केरल से अमेरिका तक का सफर, नित्या रमन ने जीता लॉस एंजिल्स का मेयर चुनाव

The CSR Journal Magazine

भारत में जन्मी नित्या रमन ने अमेरिका में रचा इतिहास, लॉस एंजिल्स की नई मेयर बनीं; करेन बैस को हराकर किया बड़ा उलटफेर

अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल की महिला नित्या रमन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत में जन्मीं नित्या रमन ने अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के प्रमुख शहर लॉस एंजिल्स के मेयर चुनाव में मौजूदा मेयर करेन बैस को हराकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनकी इस जीत को अमेरिकी स्थानीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही वह लॉस एंजिल्स की पहली दक्षिण एशियाई मेयर बनने जा रही हैं। उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि करेन बैस को दोबारा मेयर बनाने के लिए कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं और संगठनों ने समर्थन दिया था। इसके बावजूद मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में फैसला सुनाया। 3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव के बाद मतगणना में नित्या रमन ने लगातार बढ़त बनाई। शुरुआती रुझानों में करेन बैस आगे थीं, लेकिन बाद में डाक से आए मतों की गिनती के साथ नित्या रमन आगे निकल गईं। आखिरकार करेन बैस ने अपनी हार स्वीकार कर ली और नित्या रमन को फोन करके जीत की बधाई दी। इस तरह लॉस एंजिल्स की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

कितने मतों से जीतीं नित्या रमन?

लॉस एंजिल्स मेयर चुनाव में नित्या रमन और करेन बैस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। चुनाव के शुरुआती नतीजों में करेन बैस को बढ़त मिली थी, लेकिन मतगणना आगे बढ़ने के साथ तस्वीर बदलती गई। लॉस एंजिल्स काउंटी के चुनाव अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 6 नवंबर को उपलब्ध मतगणना में नित्या रमन को 4,60,772 वोट मिले, जबकि करेन बैस को 4,13,519 वोट हासिल हुए। इस तरह रमन को 52.70 प्रतिशत और बैस को 47.30 प्रतिशत मत मिले। दोनों के बीच लगभग 47,253 मतों का अंतर दर्ज किया गया। ये आंकड़े उस समय की जारी मतगणना पर आधारित थे और अंतिम प्रमाणित परिणाम से अलग हो सकते हैं। लॉस एंजिल्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, करेन बैस ने गुरुवार को अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने नित्या रमन को फोन कर जीत की बधाई दी है। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी कराने का भी भरोसा दिया।

केरल में हुआ जन्म, छह साल की उम्र में पहुंचीं अमेरिका

नित्या रमन की सफलता की कहानी भारत से शुरू होती है। उनका जन्म 28 जुलाई 1981 को केरल में हुआ था। जब वह छह साल की थीं, तब उनका परिवार अमेरिका चला गया। शुरुआती दिनों में उनका परिवार लुइसियाना में रहा और बाद में वह मैसाचुसेट्स के बोस्टन के उपनगरीय इलाके में पली-बढ़ीं। नित्या ने प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय से सामाजिक अध्ययन और राजनीतिक सिद्धांत की पढ़ाई की। वर्ष 2003 में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से शहरी नियोजन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि का प्रभाव उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई देता है। उन्होंने शहरी विकास, आवास व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और बेघर लोगों की समस्याओं पर काम किया। वर्ष 2013 में वह अपने पति वली चंद्रशेखरन के साथ लॉस एंजिल्स आ गईं। उनके पति टेलीविजन लेखक और निर्माता हैं। दंपती के जुड़वां बच्चे हैं। राजनीति में आने से पहले नित्या रमन ने सामाजिक कार्यों और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया। उन्होंने SELAH Neighborhood Homeless Coalition की सह-स्थापना की। यह संगठन लॉस एंजिल्स में बेघर लोगों की समस्याओं और उन्हें आवास उपलब्ध कराने के मुद्दे पर काम करता है। इसके अलावा उन्होंने शहर के प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कामों में भी भूमिका निभाई।

2020 में पहली बार बनीं सिटी काउंसिल सदस्य

नित्या रमन ने वर्ष 2020 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल के डिस्ट्रिक्ट-4 से चुनाव लड़ा और तत्कालीन सदस्य डेविड रयू को हराकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बनीं। उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उन्होंने एक स्थापित राजनीतिक प्रतिनिधि को हराकर अपनी पहचान बनाई थी। वर्ष 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव जीतकर अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व जारी रखा। सिटी काउंसिल में रहते हुए उन्होंने आवास निर्माण, बेघर लोगों के पुनर्वास, पर्यावरण संरक्षण, शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर काम किया। वह सिविल राइट्स, इमिग्रेशन, सोशल सर्विसेज एंड नेबरहुड्स कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं। इसके अलावा शहरी नियोजन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी समितियों में भी उनकी भूमिका रही। उनके राजनीतिक सफर में स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देने की रणनीति महत्वपूर्ण रही है। यही वजह है कि मेयर चुनाव के दौरान उन्होंने बड़े राजनीतिक वादों के बजाय शहर की रोजमर्रा की समस्याओं को अपने अभियान का केंद्र बनाया।

आखिर क्यों हार गईं करेन बैस?

करेन बैस लॉस एंजिल्स की पहली अश्वेत महिला मेयर थीं। उन्होंने वर्ष 2022 में चुनाव जीतकर यह पद हासिल किया था। इससे पहले वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य और कैलिफोर्निया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी थीं। उनके पास लंबा राजनीतिक और सामाजिक अनुभव था। हालांकि, दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ते समय उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी समस्या बेघर लोगों की बढ़ती संख्या, आवास की कमी, शहर की सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी थी। लॉस एंजिल्स में बेघर लोगों की समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। वर्ष 2025 की गणना के अनुसार शहर में लगभग 44 हजार लोग बेघर थे। इनमें करीब 27 हजार लोग ऐसे थे, जो सड़कों और खुले स्थानों पर रह रहे थे। इस समस्या को कम करने के लिए प्रशासन ने कई योजनाएं शुरू कीं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण मेयर बैस की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे। इसके अलावा जनवरी 2025 में पैलिसेड्स और ईटन क्षेत्रों में लगी भीषण आग ने भी उनके प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाईं। इन आग की घटनाओं में कुल 31 लोगों की मौत हुई और 16 हजार से अधिक इमारतें नष्ट हो गईं। आग से निपटने की सरकारी तैयारियों और आपदा प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन की आलोचना हुई। नित्या रमन ने अपने चुनाव अभियान में इन्हीं मुद्दों को उठाया। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि शहर को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं में ठोस सुधार की जरूरत है।

आवास, बेघर लोगों की समस्या और सुरक्षा पर रहेगा जोर

नित्या रमन ने मेयर चुनाव में अपने अभियान को शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित रखा। उनका कहना था कि लॉस एंजिल्स को ऐसा शहर बनाना जरूरी है, जहां आम नागरिकों को किफायती आवास मिल सके और सरकारी सेवाएं समय पर उपलब्ध हों। उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में बेघर लोगों की समस्या का समाधान, किफायती मकानों का निर्माण, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार और शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने सड़कों पर बने गड्ढों की मरम्मत, खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने और बच्चों के लिए पार्कों की बेहतर व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता दी। उनका मानना है कि नगर प्रशासन की सफलता केवल बड़ी परियोजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने से तय होती है। पुलिस व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा भी चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे। करेन बैस ने अपने अभियान में सुरक्षा को प्राथमिकता दी थी, जबकि रमन ने पुलिस व्यवस्था में सुधार और शहर के प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने पुलिस प्रमुख जिम मैकडॉनेल को हटाने की अपनी मंशा भी जाहिर की थी, जिसको लेकर चुनाव के दौरान विवाद हुआ। नित्या रमन को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका (DSA) के लॉस एंजिल्स संगठन का समर्थन मिला था। इस संगठन ने पहले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी जैसे नेताओं का भी समर्थन किया है। रमन ने खुद को केवल वैचारिक राजनीति तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक समाधान देने वाली उम्मीदवार के रूप में पेश किया।

युवाओं ने निभाई जीत में अहम भूमिका

नित्या रमन की जीत के पीछे युवा मतदाताओं का बड़ा योगदान माना जा रहा है। चुनावी विश्लेषण के मुताबिक, उन्हें खासतौर पर युवा और प्रगतिशील विचारधारा वाले मतदाताओं का समर्थन मिला। वहीं करेन बैस को 50 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं के बीच अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। चुनाव की शुरुआती मतगणना में बैस आगे थीं, लेकिन डाक से भेजे गए मतों की गिनती के बाद रमन की स्थिति मजबूत होती गई। अमेरिका में बड़ी संख्या में मतदाता डाक के जरिए मतदान करते हैं। ऐसे मतों की गिनती बाद में होने के कारण चुनाव के शुरुआती रुझान और अंतिम परिणामों में अंतर देखने को मिलता है। इस चुनाव में रमन की जीत को पीढ़ीगत बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। मतदाताओं के एक वर्ग ने पुराने राजनीतिक नेतृत्व के बजाय नए नेतृत्व को मौका देने का फैसला किया।

दिसंबर में संभालेंगी मेयर का पद

नित्या रमन की जीत के बाद अब लॉस एंजिल्स में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी। करेन बैस ने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से जिम्मेदारी सौंपने का आश्वासन दिया है। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के अनुसार, रमन दिसंबर 2026 में मेयर पद की शपथ लेंगी। लॉस एंजिल्स अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। ऐसे में यहां का मेयर पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर का प्रशासन आवास, परिवहन, सार्वजनिक सुरक्षा, अग्निशमन, सफाई और शहरी विकास जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़ा होता है। रमन के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की होगी। बेघर लोगों की समस्या, महंगे मकान, सार्वजनिक सुविधाओं की खराब स्थिति और शहर की आर्थिक जरूरतें उनके प्रशासन की प्राथमिक परीक्षा होंगी। इसके अलावा लॉस एंजिल्स वर्ष 2028 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे में शहर के बुनियादी ढांचे, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार करना भी नए प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

भारतीय मूल के लोगों के लिए भी ऐतिहासिक उपलब्धि

नित्या रमन की जीत का महत्व केवल लॉस एंजिल्स तक सीमित नहीं है। भारत में जन्मी एक महिला का अमेरिका के इतने बड़े शहर की मेयर बनने की स्थिति तक पहुंचना भारतीय मूल के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले वर्ष 2020 में लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल में उनका पहुंचना भी ऐतिहासिक था। अब मेयर चुनाव में जीत के साथ उन्होंने एक और बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है। वह लॉस एंजिल्स की पहली दक्षिण एशियाई मेयर बनने जा रही हैं। साथ ही उन्हें शहर का नेतृत्व करने वाली पहली एशियाई अमेरिकी मेयर के रूप में भी बताया जा रहा है। उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि अमेरिका की स्थानीय राजनीति में प्रवासी समुदायों और विविध पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, रमन की जीत को केवल उनकी भारतीय पृष्ठभूमि से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। उनके चुनाव अभियान में स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी सुविधाओं को लेकर उठाए गए मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुल मिलाकर, नित्या रमन की जीत लॉस एंजिल्स की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने अनुभवी और मौजूदा मेयर करेन बैस को हराकर साबित किया कि मतदाता राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ कामकाज और बदलाव की उम्मीद को भी महत्व देते हैं। अब उनकी असली परीक्षा मेयर का पद संभालने के बाद शुरू होगी। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका के एक प्रमुख शहर को बेहतर आवास, सुरक्षित सड़कें, मजबूत सार्वजनिक परिवहन और प्रभावी प्रशासन देना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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