Swara Bhasker के जौहर वाले बयान पर Priyanka Chaturvedi का पलटवार, बोलीं- फेमिनिज्म नाटक नहीं

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: भारतीय फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने हाल ही में भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना ‘जौहर’ को जिस तरीके से पेश किया, उस पर काफी विवाद खड़ा हो गया है। स्वरा की टिप्पणियां आलोचकों के निशाने पर आ गई हैं और उन्होंने अपने बयान को सही ठहराने की कोशिशें की हैं। इस बीच, शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक लेख के जरिए स्वरा के विचारों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चतुर्वेदी ने पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से स्वरा की राय पर सवाल उठाए थे। अब उन्होंने ‘जौहर’, सती और बलात्कार को एक समान वर्ग में रखने वाली स्वरा की सोच पर हमला किया है।

फेमिनिज्म का मूल उद्देश्य

प्रियंका चतुर्वेदी ने विशेष रूप से कहा कि ‘फेमिनिज्म का मतलब महिलाओं को यह बताना नहीं है कि उनकी सही पसंद क्या है।’ उनका मानना है कि महिलाओं को ऐसे विकल्प मिलने चाहिए जिनसे वे अपनी जिंदगी और गरिमा के बीच चुनाव न करें। प्रियंका ने कहा कि यह उचित नहीं है कि समाज महिलाओं की पसंद को लेकर पूर्वाग्रहित हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक महिला की अपनी मर्जी से फैसला लेने की क्षमता केवल इसलिए खत्म नहीं हो सकती क्योंकि हमें उसका फैसला पसंद नहीं आता।

यजीदी महिलाओं का जिक्र

प्रियंका ने यजीदी महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में इराक के सिंजार में हुई त्रासदी के दौरान कई यजीदी महिलाओं ने अपनी मौत को गले लगाना चुना। उन्होंने कहा कि यह विकल्प उन्हें नासमझी से नहीं मिला था, बल्कि एक भयानक स्थिति में उनकी कमजोरी को दिखाता है। प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि हम हमेशा इतिहास में महिलाओं के शरीर से जुड़ी प्रथाओं को ‘पितृसत्ता’ की श्रेणी में क्यों रख देते हैं, इससे हम इतिहास की सही समझ को खो देते हैं।

स्त्री की वास्तविक स्वतंत्रता

पूर्व सांसद प्रियंका ने कहा कि ‘महिलाओं पर अपनी पसंद थोपना असली फेमिनिज्म नहीं है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें एक ऐसी दुनिया के लिए लड़ना चाहिए जहां महिलाओं के पास अपने विकल्प हों। ऐसी दुनिया में, उन्हें अपनी गरिमा और जीवन के बीच चुनाव करने की जरूरत न पड़े। प्रियंका ने यह भी कहा कि जौहर और यजीदी महिलाओं के मामले की त्रासदी यह नहीं है कि उन्होंने मौत चुनी, बल्कि यह है कि उनके पास एक ही अत्यंत भयानक विकल्प था।

हमलावरों की मानसिकता पर सवाल

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ‘सवाल महिलाओं का नहीं, बल्कि ऐसे हमलावरों की मानसिकता का होना चाहिए जो महिलाओं को औसत की खुशी के लिए संपत्ति मानते थे।’ उन्होंने इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि समाज को महिलाओं की पसंद को पुनर्कल्पित करने के बजाय हमलावरों की मानसिकता को चुनौती देनी चाहिए। यह बहस सिर्फ जौहर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक मुद्दा है जिस पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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