केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के सुरक्षा हालात को देखते हुए मणिपुर और नागालैंड के कई इलाकों में AFSPA यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को अगले छह महीनों के लिए जारी रखने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की। नया आदेश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे इससे पहले वापस नहीं लिया जाता। गृह मंत्रालय के फैसले के मुताबिक मणिपुर के ज्यादातर हिस्से को “अशांत क्षेत्र” के रूप में जारी रखा गया है। हालांकि, 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इस घोषणा से बाहर रखा गया है। वहीं नागालैंड में 9 पूरे जिले और 5 अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को अगले छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है।
मणिपुर में 13 थाना क्षेत्र बाहर
मणिपुर को लेकर यह बात खास है कि केंद्र ने पूरे राज्य पर बिना किसी अपवाद के AFSPA लागू नहीं किया है। 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को अशांत क्षेत्र की अधिसूचना से बाहर रखा गया है। इनमें इम्फाल पश्चिम के इम्फाल, लैम्पेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई, इम्फाल पूर्व के पोरोम्पट, हेइंगांग और इरिलबुंग, थौबल का थौबल, बिष्णुपुर के बिष्णुपुर और नांबोल तथा काकचिंग का काकचिंग थाना क्षेत्र शामिल हैं। गृह मंत्रालय के पिछले मार्च के आदेश में भी यही 13 थाना क्षेत्र बाहर रखे गए थे। इसका मतलब यह है कि मणिपुर में AFSPA का दायरा बड़ा जरूर है, लेकिन कुछ इलाकों को इससे लगातार अलग रखा गया है।
नागालैंड के 9 जिले और 21 थाना क्षेत्र
नागालैंड में गृह मंत्रालय ने 9 जिलों को पूरी तरह अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इनमें दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी शामिल हैं। इसके अलावा पांच अन्य जिलों के 21 थाना क्षेत्रों को भी इस दायरे में रखा गया है। यह फैसला भी छह महीने के लिए है। गृह मंत्रालय के मुताबिक यह निर्णय वहां की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है। ताजा रिपोर्टों में भी केंद्र के इस फैसले को सुरक्षा स्थिति की समीक्षा से जोड़ा गया है।
आखिर AFSPA में क्या खास है?
AFSPA, 1958 की धारा 3 के तहत किसी इलाके को “अशांत क्षेत्र” घोषित किया जा सकता है, जब केंद्र या संबंधित संवैधानिक प्राधिकारी यह माने कि वहां की स्थिति इतनी अशांत या खतरनाक है कि नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों का इस्तेमाल जरूरी है। अशांत क्षेत्र घोषित होने के बाद कानून की धारा 4 के तहत सशस्त्र बलों के अधिकारियों को कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं। इनमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ परिस्थितियों में बल प्रयोग, बिना वारंट गिरफ्तारी और कुछ मामलों में तलाशी जैसी शक्तियां शामिल हैं। गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस के हवाले करने का भी प्रावधान है। यानी AFSPA लागू होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा राज्य सेना के हवाले हो गया। यह अधिसूचित क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को अतिरिक्त कानूनी अधिकार देने वाली व्यवस्था है।
मणिपुर में लगातार जारी है AFSPA
मणिपुर में AFSPA का विस्तार लंबे समय से चरणबद्ध तरीके से होता रहा है। गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च 2026 में भी राज्य के अधिकांश हिस्से को छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था, जबकि 13 थाना क्षेत्रों को बाहर रखा गया था। अब सितंबर 2026 के नए फैसले के साथ यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक जारी रहेगी। इस दौरान केंद्र और सुरक्षा एजेंसियां दोनों राज्यों की स्थिति की आगे भी समीक्षा कर सकती हैं और अधिसूचना को समय से पहले वापस लेने का अधिकार भी बना रहेगा।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
Discontent is reportedly rising within the Manipur BJP regarding the party's approach to the ongoing controversy involving Congress MP Angomcha Bimol Akoijam. Senior leaders...
The Chief Minister of Manipur, Yumnam Khemchand Singh, announced on Saturday that the state government will initiate the formation of a committee that will...
A 48-hour shutdown has been initiated in Manipur in response to the killing of a young man, Laishram Rakesh, during clashes between two communities....