Marital Rape को अपराध बनाने पर सुप्रीम कोर्ट में बहस, केंद्र बोला- कानून बनाना संसद का काम

The CSR Journal Magazine

कानूनी बारीकियों पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग पर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने इस मामले में कहा कि मैरिटल रेप को अलग अपराध बनाना संसद और कार्यपालिका का काम है, ना कि सुप्रीम कोर्ट का। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने कहा कि शादी का अर्थ महिला की स्वतंत्रता का अंत नहीं होता, पर इस मुद्दे पर मौजूदा कानून के तहत क्या पति पर मामला चलाया जा सकता है, यह गंभीर सवाल है। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।

पत्नी की इच्छा खिलाफ संबंध का मामला

इस मुद्दे की जड़ वास्तविकता से जुड़ी है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि पत्नी की इच्छा के खिलाफ पति द्वारा शारीरिक संबंध बनाना रेप है। मौजूदा कानून यह मानता है कि अगर पत्नी 18 साल से अधिक की हैं, तो उनकी सहमति के बिना संबंध को रेप नहीं माना जाएगा। यह कानूनी छूट मैरिटल रेप का एक बड़ा मुद्दा बन गई है।

केंद्र सरकार का इनकार

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मैरिटल रेप को अलग से अपराध बनाने के पक्ष में नहीं है। उनका तर्क है कि ऐसा कानून बनाने से विवाह और पति-पत्नी के रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि विवाह के भीतर होने वाले यौन संबंधों को मौजूदा कानूनों के तहत देखना उपयुक्त है।

याचिकाकर्ताओं का बयान

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शादी का मतलब यह नहीं है कि पति को पत्नी की इच्छा के खिलाफ जबरदस्ती संबंध बनाने का अधिकार मिल जाता है। उन्होंने तर्क दिया है कि अगर पति पत्नी को गंभीर चोट पहुंचाता है, तो वह कानून के दायरे से नहीं बच सकता। वे मांग कर रहे हैं कि शादीशुदा महिलाओं को भी वैसी ही कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो अन्य महिलाओं को मिलती है।

सुप्रीम कोर्ट की दिशा निर्धारण

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से दो प्रश्नों पर ध्यान देने का निर्णय लिया है। पहला, अगर मौजूदा कानून में मैरिटल रेप की छूट बरकरार रहती है, तो क्या पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया जा सकता है? दूसरा, क्या अदालत मौजूदा कानून को बदलकर किसी कार्य को अपराध घोषित कर सकती है या इसके लिए संसद को कानून में संशोधन करना होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट का मामला

यह मामला पहले 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां अलग-अलग जजों ने अलग मत दिया। जस्टिस राजीव शकधर ने मैरिटल रेप की छूट को असंवैधानिक माना, जबकि जस्टिस सी. हरिशंकर ने इसे सही ठहराया। यह विवादित मुद्दा अलग दिशा में आगे बढ़ा और अब सुप्रीम कोर्ट में यह मामले का निपटारा किया जाएगा।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी सुनने को मिले

सुप्रीम कोर्ट ने हालिया सुनवाई में यह भी कहा है कि पति द्वारा पत्नी से खर्चों का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं माना जा सकता। यह महत्वपूर्ण फैसला दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के एक मामले में लिया गया है, जिससे घरेलू मुद्दों पर कानूनी दृष्टिकोण को स्पष्ट किया गया है।

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