Supreme Court की सबरीमाला मामले में कड़ी नसीहत: “क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं?”

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में याचिका दायर करने वाले इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन (IYLA) को सख्त फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि क्या इनके पास और कोई काम नहीं है? न्यायालय का कहना है कि 2006 में दायर यह जनहित याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जिसमें न्यायालय ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल पूछा, “आपने यह याचिका क्यों दायर की? क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं?”

जस्टिस नागरत्ना की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानूनी संस्था को व्यक्तिगत आस्था का दावा करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “विश्वास व्यक्ति का होता है, संस्था का नहीं। आपके पास कोई कांशियंस नहीं है।” यह टिप्पणी याचिकाकर्ता को विशेष रूप से ध्यान में रखकर की गई थी।

वकील रवि प्रकाश की दलीलें

इस कड़ी नसीहत के बाद याचिकाकर्ता की ओर से वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने अपनी दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि वे आस्तिक हैं और इस याचिका का उद्देश्य भगवान अयप्पा के भक्तों की आस्था को चुनौती देना नहीं है। इसके लिए उन्होंने 2006 में प्रकाशित चार समाचार रिपोर्टों का संदर्भ भी प्रस्तुत किया।

मुख्य पुजारी की टिप्पणी पर विवाद

वकील ने कहा कि मंदिर के तंत्री ने पहले कहा था कि कम उम्र की महिलाओं का प्रवेश देवता की इच्छा के खिलाफ है। इस पर न्यायाधीशों की टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई गई। कोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता का कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है।

संगठन को चाहिए ध्यान युवा वकीलों पर

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संगठन से कहा कि उन्हें बार और युवा वकीलों के हित में काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस प्रकार की याचिकाएं दायर करने से बेहतर है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवा वकीलों को सहयोग दें और उनके लिए अवसर पैदा करें।

कोर्ट की चिंताएं

सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख इस ओर इशारा करता है कि वह व्यक्तिगत आस्था और कानून के बीच संतुलन बनाने के लिए गंभीर है। जस्टिस अरविंद कुमार ने भी IYLA से यह प्रश्न किया कि क्या याचिका दाखिल करने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।

कानूनी प्रक्रिया का सही उपयोग जरूरी

यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से यह उम्मीद की है कि वे कानून के सही और उचित उपयोग पर ध्यान केंद्रित करें। अदालत के सामने इस प्रकार के मुद्दों को उठाना आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो।

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