वाटिका ग्रुप के कथित प्लॉट घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, चेयरमैन और प्रमोटर गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine
वाटिका ग्रुप से जुड़े कथित प्लॉट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और कंपनी के प्रमोटर गौतम भल्ला को 28 सितंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। दोनों को 29 सितंबर को गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया। ED की जांच दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) में दर्ज कई FIR से जुड़ी है। इन मामलों में कथित तौर पर पैसे लेने, प्लॉट की डिलीवरी नहीं करने और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। ED ने जांच के दौरान सामने आए कथित अपराध की रकम यानी Proceeds of Crime करीब 154.36 करोड़ रुपये आंकी है।

260 करोड़ रुपये देकर भी प्लॉट की डिलीवरी का इंतजार

ED के मुताबिक, 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने गुरुग्राम के Vatika India Next, सेक्टर 84/85 और Vatika India Next-2, सेक्टर 88A में रेजिडेंशियल प्लॉट खरीदने के लिए करीब 260 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। एजेंसी के अनुसार, खरीदारों ने बिक्री की पूरी रकम पहले ही कंपनी को दे दी थी। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, 2014 और 2015 में प्लॉट से संबंधित एग्रीमेंट किए गए। इसके बाद प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव किए गए और कथित तौर पर पहले आवंटित प्लॉट के नंबर और लोकेशन बदल दिए गए। ED का आरोप है कि इसके बावजूद उसी प्रोजेक्ट की जमीन अलग-अलग खरीदारों को आवंटित और बेची जाती रही।

14 साल बाद भी कई प्लॉट नहीं मिले

ED के मुताबिक, Vatika India Next-2 में करीब 1.10 लाख वर्ग गज जमीन के प्लॉट के लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। एजेंसी का कहना है कि करीब 14 साल बीतने के बाद भी इन प्लॉट्स में से एक भी खरीदारों को नहीं दिया गया। वहीं, Vatika India Next प्रोजेक्ट में कुछ हिस्से की डिलीवरी हुई, लेकिन ED के अनुसार करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी अब भी बाकी है। एजेंसी इस पूरे मामले में खरीदारों से ली गई रकम के इस्तेमाल और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया की जांच कर रही है।

22 कंपनियों के जरिए जमीन का बैंक मैनेज करने का आरोप

ED ने अनिल भल्ला और गौतम भल्ला की भूमिका को भी जांच में महत्वपूर्ण बताया है। एजेंसी के अनुसार, अनिल भल्ला ने जांच के दायरे में आए लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की निगरानी की, जबकि गौतम भल्ला ग्रुप के प्रमुख प्रमोटर के तौर पर कई महत्वपूर्ण एग्रीमेंट में शामिल रहे। जांच में करीब 22 ग्रुप कंपनियों का भी पता चला है। ED के मुताबिक, इन कंपनियों के पास कर्मचारी नहीं थे और अलग से कोई कारोबारी गतिविधि भी नहीं थी। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से जमीन का बैंक मैनेज करने, कॉरपोरेट गारंटी देने और वित्तीय संस्थानों के पास जमीन को मॉर्गेज करने के लिए किया जाता था।

खरीदारों के पैसे दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप

ED ने वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की भी जांच की है। एजेंसी के मुताबिक, बैंक लेनदेन के विश्लेषण से पता चला कि खरीदारों से मिली रकम का इस्तेमाल केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स में नहीं हुआ, जिनके लिए पैसा लिया गया था। ED का आरोप है कि खरीदारों से प्राप्त रकम को दूसरी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी ऐसी संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया, जिनका संबंधित प्रोजेक्ट से सीधा संबंध नहीं था। इसी आधार पर एजेंसी पैसे के कथित डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है।

473 करोड़ की डील और 165 प्लॉट का मामला

जांच में 2024 की एक अलग ट्रांजैक्शन भी सामने आई है। ED के अनुसार, Scaler Ventures ने Agreement to Sell और Buy-Back Agreement के तहत करीब 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। एजेंसी का कहना है कि 165 प्लॉट में से केवल 15 प्लॉट वापस खरीदे गए। इसके बाद बचे 150 प्लॉट में से 14 प्लॉट कथित तौर पर तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ रुपये में बेच दिए गए। ED के मुताबिक, यह बिक्री Scaler Ventures की जानकारी या सहमति के बिना की गई।

तलाशी में कार, ज्वेलरी और करोड़ों रुपये के खाते मिले

इस मामले में ED पहले ही PMLA की धारा 17 के तहत सात ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान एक आरोपी के घर से Mercedes-Benz GLC 300 कार बरामद की गई। इसके अलावा 1.3 किलो से ज्यादा वजन की सोने और हीरे की ज्वेलरी भी मिली, जिसकी कीमत करीब 1.55 करोड़ रुपये बताई गई है। ED के अनुसार, करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और FDR भी फ्रीज किए गए हैं।

आगे की जांच जारी

ED ने इस मामले में अब तक सामने आए कथित अपराध की रकम 154.36 करोड़ रुपये आंकी है। हालांकि, यह जांच एजेंसी का आकलन और आरोप हैं, जिनका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को 3 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेजे जाने के बाद एजेंसी अब कथित फंड ट्रांसफर, प्लॉट आवंटन, संबंधित कंपनियों की भूमिका और खरीदारों से प्राप्त रकम के इस्तेमाल की आगे जांच कर रही है।

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