ब्रिटेन ने भारत की CCTS स्कीम को दी मान्यता, डबल कार्बन टैक्स से मिलेगी राहत

The CSR Journal Magazine

भारत-यूके के बीच बढ़ता सहयोग

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच संबंध लगातार सुधार कर रहे हैं। हाल ही में, ब्रिटेन ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को अपने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के तहत राहत के लिए मान्यता दी है। यह निर्णय घरेलू निर्यातकों के लिए टैक्स के बोझ को कम कर सकता है।

कार्बन टैक्स में राहत की उम्मीद

यह कदम भारतीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। अब, भारत लोग कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट के माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में सक्षम होंगे। इस स्कीम के तहत, घरेलू कंपनियों को कार्बन से जुड़ी लागत का सामना करना पड़ सकता है।

CBAM के तहत मान्यता

ब्रिटिश HM ट्रेजरी ने CCTS को एक योग्य कार्बन प्राइसिंग स्कीम के रूप में पहचानते हुए कहा है कि अब आयातक CCTS के तहत कार्बन कीमत की राहत मांग सकेंगे। इसके लिए उन्हें ब्रिटेन के कानून के अनुसार सबूत और सत्यापन की आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। यह नई व्यवस्था भारतीय निर्यातकों को सीधे लाभ पहुँचाएगी।

द्विपक्षीय व्यापार पर प्रभाव

भारत-यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 25.1 बिलियन डॉलर और 2024 में सेवाओं का व्यापार 35.4 बिलियन डॉलर पर पहुँच जाएगा। कार्बन मार्केट के डिजाइन और कार्यान्वयन पर सहयोग जारी रहेगा, जिसमें दो देशों के बीच विभिन्न मामलों पर लगातार बातचीत शामिल है।

डबल कार्बन टैक्स से बचने का मौका

ब्रिटिश सरकार ने दिसंबर 2023 में CBAM लागू करने का निर्णय लिया। इस मैकेनिज्म के तहत, लोहे और स्टील जैसे कार्बन-इंटेंसिव उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाया जाएगा। CCTS के मान्यता से भारत को दो बार कार्बन टैक्स चुकाने से राहत मिलेगी।

कार्बन प्राइसिंग पर निरंतर संवाद

दोनों देशों की सरकारें कार्बन प्राइसिंग पर निरंतर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सहयोग CCTS और UK CBAM नियमों के बीच तालमेल बनाए रखने में मदद करेगा। इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत से आगे बढ़ने की संभावनाएँ मजबूत होंगी।

भविष्य की दिशा

भारत ने CCTS को इस मकसद के लिए अधिसूचित किया है कि कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट की ट्रेडिंग के जरिए अपने उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके। यह स्कीम न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि ग्लोबल कार्बन मार्केट के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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