त्योहारों में मिलावटखोरी पर तुकाराम मुंढे का बड़ा प्रहार: FDA लागू करेगा नया सुरक्षा सिस्टम

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तुकाराम मुंढे का कड़ा रुख: त्योहारों पर महाप्रसाद और भंडारे भी आएंगे फूड सिक्योरिटी के दायरे में, HFSS फूड पर रहेगी पैनी नजर

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने आगामी त्योहारी सीजन के मद्देनजर राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व और कड़ा रुख अपनाया है। मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए तेज-तर्रार IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी खाद्य व्यवसायी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नया थ्री-स्टेज एक्शन सिस्टम (Three-Stage Action System) और 12-महीने का फेस्टिवल कैलेंडर लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने उपभोक्ताओं को हाई-फैट, हाई-शुगर और हाई-सॉल्ट (HFSS) सामग्री वाले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करने या बेहद सीमित मात्रा में उपयोग करने की कड़ी सलाह दी है।

त्योहारों के लिए नया ‘थ्री-स्टेज’ और ’12-महीने का कैलेंडर’ सिस्टम

त्योहारों के आते ही बाजार में मावा, मिठाई, दूध उत्पाद, खाद्य तेल और मसालों की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर मिलावटखोरी की शिकायतें सामने आती हैं। इसे रोकने के लिए कमिश्नर मुंढे ने एक व्यापक राज्य-व्यापी खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन योजना तैयार की है। इस नए सिस्टम को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया गया है।
त्योहार से पहले (Before the Festival): इस चरण में कच्चे माल की सघन जांच, गोदामों और कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण और संदिग्ध नमूनों को जब्त कर टेस्टिंग के लिए भेजा जाएगा।
त्योहार के दौरान (During the Festival): मिठाई की दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंटों और सार्वजनिक उत्सवों (जैसे गणेशोत्सव और भंडारा) में परोसे जाने वाले भोजन की रैंडम चेकिंग होगी।
त्योहार के बाद (After the Festival): त्योहार बीत जाने के बाद बचे हुए बासी खाद्य पदार्थों की री-साइकलिंग और दोबारा बिक्री को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मुंढे ने जानकारी दी कि FDA ने पहली बार एक 12-महीने का फेस्टिवल कैलेंडर तैयार किया है। इस कैलेंडर के तहत सालभर आने वाले हर छोटे-बड़े त्योहार के आधार पर मिलावट के जोखिम वाली विशिष्ट खाद्य सामग्रियों की मैपिंग की गई है। उदाहरण के लिए, रक्षाबंधन और दीपावली पर खोया या मावा और मिठाइयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, तो वहीं अन्य त्योहारों पर खाद्य तेल और स्नैक्स की जांच तेज की जाएगी।

‘No Brand Is Above The Law’ महाप्रसाद और भंडारे भी दायरे में

आमतौर पर सार्वजनिक पंडालों और धार्मिक आयोजनों में वितरित होने वाले भोजन को कड़े नियमों से छूट मिल जाती थी, लेकिन मुंढे ने साफ कर दिया है कि कानून सबके लिए समान है। उन्होंने कहा, “यह बात महाप्रसाद या भंडारे की नहीं है, बल्कि इंसानी जिंदगी और रेगुलेशन की है। चाहे कोई छोटा स्टॉल हो, क्लाउड किचन हो या कोई बेहद प्रतिष्ठित बड़ा ब्रांड, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”नए सिस्टम के तहत केवल वैध लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन धारक ही त्योहारों में खाद्य सामग्री का निर्माण और आपूर्ति कर सकेंगे। गणेशोत्सव मंडलों और महाप्रसाद आयोजकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे खाना बनाने वाले रसोइयों की स्वच्छता, साफ पानी के उपयोग और स्वच्छ वातावरण का विशेष ध्यान रखें, अन्यथा उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

HFSS सामग्री से बचने की सख्त चेतावनी

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तुकाराम मुंढे का मुख्य जोर लोगों की जीवनशैली और खान-पान की आदतों में सुधार लाने पर था। उन्होंने उपभोक्ताओं से त्योहारों की आड़ में अत्यधिक तली-भुनी, मीठी और नमकीन चीजों यानी HFSS (High Fat, Sugar, and Salt) फूड प्रोडक्ट्स से दूरी बनाने की अपील की। मुंढे ने कहा, “त्योहार खुशियां मनाने के लिए होते हैं, बीमारियां घर लाने के लिए नहीं। त्योहारों के दौरान लोग अक्सर ओवरईटिंग (ज्यादा खाना) कर लेते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। मीठे और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन केवल सीमित मात्रा में ही करें। स्वादिष्ट भोजन के साथ-साथ भोजन का पौष्टिक और सुरक्षित होना भी जरूरी है।”

स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में HFSS फूड पूरी तरह प्रतिबंधित

बच्चों के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने बताया कि स्कूलों के आसपास बच्चों को आकर्षित करने वाले जंक फूड की बिक्री पर नकेल कस दी गई है। FSSAI के नियमों के तहत महाराष्ट्र में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के 50 मीटर के दायरे में हाई-फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) वाले उत्पादों की बिक्री, विज्ञापन, उत्पादन और भंडारण को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।उन्होंने गर्व से बताया कि इस कड़े कदम के बाद मुंबई और महाराष्ट्र के कई नामचीन स्कूलों ने अपने केंटीन का मेन्यू पूरी तरह बदल दिया है। उदाहरण के लिए, मुंबई के स्कूल केंटीन में अब अनहेल्दी वड़ा पाव की जगह पौष्टिक इडली और सांभर ने ले ली है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस नियम को लागू करने के लिए स्कूलों को ग्राम पंचायतों और सरपंचों की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं।

मिलावट पर जीरो टॉलरेंस: अब तक 3100 से अधिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

जब से तुकाराम मुंढे ने मई महीने में पदभार संभाला है, राज्यभर के खाद्य व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है। मुंढे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 31 जुलाई तक राज्यभर में 3,100 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया है। इस बड़े क्रैकडाउन में नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वाले 135 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं और 750 से अधिक दुकानदारों को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं, इस ‘तुकाराम इफेक्ट’ के कारण रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने चिकन लॉलीपॉप, तंदूरी और मंचूरियन जैसे चीनी व्यंजनों में कैंसरकारी कृत्रिम रंगों (Artificial Food Colors) का उपयोग करना बेहद कम या बंद कर दिया है, जिससे अब खाना पहले की तुलना में कम चमकीला लेकिन अधिक सुरक्षित दिखाई दे रहा है। इसके अलावा, महाराष्ट्र में नकली या एनालॉग पनीर पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है और रेस्टोरेंट में ग्राहकों को मुफ्त में स्वच्छ पीने का पानी देना अनिवार्य कर दिया गया है।

जनता से अपील: “खाद्य सुरक्षा केवल FDA की नहीं, सबकी साझी जिम्मेदारी”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मुंढे ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया कि केवल सरकारी तंत्र के भरोसे पूरी तरह सुरक्षित समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता। खाद्य सुरक्षा एक साझी जिम्मेदारी (Shared Responsibility) है, जिसमें नागरिक, खाद्य व्यवसायी और नियामक संस्था तीनों को मिलकर काम करना होगा।उन्होंने उपभोक्ताओं को जागरूक करते हुए कहा कि बाहर खाना खाते समय या सामान खरीदते समय सतर्क रहें। ग्राहकों को हमेशा चार बुनियादी चीजें जांचनी चाहिए-
प्रतिष्ठान या रेस्टोरेंट की साफ-सफाई और स्वच्छता।
क्या उस दुकानदार के पास वैध FDA लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्रदर्शित है।
पैकेज्ड फूड खरीदते समय उसकी मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी डेट और इस्तेमाल की गई सामग्रियों (Ingredients) की सूची।
खुले और बिना सील वाले खाद्य तेल की खरीद से पूरी तरह बचें, क्योंकि इसमें मिलावट का सबसे अधिक खतरा होता है।

अबकी स्वच्छ सेहतमंद त्योहार

तुकाराम मुंढे के इन कड़े और सुधारात्मक कदमों से यह साफ है कि इस साल का त्योहारी सीजन महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और मिलावटमुक्त होने जा रहा है। FDA का स्पष्ट संदेश है कि यदि किसी भी व्यापारी ने त्योहारों की आड़ में जनता की सेहत से खिलवाड़ करने की कोशिश की, तो उसे 5 लाख रुपये तक के जुर्माने और 6 महीने की जेल जैसी सख्त कानूनी सजा भुगतनी होगी।

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