पंजाब में ग्राउंडवाटर संकट धीरे-धीरे दूर होने लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इस दशकों पुरानी समस्या पर नियंत्रण पाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने बताया कि अब नारेबाजी की बजाय सही योजना, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नहर के पानी का विवेकपूर्ण उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में जल संकट से राहत मिल रही है।
नहरों के उपयोग में बढ़ोतरी, संकट में कमी
बलतेज पन्नू ने कहा कि ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में नहर के पानी का उपयोग 80% से 82% तक पहुंच गया है। पिछले साल यह आंकड़ा मात्र 21% था। पिछले चार वर्षों में, सरकार ने 14,100 नहरों को चालू किया, 400 किलोमीटर से ज्यादा बंद नहरों को पुनः स्थापित किया और एक हजार किलोमीटर नहरों का पक्का निर्माण किया है। साथ ही, ग्राउंडवाटर के रिचार्ज के लिए नये पॉइंट भी बनाए गए हैं।
जल स्तर में सुधार का गहरा प्रभाव
बलतेज ने यह भी बताया कि ग्राउंडवाटर निकालने का स्तर 2021-22 में 163.80% से घटकर 2025 में 156.36% और 2025-26 में 152.22% हो गया है। यह 11.58 प्रतिशत पॉइंट्स की कमी दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पंजाब में स्थित जल संकट की समस्या को सुलझाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
मुल्यांकन ब्लॉक्स में सुधार की उम्मीद
पंजाब के ग्राउंडवाटर मुल्यांकन में भी सुधार के संकेत मिले हैं। बलतेज ने बताया कि 153 डार्क-ज़ोन ब्लॉक्स में से 95 में सुधार हो चुका है, जबकि गंभीर ब्लॉक्स की संख्या 10 से घटकर 6 हो गई है। इस सकारात्मक बदलाव से यह स्पष्ट है कि पंजाब के जल संकट को कम किया जा रहा है और कई ब्लॉक्स अब सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं।
बारिश और नहर के पानी का योगदान
पंजाब में कुल सालाना ग्राउंडवाटर रिचार्ज 19.14 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जिसमें बारिश से 5.53 बिलियन क्यूबिक मीटर और नहर के पानी से 5.5 बिलियन क्यूबिक मीटर शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि कृषि में ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
भविष्य में और सुधार की आवश्यकता
हालांकि, बलतेज पन्नू ने माना कि पंजाब को अभी भी ग्राउंडवाटर के संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नए मूल्यांकनों से पता चलता है कि ग्राउंडवाटर निकालने में कमी आई है, लेकिन और भी बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो परिणाम देखने को मिल रहे हैं, वे आत्मसंतोष का कारण नहीं बनने चाहिए, बल्कि इन्हें आगे के सुधारों के लिए प्रेरणा बनाना चाहिए।