Good News! स्पिरुलिना में मिला एक्टिव Vitamin B12, शाकाहारियों के लिए खुली नई उम्मीद

The CSR Journal Magazine
विटामिन B12 की कमी दुनिया भर में एक बड़ी पोषण संबंधी समस्या है। खासकर शाकाहारी और वीगन लोगों के लिए B12 की पर्याप्त मात्रा हासिल करना चुनौती बन सकता है, क्योंकि इसके प्राकृतिक स्रोत मुख्य रूप से मांस और डेयरी जैसे पशु-आधारित खाद्य पदार्थ हैं। अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या से निपटने की दिशा में एक नई उम्मीद दिखाई है। शोधकर्ताओं ने स्पिरुलिना (Spirulina) को खास तरह की नियंत्रित रोशनी में उगाकर उसमें ऐसा B12 तैयार किया है, जिसे मानव शरीर इस्तेमाल कर सकता है। रिसर्च में इसे Photosynthetically Controlled Spirulina कहा गया है।

सामान्य स्पिरुलिना में क्या थी समस्या?

स्पिरुलिना को लंबे समय से पोषक तत्वों से भरपूर सुपरफूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, खनिज और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन B12 के मामले में इसकी एक बड़ी सीमा थी। पारंपरिक स्पिरुलिना में B12 जैसा दिखने वाला प्स्यूडो-विटामिन B12 पाया जाता है। यह इंसानी शरीर के लिए उपयोगी B12 का सही विकल्प नहीं है। यानी सामान्य स्पिरुलिना खाने से इसे B12 की कमी दूर करने का भरोसेमंद स्रोत नहीं माना जा सकता।

रोशनी बदलकर तैयार किया एक्टिव B12

वैज्ञानिकों ने इसी समस्या को दूर करने के लिए स्पिरुलिना को विशेष फोटोबायोरिएक्टर में उगाया। इसमें रोशनी की मात्रा और परिस्थितियों को नियंत्रित किया गया। इस तकनीक को Photonic Management कहा गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नियंत्रित रोशनी ने स्पिरुलिना के प्राकृतिक मेटाबॉलिक रास्तों को इस तरह प्रभावित किया कि उसमें इंसानी शरीर के लिए उपयोगी बायोलॉजिकली एक्टिव B12 बनने लगा। इस प्रक्रिया में किसी आनुवंशिक बदलाव की जरूरत नहीं बताई गई है।

100 ग्राम स्पिरुलिना में 1.64 माइक्रोग्राम B12

रिसर्च के सबसे महत्वपूर्ण नतीजों में सामने आया कि इस तरह तैयार स्पिरुलिना में प्रति 100 ग्राम करीब 1.64 माइक्रोग्राम एक्टिव B12 पाया गया। तुलना के लिए शोध में बीफ में B12 की मात्रा करीब 0.7 से 1.5 माइक्रोग्राम प्रति 100 ग्राम बताई गई है। यानी नई तकनीक से तैयार स्पिरुलिना में B12 का स्तर बीफ के बराबर या थोड़ा ज्यादा पाया गया। शोध में एक्टिव B12 की मात्रा नौ महीने तक लगातार खेती के दौरान स्थिर रहने की बात भी सामने आई।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है Vitamin B12?

Vitamin B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर एनीमिया और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने बताया है कि B12 की कमी दुनिया भर में एक बड़ी समस्या है और एक वयस्क के लिए सामान्य अनुशंसित मात्रा करीब 2.4 माइक्रोग्राम प्रतिदिन है।

बड़े स्तर पर उत्पादन की भी संभावना

वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाओं का भी अनुमान लगाया है। एक मॉडल के अनुसार अगर आइसलैंड में भारी उद्योगों के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली का कुछ हिस्सा इस उत्पादन में लगाया जाए तो सालाना करीब 2,77,950 टन स्पिरुलिना बायोमास तैयार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक इतनी मात्रा से करीब 4,555 ग्राम एक्टिव B12 सालाना प्राप्त हो सकता है, जो 1 से 3 वर्ष की उम्र के 1.38 करोड़ से ज्यादा बच्चों की अनुशंसित दैनिक जरूरत पूरी करने के बराबर हो सकता है। हालांकि ये आंकड़े मौजूदा उत्पादन नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर उत्पादन की संभावनाओं पर आधारित अनुमान हैं।

पर्यावरण के लिहाज से भी अहम

इस खोज की खासियत सिर्फ B12 तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक नियंत्रित वातावरण में स्पिरुलिना का उत्पादन कम जमीन और पानी में किया जा सकता है। अगर इसे नवीकरणीय ऊर्जा के साथ जोड़ा जाए तो उत्पादन को कार्बन-न्यूट्रल बनाने की संभावना भी है। इससे भविष्य में पशु-आधारित खाद्य स्रोतों पर पोषण संबंधी निर्भरता कम करने और टिकाऊ खाद्य व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है।

अभी बाजार में मिलने वाली स्पिरुलिना से नहीं भरें B12 की कमी

इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि बाजार में मिलने वाली सामान्य स्पिरुलिना अब Vitamin B12 की कमी का इलाज बन गई है। मूल अध्ययन एक exploratory in-vitro study है और नई तकनीक को बड़े पैमाने पर खाद्य उत्पादन में इस्तेमाल करने से पहले आगे के अध्ययन जरूरी हैं। मूल शोधपत्र Discover Food में 7 अगस्त 2024 को प्रकाशित हुआ था। अगस्त 2026 में इस शोध के निष्कर्षों को फिर से चर्चा मिली है। इसलिए इसे “नई खोज” कहने के बजाय “नई चर्चा में आई वैज्ञानिक खोज” कहना ज्यादा सटीक होगा।

शाकाहारियों के लिए क्यों बड़ी उम्मीद है?

अगर इस तकनीक को सुरक्षित और बड़े स्तर पर इस्तेमाल के योग्य बनाया जाता है, तो भविष्य में एक्टिव B12 का एक टिकाऊ, गैर-पशु आधारित स्रोत तैयार हो सकता है। फिलहाल यह एक promising scientific development है, लेकिन इसे आम लोगों के लिए B12 सप्लीमेंट का तत्काल विकल्प मानना सही नहीं होगा।

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