मुंबईकरों को लग सकता है पानी के बिल का झटका! जल शुल्क बढ़ाने की तैयारी में BMC 

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मुंबईकरों पर बढ़ सकता है पानी के बिल का बोझ, BMC 6-7% जल शुल्क बढ़ाने की तैयारी में, पाइपलाइन के रखरखाव और नई जलापूर्ति परियोजनाओं का बढ़ता खर्च बना आधार

मानसून में मुंबई की प्यास बुझाने वाले सातों प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुका है। शहर में जलसंकट का खतरा फिलहाल काफी कम है, लेकिन इसी बीच मुंबईकरों के लिए पानी से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) प्रशासन पानी के शुल्क में करीब 6 से 7 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर दोबारा विचार कर रहा है। प्रशासन का तर्क है कि शहर में पानी की आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने, पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत, नई पाइपलाइन बिछाने और स्वच्छ एवं पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने पर लगातार खर्च बढ़ रहा है।

95 प्रतिशत से ज्यादा पानी, फिर भी शुल्क बढ़ाने की तैयारी

बीएमसी के जल अभियंता विभाग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर के शुरुआती दिनों में मुंबई को पानी देने वाले सात जलाशयों में संयुक्त जल भंडार करीब 95.9 प्रतिशत के आसपास बना हुआ था। 5 सितंबर को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सातों जलाशयों में लगभग 13.88 लाख मिलियन लीटर उपयोगी पानी मौजूद था। इनमें वेहेर पूरी तरह भरा हुआ था, जबकि मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा और भातसा में भी पानी का स्तर काफी ऊंचा था। इसका मतलब यह है कि इस समय मुंबई की जलापूर्ति स्थिति काफी आरामदायक है। लेकिन जल शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव मौजूदा जल भंडार की कमी से नहीं, बल्कि जलापूर्ति व्यवस्था को चलाने की बढ़ती लागत से जुड़ा है।

मुंबई को रोजाना करीब 4,000 मिलियन लीटर पानी

मुंबई की विशाल आबादी को पानी उपलब्ध कराने के लिए महानगरपालिका को शहर से काफी दूर स्थित जलाशयों पर निर्भर रहना पड़ता है। इन जलाशयों से प्रतिदिन करीब 4,000 मिलियन लीटर पानी मुंबई तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए लंबी पाइपलाइन व्यवस्था, पंपिंग प्रणाली, जल शोधन केंद्र और वितरण नेटवर्क का संचालन करना पड़ता है। शहर के लिए पानी केवल जलाशय में जमा करना ही पर्याप्त नहीं है। उसे सुरक्षित तरीके से शुद्ध करना, कई किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों के जरिए मुंबई तक पहुंचाना और फिर अलग-अलग इलाकों में वितरित करना भी बीएमसी की जिम्मेदारी है। इसी पूरी व्यवस्था के रखरखाव पर हर वर्ष भारी खर्च होता है।

2022 से नहीं बढ़ा है पानी का शुल्क

बीएमसी के प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि यह है कि मुंबई में पानी का शुल्क 2022 के बाद से नहीं बढ़ाया गया है। इससे पहले पानी के शुल्क में नियमित अंतराल पर संशोधन किया जाता रहा है। वर्ष 2012 में बीएमसी की स्थायी समिति ने पानी के शुल्क में हर वर्ष अधिकतम 8 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति देने वाला प्रस्ताव मंजूर किया था। सामान्य तौर पर इसी व्यवस्था के आधार पर शुल्क में वार्षिक संशोधन किया जाता था। लेकिन वर्ष 2022 के बाद बीएमसी में प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने और बाद में राजनीतिक स्तर पर विरोध के कारण शुल्क में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। बीएमसी सूत्रों के अनुसार शुल्क में लगातार संशोधन नहीं होने से महानगरपालिका को हर वर्ष होने वाली संभावित अतिरिक्त आय से वंचित रहना पड़ा है। इस साल शुल्क नहीं बढ़ने की स्थिति में बीएमसी को लगभग 100 से 125 करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है।

पहले भी तैयार हुआ था बढ़ोतरी का प्रस्ताव

पानी के शुल्क में वृद्धि का मुद्दा इस वर्ष नया नहीं है। इससे पहले भी बीएमसी प्रशासन ने वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए पानी का शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि, उस समय प्रस्ताव को राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा और बढ़ोतरी को आगे नहीं बढ़ाया गया। अब प्रशासन ने एक बार फिर प्रक्रिया शुरू की है। मौजूदा प्रस्ताव अभी प्रशासनिक स्तर पर है और इसे आगे महानगरपालिका आयुक्त के समक्ष रखा जाना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी और उसे कब से लागू किया जाएगा। इसलिए फिलहाल मुंबईकरों के पानी के बिल में बढ़ोतरी को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

पानी की कीमत बढ़ाने के पीछे पाइपलाइन नेटवर्क का खर्च

मुंबई का जल वितरण नेटवर्क काफी पुराना और विशाल है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिछी पाइपलाइनों को लगातार मरम्मत और बदलने की जरूरत पड़ती है। पुरानी पाइपलाइन में रिसाव होने पर पानी की बर्बादी के साथ-साथ सड़क और आसपास के इलाकों में भी समस्याएं पैदा होती हैं। इसके अलावा बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए कई क्षेत्रों में जलापूर्ति क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। नई पाइपलाइन, जल भंडारण व्यवस्था और वितरण नेटवर्क तैयार करने में भी बड़ी रकम खर्च होती है। बीएमसी का तर्क है कि पानी की दर में सीमित बढ़ोतरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।

मुंबई के सात प्रमुख जलाशय कौन से हैं?

मुंबई की जलापूर्ति मुख्य रूप से सात प्रमुख जलाशयों पर निर्भर है। इनमें भातसा, ऊपरी वैतरणा, मध्य वैतरणा, तानसा, मोडक सागर, वेहेर और तुलसी शामिल हैं। इनमें भातसा मुंबई के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोतों में से एक है। सितंबर की शुरुआत में भातसा में भी करीब 96 प्रतिशत पानी उपलब्ध था, जबकि वेहेर पूरी क्षमता तक पहुंच चुका था। ऊपरी वैतरणा में अन्य जलाशयों की तुलना में पानी का स्तर कम था, लेकिन वहां भी भंडार 90 प्रतिशत से अधिक बना हुआ था।

इस बार पानी की स्थिति क्यों बेहतर है?

2026 के मानसून में मुंबई और जलग्रहण क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश का सीधा लाभ इन जलाशयों को मिला है। जुलाई और अगस्त के दौरान कई जलाशयों के पूरी क्षमता तक पहुंचने के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा भी गया था। वेहेर, तुलसी, तानसा और मोडक सागर जैसे जलाशयों में इस मानसून के दौरान अच्छी आवक दर्ज की गई।  सितंबर में भी जल भंडार 95 प्रतिशत से ऊपर बने रहने से मुंबई के सामने तत्काल जलकटौती या पानी की कमी का कोई बड़ा संकट दिखाई नहीं दे रहा है।

पानी भरपूर, लेकिन बिल बढ़ने की चिंता

यही इस प्रस्ताव का सबसे दिलचस्प पहलू है। एक तरफ मुंबई के जलाशय लगभग लबालब हैं और शहर को आने वाले महीनों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, दूसरी तरफ बीएमसी पानी के शुल्क में वृद्धि पर विचार कर रही है। आम मुंबईकर के लिए स्वाभाविक सवाल यही है कि जब पानी की उपलब्धता अच्छी है तो शुल्क क्यों बढ़ाया जा रहा है? इसका जवाब बीएमसी के मुताबिक पानी की उपलब्धता और जलापूर्ति की लागत के बीच अंतर में है। जलाशय में पानी जमा होना केवल जलापूर्ति व्यवस्था का एक हिस्सा है। पानी को शहर तक लाना, शुद्ध करना, पंप करना, पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाना और पूरे नेटवर्क की मरम्मत करना लगातार होने वाला खर्च है।

अभी अंतिम फैसला नहीं, प्रस्ताव पर आगे होगी चर्चा

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 6-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी अभी प्रस्तावित स्तर पर है। इसे लागू करने का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। प्रशासन प्रस्ताव तैयार करके उसे संबंधित स्तरों से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसलिए मुंबईकरों को फिलहाल बढ़े हुए पानी के बिल को लेकर किसी निश्चित राशि की गणना नहीं करनी चाहिए। अंतिम शुल्क कितना होगा, किन श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर कितना प्रभाव पड़ेगा और नई दर कब से लागू होगी—इन सभी बातों की तस्वीर आधिकारिक मंजूरी के बाद ही साफ होगी।

राजस्व और नागरिक सुविधा के बीच संतुलन बड़ी चुनौती

बीएमसी के सामने चुनौती केवल अतिरिक्त राजस्व जुटाने की नहीं है। पानी जैसी मूलभूत नागरिक सुविधा की कीमत बढ़ाते समय यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इसका सबसे अधिक भार आम परिवारों पर न पड़े। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए पानी के शुल्क में लगातार बढ़ोतरी घरेलू खर्च को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर, यदि शुल्क लंबे समय तक नहीं बढ़ाया जाता है तो जलापूर्ति नेटवर्क के रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए बीएमसी के अपने राजस्व संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में प्रस्ताव पर प्रशासनिक निर्णय के साथ-साथ राजनीतिक और नागरिक स्तर पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है।
फिलहाल तस्वीर साफ है—मुंबई के जलाशय 95 प्रतिशत से अधिक भरे हैं, शहर की पानी की स्थिति मजबूत है, लेकिन बीएमसी बढ़ती जलापूर्ति लागत और संभावित राजस्व नुकसान को देखते हुए पानी के शुल्क में 6-7 प्रतिशत बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। अंतिम फैसला होने के बाद ही यह तय होगा कि मुंबईकरों की जेब पर इसका वास्तविक कितना असर पड़ेगा।

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