियों के लिए विकल्प हो सकता है, लेकिन इसमें सीट मिलने की गारंटी नहीं होती। इसलिए केवल तत्काल टिकट के भरोसे यात्रा की योजना बनाना उचित नहीं है। यदि टिकट प्रतीक्षा सूची में है, तो यात्रा से पहले उसकी स्थिति और लागू रेलवे नियमों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

दिवाली और छठ की तारीखों का रखें ध्यान

इस वर्ष दिवाली 8 नवंबर 2026 को और छठ पूजा का मुख्य पर्व 14 और 15 नवंबर को पड़ रहा है। इन तारीखों के आसपास बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की मांग बढ़ने की संभावना है।  हालांकि, सभी यात्रियों की यात्रा एक ही दिन नहीं होती। कुछ लोग दिवाली से पहले घर पहुंचना चाहते हैं, जबकि कई परिवार छठ पूजा के लिए अलग से यात्रा करते हैं। इस कारण नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में अलग-अलग तारीखों पर किराये और सीटों की स्थिति में अंतर हो सकता है। यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टिकटों पर दिखाई देने वाला किराया स्थायी नहीं होता। बुकिंग के समय उपलब्ध सीटों, उड़ान और टिकट की शर्तों के अनुसार कीमत बदल सकती है। इसलिए किसी किराये को अंतिम मानने से पहले संबंधित विमानन कंपनी या अधिकृत बुकिंग मंच पर उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

परिवारों के बजट पर बढ़ता दबाव

त्योहार केवल यात्रा का अवसर नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने और परंपराओं से जुड़े रहने का भी मौका होते हैं। दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोगों के लिए दिवाली और छठ का विशेष महत्व है। वे पूरे साल की व्यस्तता के बीच कुछ दिन परिवार के साथ बिताना चाहते हैं। लेकिन जब आने-जाने का खर्च ही बड़ी रकम बन जाए, तो कई परिवारों को अपनी योजना बदलने पर विचार करना पड़ता है। यदि किसी परिवार के चार सदस्यों के लिए एक तरफ की हवाई यात्रा पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च होने की स्थिति बनती है, तो वापसी के टिकट, स्थानीय परिवहन और त्योहार की तैयारियों के लिए अलग बजट रखना मुश्किल हो सकता है। कम आय वाले कामगारों और सीमित छुट्टी वाले कर्मचारियों के सामने यह चुनौती और गंभीर हो जाती है। कुछ यात्री यात्रा टालने या त्योहार के बाद घर जाने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, ऐसा फैसला हर किसी के लिए संभव नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी उपस्थिति छठ पूजा या परिवार के किसी महत्वपूर्ण आयोजन में जरूरी होती है।

यात्रियों को राहत देने के लिए क्या जरूरी है?

त्योहारों के समय यात्रा की मांग हर साल बढ़ती है, इसलिए रेलवे और विमानन सेवाओं की क्षमता तथा यात्रियों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। रेलवे की ओर से विशेष ट्रेनों की समय पर घोषणा, अतिरिक्त सेवाओं की स्पष्ट जानकारी और आरक्षण की स्थिति का नियमित अद्यतन यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकता है। विमानन क्षेत्र में भी यात्रियों को किराये की स्पष्ट जानकारी और अलग-अलग तारीखों के विकल्प आसानी से उपलब्ध होने चाहिए। अत्यधिक मांग वाले मार्गों पर उपलब्ध सेवाओं की जानकारी समय पर मिलने से यात्रियों को योजना बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल मांग बढ़ने के आधार पर किसी विशेष किराये को अनुचित घोषित नहीं किया जा सकता; इसके लिए संबंधित उड़ान की लागत, उपलब्ध सीटों और मूल्य निर्धारण की परिस्थितियों का आकलन जरूरी है। कुल मिलाकर, दिवाली और छठ से पहले बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय पर और उचित खर्च में घर पहुंचना है। मुंबई-पटना और बेंगलुरु-पटना जैसे मार्गों पर 25 हजार रुपये से अधिक के एकतरफा किराये ने इस परेशानी को उजागर किया है। रेलवे की विशेष ट्रेनें कुछ राहत दे सकती हैं, लेकिन यात्रियों को अपनी तारीख, गंतव्य और बजट के अनुसार विकल्पों की तुलना करनी होगी। समय रहते टिकटों की उपलब्धता जांचना और यात्रा की योजना में थोड़ी लचीलापन रखना फिलहाल सबसे व्यावहारिक रास्ता है।

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