गंगा-सरयू का जलस्तर बढ़ा, यूपी में बाढ़ का अलर्ट; प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए योगी सरकार ने बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश के बाद प्रमुख बैराजों से नदियों में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर बिजनौर, बाराबंकी समेत कई जिलों में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। संवेदनशील इलाकों में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं और कंट्रोल रूम से लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है।

बिजनौर में गंगा का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन ने संभाला मोर्चा

बिजनौर में हरिद्वार बैराज से गंगा में करीब 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। जिला कंट्रोल रूम को सक्रिय करते हुए मौसम विभाग से मिलने वाली चेतावनियों के आधार पर हर दो घंटे में एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, ईओ, ग्राम प्रधानों और आपदा मित्रों को मौसम और बाढ़ की जानकारी दी जा रही है। जिले में 24 संवेदनशील और 5 अति संवेदनशील इलाके चिह्नित किए गए हैं। गंगा और खोह नदी पर गेज लगाकर 24 घंटे जलस्तर की निगरानी की जा रही है। गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को भी सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय स्थल तैयार

बिजनौर में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए 32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय स्थल सक्रिय किए गए हैं। चांदपुर तहसील के जलीलपुर ब्लॉक के दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी जैसे गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी आने की स्थिति को देखते हुए नावों की व्यवस्था की गई है। प्राथमिक विद्यालयों में चार बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं, जहां लेखपाल और राजस्व कर्मियों की 24 घंटे रोस्टर के आधार पर ड्यूटी लगाई गई है। प्रभावित 11 गांवों में करीब 300 राशन किट बांटी जा चुकी हैं और अतिरिक्त राहत सामग्री का भंडार भी तैयार रखा गया है। सुरक्षा के लिए फ्लड पीएसी की तैनाती की गई है। नाविकों और गोताखोरों का भी चिन्हीकरण पूरा कर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव अभियान में देरी न हो।

बाराबंकी में सरयू उफनी, फिर भी गांव सुरक्षित

बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी का अधिकतम डिस्चार्ज 4.35 लाख क्यूसेक से अधिक दर्ज किया गया है। इसके बावजूद पहले कटान की चपेट में आने वाले कई गांव फिलहाल सुरक्षित हैं। इसका बड़ा कारण बाढ़ से पहले कराए गए तट संरक्षण के काम बताए जा रहे हैं। संवेदनशील स्थानों पर जियोबैग स्टड, परक्यूपाइन, स्पर और रिवेटमेंट जैसे काम कराए गए थे। इनसे नदी की मुख्य धारा का रुख बदलने में मदद मिली और तटबंधों पर कटान का असर कम हुआ। प्रशासन के मुताबिक फिलहाल बाराबंकी में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है और आबादी वाले इलाके सुरक्षित हैं।

हर दो घंटे में मिल रहा अलर्ट, गांवों तक पहुंच रही जानकारी

बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में सिर्फ अधिकारियों की निगरानी ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों को समय पर सूचना देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी मिलने के बाद स्थानीय अधिकारियों और ग्राम स्तर की टीमों को अपडेट दिया जा रहा है। इसके अलावा ‘सचेत ऐप’ के जरिए भी पूर्व चेतावनी मिलने से प्रशासन को समय रहते तैयारियां करने में मदद मिल रही है। राहत सामग्री, नाव, गोताखोर और बचाव दलों को जरूरत के हिसाब से सक्रिय रखने की तैयारी है।

गोरखपुर में गोड़धोइया नाले ने बदल दी तस्वीर

बाढ़ और जलभराव की खबरों के बीच गोरखपुर से राहत देने वाली तस्वीर भी सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से करीब 495 करोड़ रुपये की लागत से तैयार गोड़धोइया नाला परियोजना ने इस साल शहर के बड़े हिस्से को जलभराव से राहत दी है। इस बार बारिश के दौरान गोरखपुर के उत्तरी हिस्से के 17 वार्डों में जलभराव नहीं हुआ। बारिश का पानी गोड़धोइया नाले के जरिए आरकेबीके मोहद्दीपुर के पास रामगढ़ताल में पहुंच गया। परियोजना से पहले बारिश के समय इन इलाकों में पानी भरने की समस्या गंभीर रहती थी। अब करीब 9.50 किलोमीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा पक्का गोड़धोइया नाला बारिश के पानी की निकासी में अहम भूमिका निभा रहा है।

बाढ़ से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत?

फिलहाल प्रशासन का दावा है कि संवेदनशील जिलों में राहत और बचाव की पूरी तैयारी है। बाढ़ चौकियों से लेकर आश्रय स्थलों, नावों, गोताखोरों और राहत सामग्री तक की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही तट संरक्षण के पुराने कामों की भी अब परीक्षा हो रही है।

बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी

उत्तर प्रदेश में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बावजूद प्रशासन ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। बिजनौर में गंगा और बाराबंकी में सरयू पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वहीं गोरखपुर की गोड़धोइया नाला परियोजना ने दिखाया है कि समय रहते जल निकासी की मजबूत व्यवस्था तैयार हो तो भारी बारिश के दौरान शहरों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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