दक्षिण मुंबई की 12 हजार से ज्यादा पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट, MHADA खर्च करेगा 50 करोड़

The CSR Journal Magazine

दक्षिण मुंबई की 12 हजार से अधिक पुरानी इमारतों की होगी स्ट्रक्चरल जांच, पहले चरण में 750 इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू, खतरनाक इमारतों पर होगी कार्रवाई

दक्षिण मुंबई में दशकों पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) ने बड़ा कदम उठाया है। दक्षिण मुंबई की 12 हजार से अधिक पुरानी उपकर प्राप्त इमारतों की चरणबद्ध तरीके से स्ट्रक्चरल जांच कराई जाएगी। इस व्यापक अभियान पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य जर्जर और कमजोर इमारतों की समय रहते पहचान करना तथा संभावित हादसों को रोकना है।

जर्जर इमारतों पर कार्यवाई

MHADA के इस अभियान के तहत इमारतों की संरचनात्मक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि भवन की नींव, कॉलम, बीम, स्लैब, दीवारों और अन्य प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों की स्थिति कैसी है। जिन इमारतों को तत्काल खतरे वाली श्रेणी में पाया जाएगा, उनके संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जबकि मरम्मत योग्य भवनों में बिना अनावश्यक देरी के मरम्मत कार्य कराने पर जोर दिया जाएगा।

पहले चरण में 750 इमारतों की जांच शुरू

म्हाडा ने इस बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है। पहले चरण में 750 इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू किया गया है। इन इमारतों की तकनीकी जांच विशेषज्ञ एजेंसियों के माध्यम से कराई जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन-सी इमारत सामान्य मरम्मत से सुरक्षित हो सकती है और किन भवनों में गंभीर संरचनात्मक समस्या मौजूद है। पहले चरण के अनुभव और रिपोर्ट के आधार पर आगे की इमारतों को जांच के लिए शामिल किया जाएगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना है।

अगस्त 2027 तक पूरा होगा अभियान

म्हाडा ने दक्षिण मुंबई की सभी संबंधित पुरानी इमारतों की स्ट्रक्चरल जांच अगस्त 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यानी अगले करीब एक साल में हजारों इमारतों की तकनीकी स्थिति का व्यापक आकलन करने की योजना है। दक्षिण मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं जो कई दशक पुरानी हैं। इनमें से कई भवनों में समय के साथ संरचनात्मक बदलाव, रखरखाव की कमी, नमी, जंग, दरार और अन्य समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट को भवन सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खतरनाक इमारतों पर होगी कार्रवाई

स्ट्रक्चरल जांच का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसी इमारतों की पहचान करना है जो रहने के लिहाज से खतरनाक हो चुकी हैं। यदि किसी भवन की संरचनात्मक स्थिति गंभीर पाई जाती है तो उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।खतरनाक इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को खाली कराने, पुनर्विकास या अन्य वैधानिक कार्रवाई जैसे विकल्पों पर निर्णय लेना पड़ सकता है। हालांकि, किसी भवन के संबंध में अंतिम कार्रवाई उसकी तकनीकी रिपोर्ट और संबंधित नियमों के आधार पर ही तय की जाएगी।

मरम्मत योग्य इमारतों की होगी तत्काल मरम्मत

हर पुरानी इमारत को खतरनाक मानना इस अभियान का उद्देश्य नहीं है। स्ट्रक्चरल ऑडिट के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि किन इमारतों को आवश्यक मरम्मत और मजबूतीकरण के जरिए सुरक्षित बनाया जा सकता है। ऐसी इमारतों के लिए तत्काल मरम्मत और आवश्यक स्ट्रक्चरल रिपेयर पर जोर दिया जाएगा। इससे उन भवनों को अनावश्यक रूप से खाली कराने या तोड़ने की स्थिति से बचाया जा सकता है, जिन्हें तकनीकी सुधार के जरिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

क्यों जरूरी है दक्षिण मुंबई की पुरानी इमारतों की जांच?

दक्षिण मुंबई शहर के सबसे पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में पुराने आवासीय और व्यावसायिक भवन मौजूद हैं। कई इमारतें लंबे समय से बारिश, समुद्री नमी, प्रदूषण और लगातार उपयोग का सामना कर रही हैं। मुंबई की मानसूनी बारिश भी पुराने भवनों की संरचनात्मक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। छत और दीवारों में पानी का रिसाव, लोहे की सरिया में जंग, कंक्रीट का कमजोर होना और दीवारों में दरार जैसी समस्याएं समय के साथ गंभीर रूप ले सकती हैं। इसी वजह से केवल बाहर से इमारत को देखकर उसकी मजबूती का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों द्वारा किया गया स्ट्रक्चरल ऑडिट यह पता लगाने में मदद करता है कि भवन अंदर से कितना सुरक्षित है।

रहवासियों के लिए भी महत्वपूर्ण अभियान

म्हाडा की यह पहल दक्षिण मुंबई के हजारों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद निवासियों को अपने भवन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। यदि किसी इमारत में छोटी-मोटी खामी है तो समय रहते उसे दूर किया जा सकता है और यदि कोई गंभीर खतरा सामने आता है तो प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने भवनों में नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत से बड़े हादसों की आशंका को कम किया जा सकता है। कई बार छोटी दरार या पानी का रिसाव शुरुआत में मामूली दिखाई देता है, लेकिन लंबे समय तक अनदेखी होने पर वह संरचनात्मक कमजोरी का संकेत हो सकता है।

50 करोड़ रुपये के खर्च से होगा व्यापक ऑडिट

इस पूरे अभियान पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट एक व्यापक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया होगी। इसमें विशेषज्ञ इंजीनियरों, तकनीकी एजेंसियों और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। जांच के दौरान प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर भवनों को उनकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखा जा सकता है। इससे प्रशासन को प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी कि किन इमारतों में तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है और किन भवनों में सामान्य मरम्मत से काम चल सकता है।

सिर्फ जांच नहीं, रिपोर्ट के बाद कार्रवाई भी अहम

स्ट्रक्चरल ऑडिट की सफलता केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती रिपोर्ट में सामने आने वाली खामियों के आधार पर समय पर कार्रवाई करना होगी। यदि किसी भवन को तत्काल मरम्मत की जरूरत है तो मरम्मत में देरी नहीं होनी चाहिए। वहीं, यदि किसी इमारत को रहने के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इसी तरह जिन भवनों को मरम्मत के बाद सुरक्षित किया जा सकता है, वहां मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी भी जरूरी होगी। केवल कागजों पर मरम्मत दिखाकर मामले को खत्म करने के बजाय वास्तविक संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना इस अभियान की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

दक्षिण मुंबई में भवन सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा

दक्षिण मुंबई की 12 हजार से अधिक पुरानी उपकर प्राप्त इमारतों की जांच का यह अभियान शहर में भवन सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब 50 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च और अगस्त 2027 तक सभी इमारतों की जांच पूरी करने के लक्ष्य के साथ म्हाडा ने एक बड़ी जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है। पहले चरण में 750 इमारतों की जांच शुरू हो चुकी है। अब आने वाले महीनों में जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया से यह पता चल सकेगा कि दक्षिण मुंबई की कितनी पुरानी इमारतें सुरक्षित स्थिति में हैं, कितनों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है और कितने भवनों पर गंभीर कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।कुल मिलाकर, यह अभियान केवल पुरानी इमारतों की तकनीकी जांच नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा कदम है। समय पर पहचान, वैज्ञानिक जांच और रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई ही इस पहल को सफल बनाएगी।

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