12 साल का इंतजार और मिनटों का दावा फेल, तकनीकी खामियों के कारण बरापुला फ्लाईओवर पर रेंग रही दिल्ली

The CSR Journal Magazine

1,635 करोड़ की लागत और 12 साल का इंतजार, उद्घाटन के बाद बारापुला फेज-3 बना दिल्ली का नया ‘बॉटलनेक’

देश की राजधानी दिल्ली में यातायात को सुगम बनाने और पूर्वी दिल्ली को दक्षिण दिल्ली से जोड़ने के दावों के साथ शुरू किया गया बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर राहत की जगह आफत का मार्ग साबित हो रहा है। करीब 1,635 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत और 12 साल के लंबे इंतजार के बाद जब इस नवनिर्मित फ्लाईओवर का उद्घाटन किया गया, तो दिल्ली वासियों को उम्मीद थी कि अब मयूर विहार से एम्स (AIIMS) और धौला कुआं की दूरी मिनटों में तय हो जाएगी। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। उद्घाटन के ठीक बाद इस कॉरिडोर पर 3 किलोमीटर से भी लंबा भयंकर ट्रैफिक जाम लग गया, जिसने पूरी दिल्ली की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। इस जाम में न केवल आम दफ्तर जाने वाले लोग फंसे रहे, बल्कि कई आपातकालीन जीवन रक्षक एम्बुलेंस भी घंटों रेंगती नजर आईं।

दिल्ली की बहुप्रतीक्षित परियोजना

यह परियोजना दिल्ली के सबसे प्रतीक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक थी। लोक निर्माण विभाग (PWD) का दावा था कि इस मार्ग के चालू होने से सराय काले खां, आश्रम चौक और डीएनडी (DND) फ्लाईवे पर लगने वाले ट्रैफिक का दबाव लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। उद्घाटन के बाद शुरुआती कुछ घंटों में तो सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही व्यस्त समय (Peak Hours) शुरू हुआ, वाहनों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरी ट्रैफिक व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह गई। फ्लाईओवर के शुरू होते ही मयूर विहार से दक्षिण दिल्ली की तरफ जाने वाले हजारों वाहन एक साथ इस कॉरिडोर पर चढ़ गए, जिससे सराय काले खां के पास एक अभूतपूर्व गतिरोध (Deadlock) पैदा हो गया। इस भयंकर अव्यवस्था ने न केवल प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और यातायात पुलिस की कार्यशैली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थिति इस कदर बेकाबू हो गई कि अधिकारियों को आनन-फानन में स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लेना पड़ा। संयुक्त निरीक्षण और बैठकों के बाद भी सड़कों पर रेंगती गाड़ियों की कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

जाम के 4 प्रमुख कारण: 15 लेन का भारी ट्रैफिक बनाम 3 लेन की संकरी सड़क

इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह यातायात के भारी वॉल्यूम और सड़क की क्षमता के बीच का भारी अंतर है। नया बारापुला फेज-3 कॉरिडोर मयूर विहार से आने वाले ट्रैफिक को सीधे खींचता है। लेकिन जैसे ही यह पुराना बारापुला फ्लाईओवर के पास पहुंचता है, वहां पहले से ही रिंग रोड, आश्रम, डीएनडी फ्लाईवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और सराय काले खां अंतर्राज्यीय बस टर्मिनस (ISBT) से आने वाला भारी ट्रैफिक मौजूद होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगभग 8 से 9 अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक (जो कुल मिलाकर लगभग 15 लेन की क्षमता का होता है) अचानक आकर केवल 3 लेन के मुख्य बारापुला कॉरिडोर में समाने की कोशिश करता है। इतनी संकरी जगह पर इतने बड़े पैमाने पर वाहनों का विलय होना किसी भी वैज्ञानिक यातायात सिद्धांत के खिलाफ है, जिसके कारण यह स्थान एक स्थायी बॉटलनेक बन गया है।

त्रुटिपूर्ण संरचनात्मक डिजाइन और शार्प मर्जिंग (Sharp Merging)

फ्लाईओवर के सिविल इंजीनियरिंग डिजाइन में कई गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं। सराय काले खां और सन डायल पार्क के पास जहां नया और पुराना कॉरिडोर आपस में मिलते हैं, वहां का डिजाइन बेहद दोषपूर्ण है। सन डायल पार्क के ठीक ऊपर जैसे ही मयूर विहार की तरफ से आने वाली गाड़ियां चढ़ती हैं, कॉरिडोर की एक लेन अचानक खत्म हो जाती है। इसके अलावा, विभिन्न सड़कों से आने वाले लूप्स (Loops) को मुख्य सड़क के साथ 90 डिग्री या बेहद तीखे कोण (Sharp Turns) पर मर्ज किया गया है। जब तेज रफ्तार गाड़ियां इन तीखे मोड़ों से मुख्य धारा में प्रवेश करती हैं, तो सुरक्षा कारणों से पीछे आ रहे वाहनों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। एक गाड़ी के रुकने से पीछे सैकड़ों गाड़ियों की चेन-रिएक्शन शुरू हो जाती है, जो अंततः किलोमीटर लंबे जाम में तब्दील हो जाती है।

डिजिटल नेविगेशन और ऑनलाइन मैप्स का तकनीकी धोखा

इस आधुनिक युग में जब अधिकांश वाहन चालक सड़कों की स्थिति जानने के लिए डिजिटल नेविगेशन सिस्टम और ऑनलाइन मैप्स पर निर्भर रहते हैं, तब एक तकनीकी चूक ने इस जाम को और अधिक भयावह बना दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस नए रूट के खुलने और उस पर लग रहे शुरुआती जाम का वास्तविक डेटा ऑनलाइन मैप्स पर तुरंत अपडेट नहीं हो पा रहा था। जो लोग नोएडा, गाजियाबाद या मयूर विहार से चले, उनके मोबाइल स्क्रीन पर नक्शा इस रास्ते को पूरी तरह साफ यानी ‘नीला’ दिखा रहा था। इस तकनीकी झांसे में आकर हजारों नए वाहन चालक लगातार इसी एलिवेटेड रोड की तरफ बढ़ते चले गए। जब तक उन्हें आगे जाम होने का अहसास हुआ, तब तक वे फ्लाईओवर के उस हिस्से पर पहुंच चुके थे जहां से पीछे मुड़ने या यू-टर्न लेने का कोई रास्ता नहीं था।

पूर्व रिहर्सल का अभाव और खराब यातायात प्रबंधन

स्थानीय नागरिकों और नियमित यात्रियों का आरोप है कि इतने बड़े और जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आम जनता के लिए खोलने से पहले संबंधित विभागों द्वारा कोई ट्रायल रन या पूर्व रिहर्सल नहीं की गई थी। नए रास्ते खुलने पर यातायात का व्यवहार कैसा होगा, इसका कोई व्यावहारिक आकलन नहीं किया गया। उद्घाटन के शुरुआती दो दिनों में मौके पर पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती भी नहीं थी, जो विपरीत परिस्थितियों में वाहनों को मैन्युअल रूप से नियंत्रित कर पाते। बुनियादी यातायात प्रबंधन (Traffic Management) की इस भारी कमी ने आग में घी का काम किया।

प्रशासन के तात्कालिक उपाय और भविष्य की राह

सड़कों पर मचे इस हाहाकार के बाद अब दिल्ली प्रशासन और यातायात पुलिस बैकफुट पर है। वर्तमान में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुराने बारापुला फ्लाईओवर के प्रवेश द्वारों के पास अस्थायी प्लास्टिक बैरिकेडिंग लगाई गई है। व्यस्त समय के दौरान मयूर विहार से आने वाले ट्रैफिक को कुछ समय के लिए रोक-रोक कर (Batch Processing) छोड़ा जा रहा है ताकि फ्लाईओवर के ऊपर गाड़ियों का लोड एक सीमा से अधिक न बढ़े। इसके साथ ही, पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को उन तीखे मोड़ों और सड़कों के मिलान बिंदुओं (Merging Points) को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ गाड़ियां आपस में टकराने की स्थिति में आ जाती हैं। सड़कों पर अतिरिक्त लेन मार्किंग, साइनेज बोर्ड और दिशा-निर्देश सूचक लगाए जा रहे हैं ताकि चालकों को भ्रम न हो। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सराय काले खां के पास सड़कों को चौड़ा नहीं किया जाता या अतिरिक्त रैंप नहीं बनाए जाते, तब तक इस समस्या का कोई मुकम्मल इलाज संभव नहीं है।

रूट एडवाइजरी: व्यस्त समय में इन रास्तों से बचें

यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता के लिए एक विस्तृत रूट एडवाइजरी जारी की है। जब तक इस कॉरिडोर की डिजाइन संबंधी खामियों को पूरी तरह दूर नहीं कर लिया जाता, तब तक सुबह और शाम के व्यस्त समय (Peak Hours) में बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर का उपयोग करने से बचने की सलाह दी गई है। वाहन चालकों को सुझाव दिया गया है कि वे पूर्वी दिल्ली या नोएडा से दक्षिण दिल्ली (जैसे एम्स, सफदरजंग, धौला कुआं या लाजपत नगर) जाने के लिए निम्नलिखित वैकल्पिक मार्गों का चुनाव करें:
• NH-24 (राष्ट्रीय राजमार्ग 24): मयूर विहार और गाजियाबाद से आने वाले लोग निजामुद्दीन खट्टा और भैरों मार्ग होते हुए मध्य या दक्षिण दिल्ली जा सकते हैं।
• डीएनडी फ्लाईवे (DND Flyway): नोएडा और मयूर विहार के पॉकेट-1 के निवासी डीएनडी का उपयोग कर सीधे आश्रम और वहां से आगे की यात्रा कर सकते हैं।
• रिंग रोड और विकास मार्ग: आईटीओ और रिंग रोड का पारंपरिक मार्ग भी इस समय बारापुला के मुकाबले अधिक भरोसेमंद साबित हो रहा है।

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