CDSCO का बड़ा खुलासा: 29 जीवन रक्षक दवाएं अमानक, राजधानी में नकली दवा मिलने से हड़कंप

The CSR Journal Magazine

29 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल, दिल्ली में मिली नकली दवा; ड्रग रेगुलेटर का बड़ा एक्शन

देश में आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन रक्षक दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी की गई नवीनतम ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में देश की विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं की जांच में 29 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में पूरी तरह फेल पाए गए हैं। सबसे गंभीर मामला देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां जांच के दौरान एक दवा का सैंपल पूरी तरह से नकली (Spurious) पाया गया है। इसके अलावा, राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली लैब की जांच में भी 191 अन्य सैंपलों को अमानक (Not of Standard Quality) घोषित किया गया है। इस बड़े खुलासे के बाद ड्रग रेगुलेटर ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए संबंधित दवा निर्माता कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं जीवन रक्षक दवाएं

केंद्रीय प्रयोगशालाओं (Central Laboratories) द्वारा देश भर से अलग-अलग दवाओं के सैंपल एकत्र किए गए थे। इन सैंपलों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों और तय मानकों के आधार पर परखा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 29 ऐसी दवाएं हैं जो मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं। इनमें कई ऐसी सामान्य और बेहद जरूरी दवाएं शामिल हैं जिनका इस्तेमाल लोग रोजाना सर्दी, खांसी, बुखार, दर्द, संक्रमण (Infections) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) जैसी बीमारियों के इलाज के लिए करते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई दवा क्वालिटी टेस्ट में फेल होती है, तो इसका मतलब यह होता है कि या तो उसमें सक्रिय दवा सामग्री (API) की मात्रा तय मानक से कम है, या वह दवा शरीर में जाकर सही तरीके से नहीं घुलती। ऐसी दवाएं मरीजों पर बेअसर साबित होती हैं, जिससे बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर रूप ले सकती है।

दिल्ली में नकली दवा मिलने से मचा हड़कंप

इस पूरी रिपोर्ट में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात राजधानी दिल्ली में एक दवा के सैंपल का नकली पाया जाना है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ‘नकली दवा’ उसे माना जाता है जिसे बिना किसी वैध लाइसेंस के, किसी नामी ब्रांड के नाम का गलत इस्तेमाल करके या बिना किसी असरदार सॉल्ट के केवल चाक और मिट्टी जैसी चीजों से तैयार किया जाता है। दिल्ली में इस नकली दवा की खेप मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमे और ड्रग कंट्रोल विभाग में हड़कंप मच गया है। नियामकों ने तुरंत उस बैच की सभी दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है और इस अवैध नेटवर्क के स्रोतों का पता लगाने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

राज्यों की प्रयोगशालाओं में भी 191 सैंपल अमानक

केंद्रीय स्तर पर फेल हुए 29 सैंपलों के अलावा, विभिन्न राज्यों की अपनी सरकारी प्रयोगशालाओं (State Drug Labs) से आई रिपोर्ट भी डराने वाली है। राज्यों की जांच में कुल 191 दवाओं के सैंपल अमानक (NSQ) पाए गए हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाएं और स्थानीय मेडिकल स्टोर्स पर बिकने वाले सिरप, टैबलेट और इंजेक्शन शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में सैंपलों का फेल होना यह दर्शाता है कि दवा निर्माण के स्तर पर कंपनियों द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) में भारी लापरवाही बरती जा रही है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की इस जांच में देश भर की कई प्रमुख दवा कंपनियों की विनिर्माण इकाइयों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अमानक (NSQ) और नकली पाए गए सॉल्ट और दवाइयों के प्रकार मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में शामिल हैं।

अमानक पाए गए सॉल्ट और दवाइयों के प्रकार

प्रयोगशालाओं में परीक्षण के दौरान दवाएं मुख्य रूप से डिसाल्यूशन (घुलनशीलता), कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी (कीटाणुहीनता), पीएच (pH) मान और सक्रिय औषधि तत्व (API) की सही मात्रा न होने जैसे मानकों पर फेल हुई हैं। प्रमुख प्रभावित दवाएं इस प्रकार हैं-
एंटीबायोटिक्स (Antibiotics): संक्रमण और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
हृदय रोग और रक्तचाप (Heart & Blood Pressure): उच्च रक्तचाप (Hypertension) को नियंत्रित करने वाले सॉल्ट।
दर्द एवं बुखार (Painkillers & Antipyretics): सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली बुखार और बदन दर्द की गोलियां।
बच्चों के सीरप (Pediatric Syrups): बच्चों को दी जाने वाली सर्दी, खांसी और संक्रमण की लिक्विड दवाएं।
किडनी और पेट संबंधी दवाएं (Kidney & Gastrointestinal Medicines): एसिडिटी, गैस और पेट के विकारों के इलाज से जुड़े कैप्सूल और टैबलेट।
आंखों के ड्रॉप्स और इंजेक्शन (Eye Drops & Injections): विभिन्न प्रकार के जीवन रक्षक और सामान्य इस्तेमाल वाले स्टेरिलिटी आधारित उत्पाद।
विटामिन और कैल्शियम उत्पाद (Vitamins & Calcium Supplements): शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करने वाली गोलियां।

प्रमुख विनिर्माण क्षेत्र और दवा कंपनियां

नियामक द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, जो दवाएं अमानक पाई गई हैं वे मुख्य रूप से भारत के इन प्रमुख फार्मास्युटिकल हब (औद्योगिक क्षेत्रों) में स्थित कंपनियों में बनाई गई थीं-
हिमाचल प्रदेश (सबसे अधिक 63 सैंपल फेल): बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा की दवा फैक्ट्रियों में निर्मित बैच मानकों पर खरे नहीं उतरे।
उत्तराखंड (39 सैंपल फेल): हरिद्वार, सेलाकुई और पंतनगर जैसे क्षेत्रों में स्थित दवा निर्माण इकाइयां।
गुजरात (17 सैंपल फेल) एवं महाराष्ट्र (16 सैंपल फेल): पश्चिमी भारत के प्रमुख दवा उत्पादक केंद्र।
मध्य प्रदेश (12 सैंपल फेल), तमिलनाडु व हरियाणा (11-11 सैंपल फेल)।
सिक्किम व उत्तर प्रदेश (9-9 सैंपल फेल) और पंजाब (8 सैंपल फेल)।

ड्रग रेगुलेटर का स्पष्टीकरण

ड्रग रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि दवाओं का फेल होना केवल प्रयोगशाला में जांचे गए विशिष्ट ‘बैच नंबर’ तक ही सीमित है, जिसका मतलब यह नहीं है कि उस नाम से बिकने वाली सभी दवाएं खराब हैं। दिल्ली में मिली नकली दवा को अनधिकृत निर्माताओं द्वारा किसी अन्य नामी कंपनी के ब्रांड नाम का गलत इस्तेमाल करके (Spurious) अवैध रूप से बनाया गया था। संबंधित राज्य औषधि नियंत्रकों ने इन सभी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड के ड्रग विभाग इन बैचों को बाजार से वापस ले रहे हैं।

रेगुलेटर की सख्त कार्रवाई: कारण बताओ नोटिस जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग रेगुलेटर ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। जिन कंपनियों के बैच फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर पूछा गया है कि क्यों न उनके निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं। इसके साथ ही, ड्रग निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार से इन फेल और नकली दवाओं के पूरे स्टॉक को तुरंत वापस (Recall) लें, ताकि कोई भी मरीज अनजाने में इनका सेवन न कर सके। नियमों के मुताबिक, अमानक और नकली दवाएं बेचना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है।

मरीजों और डॉक्टरों के लिए क्या हैं निर्देश?

इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है-
बैच नंबर की जांच: मरीज जब भी कोई दवा खरीदें, तो उसके बिल पर लिखे बैच नंबर और एक्सपायरी डेट को ध्यान से देखें।
पक्के बिल की मांग: किसी भी मेडिकल स्टोर से दवा लेते समय हमेशा पक्का जीएसटी (GST) बिल जरूर लें, ताकि किसी गड़बड़ी की स्थिति में विक्रेता की जवाबदेही तय की जा सके।
संदिग्ध पैकेजिंग से बचें: यदि दवा के रैपर की छपाई धुंधली हो या पैकेजिंग संदिग्ध लगे, तो तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर से करें।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि देश में दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा और दोषी कंपनियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो पूरी इंडस्ट्री के लिए एक मिसाल बनेगी।

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