राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका! रवैये पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

The CSR Journal Magazine

राजपाल यादव पर कसा गया कानून का शिकंजा

नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव का एक बार फिर से अदालत में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनके रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब तक राजपाल को कई मौके दिए गए हैं, लेकिन वे कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतकर्ता को अपनी रकम नहीं मिलती है, तो अभिनेता की अपील को खारिज करने पर सोचा जा सकता है।

अंतिम मौका: क्या राजपाल करेंगे भुगतान?

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजपाल यादव को कई बार नरमी बरती गई है। यदि आगे भी उन्होंने कोर्ट का आदेश नहीं माना तो राहत देना मुश्किल होगा। सीजेआई ने राजपाल को कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए मंगलवार तक अंतिम मौका दिया है। अगले सुनवाई का दिन बुधवार को होगा।

क्या है चेक बाउंस का मामला?

यह सम्पूर्ण मामला राजपाल यादव से जुड़े सात चेक बाउंस के मामलों से संबंधित है। साल 2010 में उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये की मदद ली। फिल्म की सफलता न मिलने पर रकम लौटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, साल 2012 में राजपाल और उनकी पत्नी ने 11 करोड़ रुपये वापस करने पर सहमति जताई थी। 2013 में राजपाल ने 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए, जो सभी बाउंस हो गए। इसके बाद कई मामले दर्ज कराए गए।

फैसले का सफर: 2018 से अब तक

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की सजा सुनाई। मामला सेशंस कोर्ट से होते हुए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। कई सालों तक सजा और भुगतान के मुद्दे पर सुनवाई चलती रही लेकिन कोई हल नहीं निकला। जुलाई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए तीन-तीन महीने की साधारण कैद की सजा दी। पहले ही, राजपाल को फरवरी 2026 में भी जेल जाना पड़ा, जिसके बाद उन्हें विद्वेषपूर्ण राहत मिली।

सरेंडर के लिए मिले अवसर

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी गई। 15 सितंबर को हुई सुनवाई में राजपाल ने और समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। हालाँकि, अब सोमवार की सुनवाई में कोर्ट ने उनके भुगतान और आदेशों के पालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि राजपाल यादव ने अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया, तो उनकी अपील को खारिज करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यह मुद्दा अब अदालत की अगली सुनवाई में और गहराई से उठाया जाएगा। राजपाल यादव की इस कठिनाई का निपटारा होना आवश्यक है, ताकि उनके भविष्य की दिशा स्पष्ट हो सके।

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