बांस से बनेगा ईंधन, पेट्रोल-डीजल का होगा अंत!

The CSR Journal Magazine
पेट्रोल और डीजल के विकल्प की तलाश कर रहे वैज्ञानिकों ने बांस से तेल बनाने में सफलता हासिल की है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स में स्थित वॉर्सेस्टर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने एक विशेष प्रक्रिया से बांस को तेल जैसे पदार्थ में परिवर्तित किया। लैब में बांस को 300 डिग्री सेल्सियस पर केवल 10 मिनट तक गर्म किया गया, जिससे बांस के 35 फीसदी से अधिक हिस्से को कच्चे तेल में बदला गया। इस तेल को साफ करके गाड़ियों, विमानों और ट्रेनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

कम लागत और पर्यावरण के लिए फायदेमंद, हाइड्रोथर्मल लिक्विफैक्शन तकनीक

रिसर्चर्स का अनुमान है कि बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर इस ईंधन की लागत लगभग 2.75 डॉलर प्रति गैसोलीन-गैलन यानी करीब 260 रुपये हो सकती है। इसके अलावा, यह भी दावा किया गया है कि बांस से बने ईंधन से डीजल के मुकाबले ग्रीनहाउस गैसों का इमिशन 26 गुना तक कम हो सकता है। हालांकि, ये सभी आंकड़े अभी रिसर्च और अनुमान पर आधारित हैं। बांस से तेल बनाने के लिए रिसर्चर्स ने हाइड्रोथर्मल लिक्विफैक्शन तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में पानी, अधिक गर्मी और हाई प्रेशर की मदद से पौधों से तेल जैसा पदार्थ तैयार किया जाता है। इस टेस्ट में बांस के वजन का 35.6 फीसदी हिस्सा तेल में बदल गया। लेकिन ध्यान रहे, इस तेल को सीधे गाड़ी में नहीं डाला जा सकता। इसे पहले साफ करना होगा और आगे की प्रक्रिया से गुजारना होगा।

बांस की खेती का लाभ

बांस तेजी से बढ़ता है और कम उपजाऊ जमीन पर भी उग सकता है। इसलिए वैज्ञानिक इसे ईंधन बनाने के लिए एक बेहतर विकल्प मानते हैं। वर्तमान में, मक्का जैसी फसलों से भी बायोफ्यूल बनाया जाता है, लेकिन इन फसलों को उगाने के लिए खेती की जमीन की आवश्यकता होती है। रिसर्च के अनुसार, बांस से ईंधन बनाने में मक्का के मुकाबले कम जमीन की जरूरत पड़ सकती है।

ईंधन की लागत और उत्पादन, कम प्रदूषण का दावा

रिसर्चर्स का मानना है कि बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद बांस से बने ईंधन की लागत करीब 2.75 डॉलर प्रति गैसोलीन-गैलन हो सकती है। हालांकि, इसे पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमत से सीधे तुलना नहीं की जा सकती। ईंधन बनाने के लिए फैक्ट्री लगाने, मशीनें चलाने और बांस को वहां तक पहुंचाने में भी खर्च होगा। इसलिए असल लागत का पता बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद ही चलेगा। रिसर्च के अनुसार, बांस से बने ईंधन से डीजल के मुकाबले ग्रीनहाउस गैसों का इमिशन 26 गुना तक कम हो सकता है। हालांकि, इस फायदे का सही मूल्यांकन करने के लिए बांस उगाने से लेकर उसे ईंधन में बदलने की पूरी प्रक्रिया को ध्यान में रखना होगा। यह भी जरूरी है कि इस प्रक्रिया में होने वाले प्रदूषण को भी गिनना पड़ेगा।

भविष्य की संभावनाएं

यह रिसर्च दर्शाती है कि बांस से गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन बनाने की संभावना है। हालांकि, इसे पेट्रोल और डीजल का पूरा विकल्प नहीं कहा जा सकता। इसके लिए बड़े स्तर पर उत्पादन करना होगा और यह भी देखना होगा कि यह ईंधन कितना प्रभावी है। यदि आगे की जांच में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो बांस से बना ईंधन भविष्य में गाड़ियों, विमानों और ट्रेनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल, इस तकनीक पर और काम करने की आवश्यकता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos