RBI ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए उठाए बड़े कदम, जानिए क्या है यह पूरा मामला
रुपये को रिकॉर्ड ऐतिहासिक गिरावट से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बेहद असाधारण और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को सीधे अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से डॉलर मुहैया कराने के लिए एक विशेष विंडो (Special Window) शुरू करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है।
आरबीआई का यह फैसला सोमवार (12 अक्टूबर 2026) से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू मुद्रा बाजार (Forex Market) पर से डॉलर की मांग के भारी दबाव को कम करना और रुपये में जारी तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत?
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी आर्थिक संकटों के चलते बीते कुछ सत्रों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर चौतरफा दबाव देखा जा रहा है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को घरेलू मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96.73 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट रुपये को मई 2026 में दर्ज किए गए उसके अब तक के सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर 96.96 प्रति डॉलर के बेहद करीब ले आई है। यदि केंद्रीय बैंक इस समय आक्रामक दखल नहीं देता, तो रुपया इस मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर जाता। विदेशी मुद्रा डीलरों और बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार खुलने से ठीक पहले भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरबीआई की तरफ से बाजार में उतरकर भारी मात्रा में डॉलर बेचे थे, जिससे रुपये को 97 के पार जाने से रोका जा सका।
रुपये पर दबाव बनाने वाले 5 प्रमुख वैश्विक कारण
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में केंद्रीय बैंक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा समय में रुपये की कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:
1. पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: ईरान युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 103 से 104 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल कंपनियों को भुगतान के लिए भारी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है।
2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की भारी बिकवाली: भारतीय शेयर बाजार और उभरते बाजारों (Emerging Markets) से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे देश से डॉलर बाहर जा रहा है।
3. मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड: अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड (US 10-Year Bond Yield) में भारी उछाल आया है और डॉलर इंडेक्स अपने 17 महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।
4. ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव: हाल ही में आरबीआई ने भी बढ़ती मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए अपनी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपना रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (Calibrated Tightening) में बदल दिया है।
5. आयातकों द्वारा अत्यधिक हेजिंग: डेटा के अनुसार, भारतीय आयातकों ने बाजार में डॉलर की कमी की आशंका के चलते बड़े पैमाने पर फॉरवर्ड हेजिंग की है, जिससे हाजिर बाजार में डॉलर की मांग और ज्यादा बढ़ गई है।
विशेष तेल विंडो (Oil Window) कैसे करेगी काम?
भारत में डॉलर की सबसे बड़ी मांग सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) की तरफ से आती है, क्योंकि उन्हें कच्चे तेल के आयात के लिए हर महीने अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। जब ये कंपनियां डॉलर खरीदने के लिए खुले बाजार (Interbank Forex Market) में उतरती हैं, तो अचानक डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया तेजी से टूटने लगता है।
अब आरबीआई की इस नई व्यवस्था के तहत, ये तीनों तेल कंपनियां खुले बाजार से डॉलर न खरीदकर सीधे रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर ले सकेंगी।
• बाजार पर दबाव होगा खत्म: तेल कंपनियों के हटने से खुले बाजार में डॉलर की अचानक आने वाली भारी-भरकम मांग समाप्त हो जाएगी।
• सट्टेबाजी पर लगाम: बाजार में डॉलर की कृत्रिम कमी दिखाकर मुनाफा कमाने वाले सटोरियों (Speculators) के हौसले पस्त होंगे।
• सीमित दायरे में रहेगा रुपया: आरबीआई का उद्देश्य रुपये को किसी एक निश्चित स्तर पर टिकाना नहीं, बल्कि बाजार में होने वाले अत्यधिक और अनियंत्रित उतार-चढ़ाव को रोकना है ताकि आम जनता और व्यापार पर इसका सीधा बोझ न पड़े।
गवर्नर संजय मल्होत्रा का मानना है कि भारतीय रुपया अपनी वास्तविक वैल्यू से कुछ कम (Undervalued) आंका जा रहा है और जैसे ही वैश्विक तनाव कम होगा, मुद्रा में दोबारा मजबूती देखने को मिलेगी। फिलहाल आरबीआई के इस मास्टरस्ट्रोक ने गिरते रुपये को थामने के लिए बाजार को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है।
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