पटाखों पर बैन की मांग, दिवाली के बाद SC में ग्रीन क्रैकर्स पर होगी सुनवाई

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पटाखों और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक टाल दी। अब दिवाली के बाद इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।

बच्चों के फेफड़ों में काले धब्बे

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली के डॉक्टर अब 14 से 16 साल के बच्चों के फेफड़ों में काले धब्बे देख रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। यह चिंता का विषय है, खासकर तब जब दिवाली के बाद अस्पतालों में सांस और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

ग्रीन पटाखों की प्रभावशीलता, निर्माताओं का विरोध

अपराजिता सिंह ने बताया कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं। CSIR और NEERI के फॉर्मूले के अनुसार, इन पटाखों से उत्सर्जन सामान्य पटाखों की तुलना में करीब 30 फीसदी कम होता है, लेकिन फिर भी ये प्रदूषण फैलाते हैं। पटाखा निर्माताओं के वकील जे. साई दीपक ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध कारगर नहीं होता। इससे काले बाजार, चीनी उत्पादों और बिना लाइसेंस वाले पटाखों की बिक्री बढ़ती है। उन्होंने कहा कि नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए, लेकिन नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

दिल्ली सरकार की तैयारी

दिल्ली सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। एक नवंबर से लागू होने वाली योजना के तहत BS6 मानक से नीचे के बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक, सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं।

कोर्ट की चिंताएं, दिवाली के बाद की सुनवाई

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हर साल उसके आदेशों का उल्लंघन होता है। अदालत ने नई पीढ़ी से प्रदूषण की गंभीर समस्या के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर दिया। यह सुनवाई इस बात का संकेत है कि प्रदूषण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। अब यह देखना होगा कि दिवाली के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है। क्या ग्रीन पटाखों का उपयोग किया जाएगा या फिर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी पक्षों को एक साथ आकर काम करने की जरूरत है।

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