गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से छाया अंधेरा

The CSR Journal Magazine
हरियाणा की आर्थिक राजधानी गुरुग्राम के कई इलाकों में अंधेरा छा गया है। बिजली कर्मचारियों की बुलाई गई बेमियादी हड़ताल का सीधा असर अब शहर में साफ दिखाई दे रहा है। कई रिहायशी सेक्टरों में घंटों से बिजली गुल है। दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर 37 जैसे इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया है।

सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस

किसी भी तरह के बड़े उपद्रव, तोड़फोड़ या ग्रिड को नुकसान पहुंचाने की आशंका को देखते हुए जिले के तमाम बिजली सब-स्टेशनों और पावर हाउसों पर भारी पुलिस बल तैनात कर छावनी में तब्दील कर दिया गया है। यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है ताकि हड़ताल के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।

कर्मचारियों की मांगें, राज्य के स्वामित्व पर खतरा

हरियाणा बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। दरअसल, हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने हाल ही में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूह में बिजली वितरण के लिए 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कदम पिछले दरवाजे से किया जा रहा निजीकरण है, जिससे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र निजी हाथों में चले जाएंगे। इससे राज्य के स्वामित्व वाले दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को भारी नुकसान होगा। गुस्साए कर्मचारियों ने राज्य भर में HERC के आदेश की प्रतियां जलाई हैं। साथ ही केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और HERC के अध्यक्ष मुकेश गर्ग के पुतले भी फूंके गए हैं। यह प्रदर्शन कर्मचारियों के गुस्से को दर्शाता है और उनकी मांगों को उठाने का एक तरीका है।

सरकार का समर्थन, मुख्यमंत्री की अपील

सरकार की तरफ से कर्मचारियों को भरोसा दिया गया है। हड़ताल से ठीक पहले कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज से मुलाकात की थी। अनिल विज ने कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कभी आवेदन आमंत्रित नहीं किए थे और सरकार इस आदेश के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार 5 से 6 दिनों में अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील दायर कर स्टे मांगेगी और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार कर्मचारियों के साथ है और वो चाहें तो अपनी पसंद के वकीलों के जरिए भी मुकदमा लड़ सकते हैं। सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारी सीजन में आम जनता को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

निजीकरण के खिलाफ संघर्ष, आगे की स्थिति

कर्मचारियों का यह आंदोलन निजीकरण के खिलाफ एक बड़ा संघर्ष बनता जा रहा है। उनकी मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। इस बीच, शहर के नागरिकों को उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान होगा और बिजली की आपूर्ति बहाल होगी। इस हड़ताल के चलते शहर में बिजली की कमी से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग बिना बिजली के रह रहे हैं, जिससे उनके दैनिक जीवन पर असर पड़ रहा है। सरकार और कर्मचारियों के बीच वार्ता का दौर जारी है, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
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