Rahul Gandhi का आरोप: टाटा को बर्बाद किया जा रहा है, वित्त मंत्री Sitharaman ने दी सफाई

The CSR Journal Magazine
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय उद्योग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि टाटा ग्रुप को एक आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है। राहुल ने अपने बयान में कहा कि कोई भी बिजनेस लीडर इस मुद्दे पर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “इंडियन बिजनेस सरकार का खिलौना नहीं है। हम इन अपराधों का इंसाफ करेंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब टाटा ग्रुप में आंतरिक विवाद चल रहा है।

सीतारमण का जवाब: राजनीति न करें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें हर मामले का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए। सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार भारतीय उद्योग को रोजगार देने वाला और आर्थिक विकास का आधार मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियां उद्योग को बढ़ावा देने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई हैं।

कांग्रेस पर निशाना: लाइसेंस-कोटा राज का जिक्र

सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने दशकों तक ‘लाइसेंस-कोटा राज’ के जरिए भारतीय उद्यमियों की भावना को दबाए रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने करोड़ों भारतीयों को गरीबी में धकेला। उनका कहना था कि सभी राजनीतिक दलों और संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे उद्योग का समर्थन करें और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करें।

टाटा संस में विवाद: एन चंद्रशेखरन का री-अपॉइंटमेंट

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे 5 साल के एक्सटेंशन को चुनौती दी है। नोएल ने आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी की गई है और वोटिंग नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी को पत्र लिखकर 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग का रिकॉर्ड मांगा है।
नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी को एक लेटर लिखा है जिसमें उन्होंने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग के फैसले को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस मीटिंग में एन चंद्रशेखरन का री-अपॉइंटमेंट प्रस्ताव स्पष्ट रूप से नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि मीटिंग के दौरान जरूरी वोटिंग प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला

नोएल टाटा ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए कहा कि टाटा संस के डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन और एन चंद्रशेखरन के बीच व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इस संभावित टकराव के बावजूद श्रीनिवासन को चर्चा और वोटिंग में भाग लेना चाहिए था।

दस्तावेजों की मांग: क्या मांगे गए हैं रिकॉर्ड्स?

नोएल टाटा ने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग, मीटिंग के फाइनल मिनट्स और वोटिंग रिकॉर्ड की मांग की है। उन्होंने कहा है कि ये रिकॉर्ड्स 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएं। इससे पहले भी उन्होंने इसी मुद्दे पर दो पत्र लिखे थे, लेकिन टाटा संस ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया।

क्या हो सकता है आगे?

नोएल टाटा ने सभी रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका पत्र टाटा संस की ऑडिट कमेटी के सामने विचार के लिए रखा जा सकता है। यह मामला अब टाटा संस में और भी जटिल होता जा रहा है, और सभी की नजरें इस पर टिकी हुई हैं।

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