सुनेत्रा पवार को ‘गूंगी गुड़िया’ कहना कांग्रेस को भारी पड़ सकता है!

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान गूंगी गुड़िया शब्द के इर्दगिर्द घूम रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता सुनेत्रा पवार को कांग्रेस के एक नेता द्वारा ‘गूंगी गुड़िया’ कहे जाने से बवाल मच गया है। यह बयान सुनेत्रा पवार को अपमानित करने वाला माना जा रहा है। इस विवाद पर NCP के विधायकों ने कांग्रेस को घेर लिया और इंदिरा गांधी की याद दिलाई।

इंदिरा गांधी का उदाहरण और महिला अस्मिता

एनसीपी विधायकों का कहना है कि कांग्रेस के नेता का यह बयान उनकी हताशा को दर्शाता है। इस घटनाक्रम ने 1966 में डॉ. राम मनोहर लोहिया द्वारा इंदिरा गांधी को ‘गूंगी गुड़िया’ कहे जाने की याद ताजा कर दी। उस समय इंदिरा गांधी मात्र तीन वर्षों में देश की सबसे ताकतवर नेता बन गई थीं। ऐसे में, कांग्रेस को भी समझना चाहिए कि राजनीति में महिला नेताओं को कमतर आंकना कभी उचित नहीं है।

महिलाओं को राजनीति में सम्मान की आवश्यकता

इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीति में महिलाओं को किस नजरिए से देखा जाता है। आमतौर पर महिलाओं को दोयम दर्जे का माना जाता है। भारत सहित कई देशों में महिलाओं को उच्च पदों पर कम रखा गया है। अमेरिका में आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बन सकी। ऐसे में, NCP का कहना है कि सुनेत्रा पवार को इस तरह अपमानित कर कांग्रेस ने अपने लिए सिर्फ गड्ढे खोदे हैं।

सुनेत्रा पवार की भूमिका

सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री हैं और बीड जिले की प्रभारी मंत्री भी हैं। इस विवाद के दौरान, जब पत्रकारों ने सवाल किया, तो NCP के विधायक धनंजय मुंडे ने जवाब दिया। इसी प्रोग्राम में कॉंग्रेस के नेता हर्षवर्धन सपकाल ने सुनेत्रा को ‘गूंगी गुड़िया’ कहकर बबाल खड़ा कर दिया। NCP ने इस बुरे बर्ताव का विरोध किया और कांग्रेस को गंभीरता से लेने की सलाह दी।

महिलाओं की राजनीतिक यात्रा

इतिहास गवाह है कि कई महिलाएं, जिनको शुरुआत में कमजोर माना गया, बाद में अपनी ताकत साबित कर चुकी हैं। जैसे सुचेता कृपलानी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए थे। इसलिए, इस मामले में भी महिलाओं को गूंगी गुड़िया मानना एक गलत धारणा है। भारतीय राजनीति ने कई महिला नेताओं को देखा है जिन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर खुद को साबित किया है।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

दुनिया के कई देशों में महिलाएं उच्च राजनीतिक पद पर पहुंच चुकी हैं, जैसे श्रीलंका की सिरीमाओ भण्डारनायके। लेकिन यह कहना कि भारत में भी महिलाएं उच्च पद पर नहीं पहुंच सकतीं, एक पुरानी सोच है। ममता बनर्जी, मायावती और राबड़ी देवी जैसी नेताओं ने अपने कार्यकाल में अद्वितीय कार्य किए हैं।

महिलाओं की ताकत और संघर्ष

महाराष्ट्र की राजनीति में कोलाहल के बाद भी, सुनेत्रा पवार जैसे नेता यह साबित कर रही हैं कि स्त्री शक्ति को कमतर आंकना बड़ी भूल है। इतिहास से हम सीख सकते हैं कि कोई भी नेता अपने संघर्ष और कार्यों के माध्यम से अपने स्थान को स्थापित कर सकती है। इस तरह की टिप्पणियाँ केवल रुकावट हैं, जो महिलाओं की प्रगति में बाधा डालती हैं।

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