क्या नितिन नबीन ने सावन में खाया मांस? वायरल वीडियो पर बीजेपी की सफाई, बताया थाली में क्या-क्या था

The CSR Journal Magazine
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सावन के महीने में मांसाहार किया। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाते हुए एक वायरल वीडियो साझा किया, जिसमें नबीन का भोजन करते हुए दृश्य दिखाया गया है। ऐसे में राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

बीजेपी की सफाई

इस आरोप के चलते बीजेपी ने अपनी सफाई दी है और यह बताया है कि विशाखापत्तनम में खाया गया भोजन पूरी तरह से शाकाहारी था। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि नबीन की थाली में कटहल की शाकाहारी करी थी। इस मुद्दे पर बीजेपी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए हैं, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि भोजन में क्या-क्या था।

क्या था थाली में?

बीजेपी के अनुसार, नीतिन नबीन की थाली में केवल पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन थे, जैसे कि कटहल, सोयाबीन, और पनीर की सब्जी। इसके साथ ही मूंग दाल के पकौड़े भी दिए गए थे। बीजेपी ने इसको लेकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला है और कहा है कि यह केवल राजनीति का एक हिस्सा है।

विपक्ष का जवाब

विपक्ष का कहना है कि नाबीन का मांसाहार करना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। समाजवादी पार्टी ने नबीन की तस्वीरों को रिट्वीट करते हुए लिखा, “क्या बीजेपी अध्यक्ष सावन के दिनों में मांस खा सकते हैं? यह बिल्कुल गलत है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।” यह बयान सियासी हिंसात्मकता को और बढ़ा सकता है।

बीजेपी प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

बीजेपी की मीडिया पैनलिस्ट और युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नेहा जोशी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूसरों के खाने पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इसे लेकर एक जानकार का नजरिया पेश किया। इस तरह की टिप्पणियों से केवल झगड़ा बढ़ता है और इससे धर्म और संस्कृति का अपमान होता है।

क्या है समाजवादी पार्टी की बुनियाद?

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह भारतीय संस्कृति और परंपरा के खिलाफ जा रही है। उन्होंने कहा कि नितिन नबीन का ऐसा व्यवहार देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को आहत कर सकता है। इस बात पर लोगों में चिंतन और चर्चा बढ़ी है कि क्या नेताओं को ऐसे विषयों पर ध्यान देना चाहिए या नहीं।

शांत करने की कोशिशें

इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी अपनी सफाई प्रस्तुत की है। विधायक राम प्रताप वर्मा ने इस मामले में विपक्ष पर फैक्ट चेक करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति का एक हिस्सा है और इसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। परिषद की यह स्थिति इस समय सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर रही है। भले ही यह मामला अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन यह एक नया मोड़ है जो सियासी माहौल को प्रभावित कर सकता है। सभी पार्टी की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं क्योंकि यह विषय अभी समाप्त नहीं हुआ है।

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