मीडिया के जरिए फैसला नहीं दिया जा सकता: Rajasthan HC के जज पर लगे आरोपों पर बोले CJI सूर्य कांत

The CSR Journal Magazine
राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगे आरोपों पर सीजेआई सूर्य कांत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के मामलों का निपटारा मीडिया के जरिए नहीं किया जा सकता। न्यायिक प्रक्रियाओं को गंभीरता से अपनाने का समय है। सीजेआई सूर्य कांत इस समय जर्मनी और इंग्लैंड की चार दिन की यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि आरोपों पर उचित विचार के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।

संस्थानिक प्रक्रियाओं पर जोर

सीजेआई ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि राजस्थान हाई कोर्ट के ACJ को पद पर बनाए रखने, ट्रांसफर करने या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई सक्षम संस्थागत प्राधिकरण के माध्यम से की जाए। न्यायमूर्ति मेहता ने जस्टिस शर्मा के कार्यकाल में प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए CJI ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही है।

जजों की शिकायतें मीडिया के जरिए नहीं

CJI सूर्य कांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जजों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा मीडिया में चल रहे दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्रों की सामग्री पर सार्वजनिक तौर पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। महज आरोप लगाने से किसी जज के खिलाफ फैसला नहीं माना जा सकता।

जस्टिस मेहता की शिकायतें

जस्टिस मेहता ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि राजस्थान हाई कोर्ट का प्रमुख बनाने के लिए तुरंत किसी अन्य राज्य से चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जाए। उन्होंने संजीव शर्मा पर चयनित मामलों की सूची तैयार करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया, जिसमें पैसे वाले मुकदमों को प्राथमिकता दी जा रही थी। जस्टिस मेहता ने कई मामलों को सबूत के तौर पर पेश किया है।

एक महत्वपूर्ण समय

हाल ही में सुरक्षा के बिना आरोपों का सामना कर रहे जस्टिस शर्मा के खिलाफ ऐसे समय में शिकायतें आई हैं, जब CJI जर्मनी यात्रा पर हैं। जर्मनी में वह न्यायिक द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा कर रहे हैं। इस बीच जस्टिस मेहता की शिकायतों को लेकर मीडिया में रिपोर्ट आने पर CJI ने यह बयान जारी किया।

जांच की प्रक्रिया जारी

CJI ने कहा कि इस मामले की जांच सही स्तर पर की जा रही है और इसमें जस्टिस मेहता की दी गई जानकारी और जस्टिस शर्मा के उत्तर दोनों को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का काम समय पर और सही तरीके से होना चाहिए, और किसी भी आरोप को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

भविष्य की संभावनाएं

CJI और कॉलेजियम के अन्य सदस्य हाल ही में की गई नियुक्तियों के संदर्भ में राजस्थान हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कार्यरत हैं। इन सभी घटनाक्रमों के बीच, न्यायपालिका की स्थिरता और समझदारी रखने वाली प्रक्रिया की आवश्यकता है। यह मामला संबंधित न्यायालयों में चर्चित रह सकता है।

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