शिवाजी पार्क में इस दिवाली नहीं होगी आतिशबाजी, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पटाखों पर रोक; ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर सख्ती
दीपावली के अवसर पर मुंबई के दादर स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में इस बार पटाखे और आतिशबाजी नहीं की जा सकेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस प्रतिष्ठित सार्वजनिक मैदान को पटाखामुक्त रखने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य दीपावली के दौरान होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना, स्थानीय निवासियों को राहत देना और सार्वजनिक स्थानों पर पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। शिवाजी पार्क मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मैदानों में से एक है। यहां हर साल दीपावली के दौरान बड़ी संख्या में लोग आते हैं। ऐसे में आतिशबाजी पर रोक का फैसला शहर में पर्यावरण संरक्षण और त्योहार मनाने के तरीकों को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है। इसके पीछे सार्वजनिक स्वास्थ्य, नागरिकों की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद BMC ने शुरू की तैयारी
इस मामले में बीएमसी के जी-नॉर्थ वार्ड ने स्पष्ट किया है कि शिवाजी पार्क मैदान में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए मैदान और आसपास के प्रमुख स्थानों पर चेतावनी वाले सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि शिवाजी पार्क एक अधिसूचित शांत क्षेत्र (साइलेंस जोन) है और यहां पटाखे जलाना प्रतिबंधित है। बीएमसी के सहायक आयुक्त योगेश देसाई के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप इस वर्ष शिवाजी पार्क में पटाखे जलाने पर रोक सुनिश्चित की जाएगी। लोगों को पहले से इसकी जानकारी देने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे और स्थानीय पुलिस थाने को भी इस संबंध में सूचित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य त्योहार के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था और नियमों के उल्लंघन को रोकना है।
22 सितंबर के आदेश से शुरू हुई कार्रवाई
शिवाजी पार्क में पटाखों पर रोक का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर आतिशबाजी से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आया। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ सार्वजनिक समारोहों और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ते शोर तथा नागरिकों को होने वाली परेशानी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। 22 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने पर लगाई गई रोक केवल किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे वर्ष सभी त्योहारों पर लागू होगी। अदालत ने बीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) को निर्देश दिया कि वे समाचार पत्रों, सामाजिक माध्यमों और अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए नागरिकों को इन नियमों की जानकारी दें। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करना आवश्यक है।
सार्वजनिक स्थानों पर आतिशबाजी को लेकर अदालत सख्त
हाईकोर्ट की चिंता का प्रमुख कारण यह है कि त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग पटाखे जलाते हैं। कई बार ऐसे आयोजनों में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होता। इससे आसपास रहने वाले लोगों को ध्वनि और वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। अदालत ने अपनी टिप्पणियों में बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव को महत्वपूर्ण माना है। न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि कानून और अदालत के आदेश होने के बावजूद उनका पालन नहीं होना बड़ी समस्या है। 15 अक्टूबर के आदेश में राज्य सरकार, BMC और MPCB को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, सार्वजनिक घोषणाएं और बसों तथा ट्रेनों में सूचना बोर्ड लगाने जैसे उपाय भी शामिल किए गए। अदालत ने नागरिकों से कम धुआं और कम शोर पैदा करने वाले हरित पटाखों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की बात कही।
शिवाजी पार्क के आसपास रहने वाले लोगों को मिलेगी राहत
शिवाजी पार्क दादर के घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र के बीच स्थित है। मैदान के आसपास कई आवासीय इमारतें, पुरानी इमारतें और स्थानीय बाजार हैं। यहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग, बच्चे और परिवार रहते हैं। दीपावली के दौरान मैदान में पटाखे जलाने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। इससे आसपास के इलाकों में देर रात तक तेज आवाज और धुएं की समस्या बनी रहती है। शिवाजी पार्क रेजिडेंट्स एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट (एएलएम) ने भी इस मामले में स्थानीय पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने शिवाजी पार्क पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक को पत्र लिखकर अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की अपील की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल दीपावली के दौरान सैकड़ों लोग मैदान में पटाखे जलाने के लिए पहुंचते हैं। कई बार लगातार कई दिनों तक आतिशबाजी होती रहती है। इससे आसपास रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को काफी परेशानी होती है। धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। निवासियों ने पुलिस से मैदान में लगातार गश्त लगाने, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और लोगों को पहले से प्रतिबंध की जानकारी देने की मांग की है। उनका मानना है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मौके पर निगरानी भी जरूरी है।
शिवाजी पार्क की ऐतिहासिक पहचान भी है महत्वपूर्ण
शिवाजी पार्क केवल एक खुला मैदान नहीं है, बल्कि मुंबई के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दादर स्थित इस मैदान का संबंध खेल गतिविधियों, सार्वजनिक सभाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और महाराष्ट्र के सामाजिक आंदोलनों से रहा है। यहां क्रिकेट खेलने वाले बच्चों और युवाओं की बड़ी संख्या रोजाना पहुंचती है। इसके अलावा स्थानीय नागरिक सुबह और शाम टहलने तथा व्यायाम करने के लिए भी मैदान का इस्तेमाल करते हैं। दीपावली के दौरान जब यहां बड़ी संख्या में लोग आतिशबाजी करते हैं, तो मैदान के सामान्य उपयोग और आसपास के निवासियों की शांति पर भी असर पड़ता है। इसी वजह से इस स्थान को पटाखामुक्त रखने की पहल को केवल प्रदूषण नियंत्रण से जोड़कर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों के बेहतर इस्तेमाल और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र में भी पटाखों के समय को नियंत्रित करने पर विचार
दीपावली 2026 के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने पटाखे जलाने के समय को लेकर भी महाराष्ट्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। 4 नवंबर को अदालत ने राज्य सरकार, बीएमसी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और अन्य संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पटाखे जलाने के समय संबंधी निर्देशों को महाराष्ट्र में लागू करने की संभावना पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर के लिए स्वीकृत हरित पटाखे जलाने की अनुमति सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक सीमित की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में भी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इसे महाराष्ट्र में स्वतः लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए।
क्या पूरे मुंबई में पटाखों पर प्रतिबंध है?
शिवाजी पार्क को पटाखामुक्त रखने के फैसले के बीच यह समझना भी जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने की रोक और निजी परिसरों में पटाखे जलाने के नियम अलग-अलग विषय हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने की मनाही है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने पूरे देश में पटाखों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत ने स्वयं स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य पटाखों के निर्माण या बिक्री को रोकना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली आतिशबाजी और उससे पैदा होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। निजी परिसरों में पटाखे जलाने के मामले में लागू ध्वनि प्रदूषण, पर्यावरण और अन्य संबंधित नियमों का पालन करना आवश्यक है। इसके अलावा शांत क्षेत्र में लागू विशेष प्रतिबंधों का भी ध्यान रखना होगा।
इस बार प्रशासन की असली परीक्षा होगी
शिवाजी पार्क में चेतावनी बोर्ड लगाने और पुलिस को सूचित करने का निर्णय प्रशासन की शुरुआती तैयारी है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दीपावली के दौरान नियमों का कितना प्रभावी पालन कराया जाता है। यदि लोग प्रतिबंध के बावजूद मैदान में पटाखे जलाते हैं, तो पुलिस और संबंधित नागरिक अधिकारियों को समय रहते कार्रवाई करनी होगी। स्थानीय निवासियों की मांग है कि दीपावली के दौरान मैदान में नियमित पुलिस गश्त हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों को रोका जाए। साथ ही, नागरिकों को यह भी समझना होगा कि त्योहार की खुशियां मनाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर दूसरे लोगों की शांति और स्वास्थ्य को प्रभावित करना उचित नहीं है। कुल मिलाकर, दादर के शिवाजी पार्क को पटाखामुक्त रखने की पहल मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि बीएमसी और मुंबई पुलिस अदालत के निर्देशों को जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं।
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