वनतारा ने बदला अपना कंज़र्वेशन मॉडल, खुलेंगे 100 मोबाइल अस्पताल और जानवरों के आयात पर भी होगी सख्ती

The CSR Journal Magazine
वनतारा ने अपनी काम करने की व्यवस्था में कई बड़े बदलावों की घोषणा की है। इन बदलावों का मकसद शासन व्यवस्था को मजबूत करना, कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, जानवरों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच कराना और वन्यजीव संरक्षण को बेहतर बनाना है। ये फैसले गैर-सरकारी संगठनों, विशेषज्ञों, पत्रकारों और दूसरे संबंधित लोगों की ओर से उठाए गए सवालों और सुझावों के बाद लिए गए हैं। वनतारा ने अपनी नई प्रतिबद्धताओं को भारत के CITES प्रबंधन प्राधिकरण के सामने रखा है। इन्हें लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी जानकारी दी गई है। वनतारा का कहना है कि संचालन मंडल की सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है और अब इन्हें नई और मजबूत व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा।

आलोचना को सुधार का मौका मानने का फैसला

वनतारा ने कहा है कि वह आलोचनाओं को अब रुकावट नहीं, बल्कि सुधार का मौका मानता है। संगठन गैर-सरकारी संगठनों, वन्यजीव विशेषज्ञों, संरक्षण संस्थाओं और मीडिया के साथ बातचीत बढ़ाएगा। किसी भी विश्वसनीय सवाल या चिंता का जवाब मुकदमेबाजी के बजाय बातचीत, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर देने की कोशिश की जाएगी।

जानवरों को जामनगर लाने के बजाय उनके देश में संरक्षण

वनतारा के नए फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वन्यजीव संरक्षण को लेकर है। अब संगठन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि उन देशों में भी संरक्षण कार्यों पर ध्यान देगा जहां संबंधित जानवर प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। अगर किसी जानवर को उसके अपने देश में ही बचाया और सुरक्षित रखा जा सकता है, तो उसे जामनगर लाने के बजाय उसी देश में संरक्षण के लिए पैसा, तकनीक और विशेषज्ञता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

अलग से बनेगा अंतरराष्ट्रीय संरक्षण कोष

इन देशों में बचाव केंद्र, पशु अस्पताल और दूसरे संरक्षण कार्यक्रमों को मदद दी जाएगी। इसके लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय संरक्षण कोष बनाने की योजना भी है। वनतारा अपने आंतरिक नियम और काम करने की प्रक्रिया को सार्वजनिक करेगा। साथ ही CITES प्रबंधन प्राधिकरण को हर छह महीने में अपनी प्रगति की रिपोर्ट देगा। अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं को निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा। मीडिया और संरक्षण संगठनों के लिए भी अधिक खुली व्यवस्था रखने की बात कही गई है।

वन्यजीवों के मामलों की स्वतंत्र जांच होगी

वनतारा अब एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय CITES जांच समिति बनाने जा रहा है। इसमें CITES सचिवालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल होंगे। भविष्य में किसी भी नए जानवर को लाने से पहले तीन स्तर पर अनिवार्य जांच की जाएगी। इसके अलावा एक सलाहकार मंडल और वैश्विक संचालन परिषद भी बनाई जाएगी। CITES के पूर्व महासचिव जॉन ई. स्कैनलॉन एओ को संचालन परिषद का अध्यक्ष बनाया जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. कुशल कोंवर सरमा भी परिषद का हिस्सा होंगे। एक अलग और स्वतंत्र अनुपालन एवं जांच कार्यालय भी बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी अजीत कुलकर्णी को दी जाएगी। यह कार्यालय सीधे संचालन परिषद के अध्यक्ष को रिपोर्ट करेगा।

जीवित जानवरों के आयात पर कड़े नियम

वनतारा ने जीवित जानवरों को दूसरे देशों से भारत लाने को लेकर भी सख्त नियम घोषित किए हैं। सभी लंबित जीवित पशु आयात के आवेदन वापस लिए जाएंगे। नए आवेदन तब तक नहीं किए जाएंगे, जब तक भारत की नई CITES प्रक्रिया लागू नहीं हो जाती। इसके अलावा CITES प्रबंधन प्राधिकरण को नई व्यवस्था के लागू होने की पुष्टि करनी होगी और नई शासन व्यवस्था को कम से कम 12 महीने काम करना होगा। भविष्य में किसी भी आयात आवेदन से पहले CITES प्रबंधन प्राधिकरण से बातचीत करना जरूरी होगा। वनतारा ने यह भी कहा है कि वह प्राकृतिक आवास वाले देशों से जंगल में पकड़े गए जानवरों को आयात नहीं करेगा। प्राकृतिक आवास वाले देशों से महान वानर और बड़ी बिल्लियों को किसी भी स्थिति में नहीं लाया जाएगा।भविष्य में जानवरों का आयात केवल मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थाओं या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्राणी उद्यान संस्थानों से ही करने पर विचार किया जाएगा।

अगले पांच साल में संरक्षण पर बड़ा अभियान

वनतारा ने अगले पांच वर्षों के लिए एक बड़ा संरक्षण कार्यक्रम भी घोषित किया है। इसमें प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाना, वन्यजीव गलियारे विकसित करना, इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करना, जंगलों में ही जानवरों के इलाज की सुविधा बढ़ाना, संरक्षण के लिए प्रजनन, जानवरों को दोबारा जंगल में बसाना और इलाज के बाद उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना शामिल है। इस काम के लिए पशु चिकित्सकों, जीव वैज्ञानिकों, वन क्षेत्र के अधिकारियों, पशु देखभाल कर्मचारियों, प्राणी उद्यान विशेषज्ञों, महावतों और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक वन्यजीव विश्वविद्यालय शुरू करने का प्रस्ताव भी है। इसके अलावा हर साल कम से कम 50 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की योजना है।

आलोचना करने वाले संगठनों को भी मदद

वनतारा ने कहा है कि वह विश्वसनीय संरक्षण संगठनों को तकनीकी और आर्थिक सहायता भी देगा। खास बात यह है कि इस मदद में वे संगठन भी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने पहले वनतारा की आलोचना की है या उसके कामकाज पर सवाल उठाए हैं। इससे पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का रास्ता खुल सकता है।

देशभर में 100 चलित वन्यजीव अस्पताल

भारत में वनतारा 100 चलित वन्यजीव अस्पताल शुरू करने की योजना बना रहा है। इन अस्पतालों को दूरदराज के इलाकों में भेजा जाएगा, जहां वन्यजीवों के लिए तुरंत इलाज की सुविधा नहीं है। इनमें आधुनिक पशु चिकित्सा और आपातकालीन उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे घायल और संकट में फंसे वन्यजीवों को समय पर इलाज मिल सकेगा।

वनतारा ने कहा- आलोचना से सीखने की कोशिश

वनतारा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवान करणी ने कहा है कि संगठन ने आलोचनाओं और सुझावों को गंभीरता से सुना है। उनका कहना है कि इन सवालों को सुधार का अवसर माना गया है। उनके अनुसार, अगर किसी जानवर को उसके अपने देश में ही बेहतर तरीके से बचाया और संरक्षित किया जा सकता है, तो संसाधनों को जानवर को दूसरे देश में लाने के बजाय उसके प्राकृतिक घर में संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि, इन घोषणाओं के बाद सभी सवाल खत्म नहीं हो जाते। असली भरोसा तभी बनेगा जब इन फैसलों को जमीन पर लागू किया जाएगा और उनकी स्वतंत्र जांच भी होगी।

अब असली परीक्षा अमल की

वनतारा के नए फैसले ऐसे समय में आए हैं जब कई संगठन, विशेषज्ञ और पत्रकार लंबे समय से अधिक पारदर्शिता, स्वतंत्र जांच और जानवरों के मूल देशों में संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। अगर वनतारा अपनी सभी घोषणाओं को सही तरीके से लागू करता है तो इससे उसकी कार्यप्रणाली में भरोसा बढ़ सकता है। स्वतंत्र निगरानी, विशेषज्ञों की भागीदारी और नियमित जानकारी सार्वजनिक करने से उसकी विश्वसनीयता भी मजबूत हो सकती है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन घोषणाओं को वास्तव में कितनी मजबूती से लागू किया जाता है।

सफलता का पैमाना क्या होगा?

भविष्य में वनतारा की सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि वह कितने जानवरों को जामनगर लाता है। असली सफलता यह होगी कि वह जानवरों के प्राकृतिक घरों में कितने जीवों की मदद करता है, कितनी प्रजातियों को फिर से जंगल में बसाने में योगदान देता है, कितने संरक्षण विशेषज्ञ तैयार करता है और कितने देशों के संरक्षण कार्यों में मदद करता है। अगर इन सभी योजनाओं को पूरी तरह लागू किया जाता है और उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी होती है, तो इसका फायदा सिर्फ वनतारा को नहीं मिलेगा। इससे भारत और दुनिया में वन्यजीव संरक्षण, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था भी मजबूत हो सकती है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos