UPITS 2026: पूर्वांचल के लिट्टी-चोखा से रामकटोरी तक, UPITS में दिखेगा यूपी का देसी स्वाद

The CSR Journal Magazine
पूर्वी उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्वाद को अब बड़ा मंच मिलने जा रहा है। गोरखपुर मंडल के मशहूर देसी पकवान ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) में देश-विदेश से आने वाले लोगों को अपनी खुशबू और स्वाद से रूबरू कराएंगे। खास बात यह है कि इस आयोजन में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के पारंपरिक व्यंजनों के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक यूपीआईटीएस का आयोजन होना है। इसमें ओडीओसी यानी एक जनपद एक व्यंजन योजना के तहत चयनित पूर्वांचल के खास पकवानों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका मकसद स्थानीय खानपान को बड़े बाजार तक पहुंचाने के साथ कारोबारियों को नए ग्राहक और बाजार उपलब्ध कराना है।

लिट्टी-चोखा से रामकटोरी तक लगेगा स्वाद का तड़का

UPITS 2026 के फूड कोर्ट में गोरखपुर मंडल के व्यंजनों के लिए अलग क्लस्टर तैयार किया जा रहा है। यहां गोरखपुर का लिट्टी-चोखा और लहसुन वाले छोले-समोसे, महराजगंज की रामकटोरी, कुशीनगर का लाल पेड़ा, छेना खुरमा और केले के चिप्स तथा देवरिया का लिट्टी-चोखा और मालपुआ लोगों को चखने के लिए मिलेगा। लिट्टी-चोखा पूर्वांचल की पहचान से जुड़ा पारंपरिक भोजन है। सत्तू, अजवाइन, मंगरैल और सरसों के तेल से तैयार मसालेदार भरावन वाली लिट्टी को कंडे की आंच पर पकाया जाता है। इसके बाद देसी घी के साथ बैंगन, टमाटर और आलू के भुने चोखे के साथ परोसा जाता है। वहीं गोरखपुर का लहसुन वाला छोला समोसा भी अपने अलग स्वाद के लिए पहचान बना रहा है। छोले में भरपूर मात्रा में साबुत लहसुन का इस्तेमाल इसे सामान्य छोले से अलग स्वाद देता है। दूसरी तरफ कुशीनगर का लाल पेड़ा और छेना से तैयार खुरमा तथा महराजगंज के मिठौरा बाजार की रामकटोरी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

UPITS 2026: छह कारोबारियों को मिला यूपीआईटीएस में मौका

इस आयोजन के लिए गोरखपुर मंडल से कुल छह कारोबारियों का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर से चंद्रकेश प्रजापति और गंगाधर दूबे, महराजगंज से सुदीस कुमार, देवरिया से वेद प्रकाश राय और कुशीनगर से सन्नी मद्देशिया व अनुराग तिवारी शामिल हैं। गंगाधर दूबे, जो यूपीआईटीएस में लिट्टी-चोखा का स्टॉल लगाएंगे, के मुताबिक इस पहल से पूर्वांचल के पारंपरिक खानपान को नई पहचान मिलेगी। वहीं लहसुन वाले छोले-समोसे का स्टॉल लगाने वाले चंद्रकेश प्रजापति का मानना है कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण और कस्बाई स्तर पर काम करने वाले कारोबारियों को भी बड़े बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

पूर्वांचल के स्वाद को क्यों है यह मंच खास?

यूपीआईटीएस में इन व्यंजनों की मौजूदगी सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पूर्वांचल की पारंपरिक खानपान संस्कृति को देश और विदेश से आने वाले खरीदारों, कारोबारियों और पर्यटकों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय पकवानों को बड़े बाजार से जोड़ने से छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर भी बन सकते हैं। पूर्वी यूपी का स्वाद अब सिर्फ स्थानीय बाजारों, दुकानों और ढाबों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर यूपीआईटीएस के जरिए इन पारंपरिक व्यंजनों को नए ग्राहक मिलते हैं, तो इससे पूर्वांचल की खाद्य संस्कृति के साथ स्थानीय कारोबार को भी नई पहचान मिल सकती है।

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