ब्रिटेन में इच्छा मृत्यु की अनुमति देने वाला विधेयक खारिज, पुराना प्रतिबंध लागू

The CSR Journal Magazine
ब्रिटेन के सांसदों ने हाल ही में उस विधेयक को खारिज कर दिया, जिसमें गंभीर बीमार वयस्कों को इच्छा मृत्यु का विकल्प देने का प्रावधान था। हाउस ऑफ कॉमन्स में चार घंटे चली बहस के बाद ‘टर्मिनली इल एडल्ट्स (एंड ऑफ लाइफ) बिल’ को 286 के मुकाबले 270 मतों से अस्वीकृत कर दिया गया। यह नतीजा चौंकाने वाला था, क्योंकि इसी तरह का एक विधेयक पिछले साल पास हुआ था। इस मतदान के साथ ही इच्छा मृत्यु पर संसद में दो साल से चल रही बहस समाप्त हो गई।

संसद में गर्म बहस, फिर भी बिल का खात्मा

इस विधेयक में प्रस्तावित था कि इंग्लैंड और वेल्स के गंभीर रूप से बीमार वयस्क, जिन्हें छह महीने से कम जीवन बचा है, वे इच्छा मृत्यु के लिए आवेदन कर सकें। माना जा रहा था कि इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर ‘असिस्टेड डेथ’ के लिए स्विट्जरलैंड जैसे देशों का रुख करते हैं। हालांकि, हाउस ऑफ लॉर्ड्स में इसे प्रभावी रूप से रोक दिया गया था।

मतदान का असर: दो साल की बहस का अंत

हाउस ऑफ कॉमन्स में पिछले दो सालों के दौरान कई सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपने अनुभव साझा किए। लेकिन वोटिंग में विरोधियों ने इसे असुरक्षित और अव्यावहारिक बताया। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने इस बार वोट नहीं दिया, यह कहते हुए कि वह बहस को प्रभावित नहीं करना चाहते थे। इस मुद्दे पर सांसदों के बीच वैचारिक विभाजन साफ नजर आया।

कोई कसर नहीं छोड़ी, फिर भी हार!

विधेयक को खारिज करने वाले सांसदों ने कमजोर लोगों पर संभावित दबाव और चिकित्सा पूर्वानुमान की अनिश्चितता के बारे में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। डॉ. जुबीर अहमद ने कहा कि जब उनसे पूछा जाता है कि किसी के पास जीने के लिए छह महीने बचे हैं या नहीं, तो वह गलत साबित भी होते हैं।

धार्मिक संगठनों का विरोध: बिल पर चिंताएँ

ब्रिटेन में कैथोलिकों के नेता आर्कबिशप रिचर्ड मॉथ ने इसे सिद्धांत रूप से गलत बताया। चर्च ऑफ इंग्लैंड ने भी इससे असहमति जताई। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर चिंता जताई। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में इस तरह के मामलों में सुधार होगा।

भविष्य की उम्मीदें: आगे की राह

बिल को दोबारा पेश करने वाली लॉरेन एडवर्ड्स ने नतीजे को ‘दिल तोड़ने वाला’ बताया, लेकिन उनका मानना है कि भविष्य में इस मुद्दे को फिर से उठाया जाएगा। उनका दावा है कि इंग्लैंड में भी ‘असिस्टेड डाइंग’ की व्यवस्था आएगी, जैसे कि अन्य देशों में हो रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है।

असिस्टेड डाइंग का मामला: फिर से उठेगा

कुल मिलाकर, इंग्लैंड और वेल्स में ‘असिस्टेड डाइंग’ को कानूनी बनाने की हालिया कोशिश फिलहाल खत्म हो गई है। दो साल तक चली इस बहस में सुरक्षा उपायों, मेडिकल राय और प्रस्तावित कानून के मूल पर चर्चा हुई, लेकिन अंततः इसका कोई सुखद परिणाम नहीं निकला।

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