Nifty 50 लगातार सातवें सत्र गिरा: क्या 24000 के नीचे जाएगा?

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बाजार में हाहाकार! लगातार 7वें दिन टूटा Nifty, क्या थमेगी गिरावट या 24,000 के पार जाएगा संकट?

भारतीय शेयर बाजार में आज, 19 अगस्त 2026 को लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते NSE निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) 76.60 अंक (0.32%) टूटकर 24,078.30 के स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी-ईरान युद्धविराम के विफल होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतें $92 प्रति बैरल के पार जाने से निवेशकों में भारी घबराहट है। बाजार के इस लगातार ढलान से अब तकनीकी विश्लेषकों और खुदरा निवेशकों के बीच यह चिंता गहराई है कि यदि सूचकांक आगामी सत्रों में 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसलता है, तो बड़ी तकनीकी बिकवाली (Technical Sell-off) शुरू हो सकती है।

लगातार 7वें सत्र में टूटा बाजार: निफ्टी 24,078 पर बंद

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगस्त का यह सप्ताह बेहद निराशाजनक साबित हो रहा है। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) बुधवार को लगातार सातवें दिन लाल निशान में बंद हुआ, जो पिछले 11 महीनों (सितंबर 2025 के बाद) की इसकी सबसे लंबी गिरावट की अवधि है। दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद, निफ्टी 50 अंततः 76.60 अंक या 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,078.30 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) भी लगातार चौथे दिन फिसलते हुए 325.78 अंक या 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 पर सिमट गया। आज सुबह बाजार सपाट खुला था, जहाँ निफ्टी ने 24,152.05 पर शुरुआत की थी। लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की मार के कारण बिकवाली का दबाव इतना तेज था कि इंडेक्स दोपहर के सत्र में 24,025.65 के इंट्राडे निचले स्तर तक चला गया। हालांकि, आखिरी आधे घंटे में शॉर्ट कवरिंग और संस्थागत खरीदारी के चलते बाजार निचले स्तरों से करीब 50 अंक संभलने में कामयाब रहा, जिससे यह 24,000 के ऊपर बंद हो सका।
बाजार के प्रमुख आंकड़े एक नजर में (19 अगस्त 2026)
सूचकांक / संकेतक,  समापन स्तर / कीमत,  दैनिक बदलाव (%),  7 दिवसीय कुल गिरावट
निफ्टी 50 (NSE Nifty),   24,078.30,   -0.32%,   -2.0% (505 अंक)
सेंसेक्स (BSE Sensex),  76,909.68-0,  -42%,  -1.5% (चार दिनों में)
निफ्टी मिडकैप 150,  गिरावट के साथ बंद,   -0.25%,  व्यापक बिकवाली का असर
निफ्टी स्मॉलकैप 250,  गिरावट के साथ बंद,  -0.63%,  खुदरा निवेशकों को झटका
ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल),  ~$91.97 – $92 / बैरल,  +1.04%,  3 सप्ताह का उच्चतम स्तर
भारतीय रुपया (USD/INR),  ₹95.73 प्रति डॉलर,  कमजोरी जारी,  लगातार तीसरे दिन गिरावट

गिरावट के 5 सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कारण

बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में घरेलू मोर्चे पर कॉर्पोरेट नतीजों के सीजन के समापन के साथ कोई नया ट्रिगर नहीं बचा है, जिससे बाजार पूरी तरह वैश्विक विपरीत परिस्थितियों (Global Headwinds) के नियंत्रण में आ गया है।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम का अंत और क्रूड का संकट

सबसे बड़ा झटका पश्चिम एशिया से लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा 60 दिनों का अस्थायी युद्धविराम बिना किसी ठोस राजनयिक समाधान के समाप्त हो गया है। इसके कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बंद होने और वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड तेजी से बढ़कर $92 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति (Inflation) के लिहाज से बड़ा खतरा है।

वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल

अमेरिका, जर्मनी और जापान में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड (Bond Yields) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगाना पसंद करते हैं।

FPI की लगातार बड़ी बिकवाली

साल 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय बाजारों से बड़े पैमाने पर निकासी की गई है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक FPIs लगभग $25 बिलियन (अरब) मूल्य की भारतीय इक्विटी बेच चुके हैं। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) इस भारी बिकवाली को पूरी तरह सोखने में असमर्थ रहे हैं।

रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर होकर ₹95.73 के स्तर पर पहुंच गया है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के डॉलर-रिटर्न को कम करता है, जिससे वे देश के शेयर बाजार से फंड निकालने पर मजबूर होते हैं।

यूएस फेडरल रिजर्व (FOMC) मिनट्स का डर

आज रात अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड की आगामी मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स जारी होने वाले हैं। निवेशकों को डर है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई फिर भड़क सकती है, जिससे फेड ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया को टाल सकता है।

सेक्टोरल प्रदर्शन: केवल IT चमका, एनर्जी और FMCG पस्त

आज के सत्र में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 14 सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए। बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच केवल Nifty IT इंडेक्स ही एकमात्र रक्षक बनकर उभरा और इसमें 0.7% की बढ़त देखी गई। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी तकनीकी शेयरों (Nasdaq) में पिछली गिरावट के बाद भारतीय IT कंपनियों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स

निफ्टी आईटी सूचकांक को मुख्य रूप से HCL Tech और जोमैटो की मूल कंपनी एटर्नल (Eternal) के मजबूत तिमाही प्रदर्शन से सहारा मिला।
सबसे ज्यादा पिटने वाले सेक्टर्स: बढ़ती तेल कीमतों के कारण निफ्टी एनर्जी (Nifty Energy) में भारी बिकवाली हुई। इसके अलावा निफ्टी केमिकल, मीडिया और FMCG सेक्टर्स भी बड़े लैकगार्ड्स (पिछड़ने वाले) साबित हुए।
ब्रॉडर मार्केट का हाल: मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो बेहद कमजोर रहा; कुल कारोबार वाले शेयरों में से लगभग 2,483 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 1,801 शेयरों में तेजी देखी गई।
आज के टॉप गेनर्स (Nifty 50): HCL Tec (+1.7%), JSW Steel, सन फार्मा और एटर्नल लिमिटेड।
आज के टॉप लूजर्स (Nifty 50): मैक्स हेल्थकेयर, कोल इंडिया, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, बजाज फाइनेंस, आईटीसी और एलएंडटी।

तकनीकी विश्लेषण: क्या निफ्टी 24,000 के नीचे जाएगा?

लगातार 7 दिनों की इस गिरावट के कारण निफ्टी ने अपनी पिछली रैली (जो 23,606 से 24,774 तक गई थी) का लगभग 61.8% हिस्सा गंवा दिया है। तकनीकी चार्ट पर यह एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक चरण (Corrective Phase) माना जा रहा है।
तत्काल सपोर्ट (Support Level): बाजार के प्रमुख तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 24,050 से 24,000 का जोन निफ्टी के लिए सबसे बड़ा और बेहद मजबूत मनोवैज्ञानिक सपोर्ट है। आज भी बाजार ने इसी स्तर के पास से बाउंस बैक किया है।
चिंताजनक परिदृश्य: यदि निफ्टी आगामी सत्रों में 24,000 के नीचे निर्णायक रूप से (Decisively) बंद होता है, तो बाजार में ‘शॉर्ट-बिल्डअप’ सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद इंडेक्स सीधे 23,800 से 23,600 के स्तरों की तरफ फिसल सकता है।
प्रतिरोध (Resistance Level): किसी भी संभावित रिकवरी की स्थिति में, निफ्टी को ऊपर की तरफ 24,300 – 24,350 पर पहले कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। जब तक बाजार इस स्तर के ऊपर नहीं टिकता, हर उछाल पर बिकवाली का खतरा बना रहेगा। हालांकि, डेली स्टोकेस्टिक इंडिकेटर (Daily Stochastic) अब 10 के स्तर पर पहुंच चुका है, जो बेहद ‘ओवरसोल्ड’ (Oversold Area) स्थिति को दर्शाता है। इसलिए शॉर्ट-टर्म में एक तकनीकी पुलबैक (Pullback) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह: इस अस्थिरता में क्या करें?

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छे लार्ज-कैप शेयरों को संचित (Accumulate) करने का एक बेहतरीन अवसर हो सकता है। कॉर्पोरेट इंडिया की पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को प्रदर्शित करते हैं। खुदरा निवेशकों को इस समय एकमुश्त (Lumpsum) निवेश करने से बचना चाहिए और अपनी पसंदीदा कंपनियों या निफ्टी 50 इंडेक्स फंड्स में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से धीरे-धीरे पूंजी लगानी चाहिए। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें $85 के नीचे स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।

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