पाकिस्तान का नाम न सही, आतंकवाद पर ब्रिक्स ने बहुत कड़ा संदेश दिया!

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने भारत को एक नई कूटनीतिक मजबूती दी है। यह सम्मेलन दो दिन चला, जिसमें सभी सदस्य देशों ने ब्रिक्स नई दिल्ली संयुक्त घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। 45 पन्नों का यह घोषणापत्र आतंकवाद के खिलाफ भारत की चिंताओं को प्रमुखता से उठाता है। खास बात यह है कि इसमें पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया गया, लेकिन आतंकवाद पर बेहद सख्त भाषा का उपयोग किया गया है।

आतंकवाद पर स्पष्ट संदेश

ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी कारण से, किसी भी जगह और किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाए, वह आपराधिक है। सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी के साथ, घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, उसके फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने के खिलाफ ठोस कदम उठाने की बात कही गई है।

‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं’

घोषणापत्र में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसके साथ ही, आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की बात भी की गई है। इसके अलावा, ब्रिक्स ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड अपनाने से भी इनकार किया है।

पहलगाम हमला: एक गंभीर चिंता

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी और अनेक लोग घायल हुए थे। यह निंदा भारत की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ उठाई गई आवाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर गंभीर चिंता

घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भी गहरी चिंता जताई गई है। BRICS देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को बिगाड़ने वाले कदमों से बचने की अपील की है। नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का सम्मान करने की भी बात कही गई है, ताकि स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित हो सके।

परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का ध्यान

एक और महत्वपूर्ण पहलू नागरिक बुनियादी ढांचे और IAEA की निगरानी वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों को जानबूझकर निशाना बनाने के खिलाफ चिंता प्रकट करना है। ब्रिक्स ने कहा है कि संघर्ष की स्थिति में भी परमाणु सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। यह आम लोगों और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

कूटनीतिक सफलता का नया चरण

ब्रिक्स के 45 पन्नों के इस घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम भले ही नहीं है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदम भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सीमा पार आतंकवाद, आतंक की फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने जैसे मुद्दों का समावेश भारत की मांगों को वैश्विक मंच पर प्रबलता देता है। इसलिए, यह घोषणापत्र भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है।

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