UP–Japan Investment Meet 2026: कृषि ताकत और जापानी तकनीक से बनेगा दुनिया का बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में जापान के साथ नई साझेदारी की जमीन तैयार हो रही है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित UP–Japan Investment Meet के सेक्टोरल प्रोग्राम ‘फ्रॉम फॉर्म गेट टू ग्लोबल प्लेट’ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जापानी निवेशकों से प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास उपजाऊ जमीन, पर्याप्त पानी, मेहनती किसान और बड़ा युवा कार्यबल है। दूसरी ओर जापान के पास आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था और वैश्विक बाजार का अनुभव है। दोनों की ताकत को साथ लाकर यूपी के कृषि उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

खेत से सीधे दुनिया की डाइनिंग टेबल तक पहुंचेगा यूपी का उत्पाद

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है। फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत दिलाने पर जोर है। उन्होंने कहा कि संकल्प ऐसा होना चाहिए कि दुनिया की किसी भी डाइनिंग टेबल पर उत्तर प्रदेश का कोई न कोई कृषि या खाद्य उत्पाद जरूर पहुंचे। इसके लिए जापानी तकनीक और निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर

उपमुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश की करीब 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से केवल किसानों को फायदा नहीं होगा, बल्कि गांवों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी बनेंगे। सरकार ने 2017 के बाद खाद्य प्रसंस्करण नीति लागू की थी, जिसे 2023 में और ज्यादा व्यावहारिक बनाया गया। फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को पूंजी सब्सिडी, मंडी शुल्क में छूट और दूसरे वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाली इकाइयों को सोलर पावर पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की व्यवस्था भी बताई गई।

हर ब्लॉक और तहसील में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट का लक्ष्य

सरकार हर ब्लॉक और तहसील स्तर पर आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए प्रदेश में जमीन का पर्याप्त भंडार, 24 घंटे बिजली और एक्सप्रेसवे व लॉजिस्टिक्स का बड़ा नेटवर्क उपलब्ध होने का दावा किया गया। लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और निर्माणाधीन जेवर एयरपोर्ट जैसे हवाई अड्डों का जिक्र करते हुए बताया गया कि यूपी अब देश और दुनिया के बाजारों से बेहतर तरीके से जुड़ रहा है। इससे कृषि उत्पादों के तेज परिवहन और निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।

काला नमक चावल से महिला समूहों तक बड़ा बाजार

यूपी के खास कृषि उत्पादों में काला नमक चावल का भी जिक्र किया गया। इसे ‘बुद्ध राइस’ के नाम से भी पहचान मिलती है। ऐसे स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। वहीं प्रदेश की एक करोड़ से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इन समूहों के बनाए उत्पादों को भी बेहतर बाजार और प्रोसेसिंग सुविधाओं से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

जापानी निवेशकों को सुरक्षा और आसान व्यवस्था का भरोसा

उपमुख्यमंत्री ने जापानी निवेशकों को प्रदेश में सुरक्षित और पारदर्शी कारोबारी माहौल का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि निवेशकों को कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और सिंगल-विंडो व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने जापानी कंपनियों से यूपी की कृषि संपदा और जापान की तकनीकी क्षमता को मिलाकर प्रदेश को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया।

जापान ने भी जताई लंबी साझेदारी की उम्मीद

भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि शक्ति, औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने तकनीक, निवेश और कौशल को स्थानीय जरूरतों से जोड़कर व्यावहारिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया। किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भी भारत में जापानी और पैन-एशियन खाद्य उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता का जिक्र किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण और भारत को पड़ोसी देशों के लिए निर्यात केंद्र बनाने की संभावनाओं पर बात रखी। कार्यक्रम में गोल्डी ग्रुप और अमूल-बनास डेयरी समेत कई कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

आगे की राह

UP–Japan Investment Meet में सामने आया मॉडल केवल निवेश तक सीमित नहीं है। इसका फोकस खेत से प्रोसेसिंग, प्रोसेसिंग से पैकेजिंग और फिर वैश्विक बाजार तक पूरी श्रृंखला तैयार करने पर है। अब इस साझेदारी को जमीन पर उतारने के लिए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी, प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ने तथा निर्यात सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। यदि जापानी तकनीक और यूपी की कृषि ताकत का यह मेल सफल होता है तो किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात—चारों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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