PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, LoC हटाने और पुंछ-मेंढर के रास्ते खोलने की मांग; 25 हजार लोगों के जुटने का दावा
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ चल रहा विरोध अब एक नए चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। 26 सितंबर 2026 को LoC के करीब स्थित मंढोल गांव में आयोजित एक बड़ी रैली में आयोजकों की ओर से करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केवल स्थानीय सुविधाओं और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर ही नाराजगी नहीं जताई, बल्कि LoC को समाप्त करने, सीमा पर लगी बाड़ हटाने और भारत के जम्मू-कश्मीर के पुंछ तथा मेंढर से पुराने संपर्क मार्ग फिर खोलने की मांग भी उठाई।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब PoK में 9 जून से जारी आंदोलन कई महीनों से पाकिस्तान सरकार और प्रशासन के खिलाफ असंतोष का मंच बना हुआ है। मंढोल की रैली में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) से जुड़े नेता सरदार अमान खान ने भीड़ के सामने LoC और भारत से पुराने संपर्क बहाल करने को लेकर सवाल रखे। रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ ने इन मांगों के समर्थन में एकजुट होकर जवाब दिया।
LoC खत्म करने की मांग क्यों उठी?
मंढोल गांव LoC से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है। ऐसे में यहां आयोजित प्रदर्शन का प्रतीकात्मक और भौगोलिक महत्व भी है। रैली में यह मांग सामने आई कि LoC को खत्म किया जाए और सीमा पर मौजूद बाड़ हटाई जाए, ताकि दोनों ओर के लोगों के बीच पुराने सामाजिक और पारिवारिक संपर्क फिर बहाल हो सकें। सरदार अमान खान ने प्रदर्शनकारियों से पूछा कि क्या सीजफायर लाइन को समाप्त किया जाना चाहिए, क्या LoC पर लगी बाड़ हटाने की मांग को लेकर धरना दिया जाना चाहिए और क्या पुंछ तथा मेंढर के पुराने रास्ते दोबारा खोले जाने चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ ने इन सवालों पर समर्थन जताया। अमान खान ने यह भी कहा कि आने वाले समय में LoC की बाड़ के पास धरना देने की योजना है।
पुंछ-मेंढर से पुराने संपर्क का मुद्दा
पुंछ और मेंढर जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके हैं और इनका PoK से ऐतिहासिक सामाजिक संपर्क रहा है। विभाजन और बाद के संघर्षों ने इस पूरे क्षेत्र में पारंपरिक आवाजाही और पारिवारिक संपर्कों को प्रभावित किया। LoC बनने के बाद सीमा के दोनों ओर रहने वाले अनेक परिवार अलग-अलग हो गए और नियमित आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लग गए। मंढोल की रैली में पुराने रास्तों को खोलने की मांग इसी ऐतिहासिक संपर्क को फिर से स्थापित करने की मांग के रूप में सामने आई। प्रदर्शनकारियों के बीच यह मुद्दा केवल आवागमन का नहीं, बल्कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के सामाजिक और पारिवारिक संबंधों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी रैली में उठाई गई मांग और उसे लागू किया जाना दो अलग-अलग बातें हैं। LoC भारत और पाकिस्तान के बीच अत्यंत संवेदनशील सैन्य सीमा है। इसलिए सीमा व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव का सवाल सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंधों और संबंधित सरकारों के निर्णयों से जुड़ा होगा।
पाकिस्तान सरकार और सेना पर निशाना
मंढोल की सभा में पाकिस्तान की सेना और प्रशासन के खिलाफ भी आरोप लगाए गए। अमान खान ने पाकिस्तान की सेना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संघर्ष के दौरान स्थानीय लोगों ने सैनिकों की मदद की, लेकिन बाद में आंदोलन के दौरान इन्हीं लोगों को निशाना बनाया गया। ये प्रदर्शनकारी नेता के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि अमान खान ने PoK में आवश्यक वस्तुओं और राशन की आपूर्ति को लेकर गंभीर समस्याओं का आरोप लगाया। हालांकि, इन दावों को भी प्रदर्शनकारी पक्ष के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
तीन महीने से चल रहे आंदोलन का नया चरण
मंढोल की रैली को PoK में पिछले कई महीनों से चल रहे व्यापक आंदोलन की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, 9 जून से जारी इस आंदोलन में स्थानीय आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों के साथ-साथ पाकिस्तान के शासन और सैन्य भूमिका को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया है। मंढोल में हुई सभा ने इस आंदोलन में LoC और भारत से पुराने संपर्कों का मुद्दा प्रमुखता से सामने ला दिया। इससे पहले भी PoK के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन और रैलियां हुई हैं। मंढोल की सभा की खासियत यह रही कि यहां स्थानीय समस्याओं के साथ क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और LoC की मौजूदा व्यवस्था पर सीधे सवाल उठाए गए।
भारत से जुड़ने की मांग को लेकर क्या कहा गया?
मंढोल रैली से जुड़ी कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों द्वारा भारत के जम्मू-कश्मीर के साथ दोबारा संपर्क स्थापित करने और यहां तक कि भारत के साथ जुड़ने की मांग किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में इस मांग को अलग शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। उपलब्ध प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग में सबसे स्पष्ट रूप से LoC हटाने, बाड़ हटाने और पुंछ-मेंढर के पुराने रास्ते खोलने की मांग दर्ज है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को सावधानी से देखना जरूरी है जिनमें रैली को सीधे तौर पर PoK के भारत में विलय के लिए निर्णायक जनमत के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी एक रैली में लगाए गए नारों या व्यक्त किए गए समर्थन को पूरे PoK की आबादी की सामूहिक राय मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
आंदोलन का अगला कदम क्या?
मंढोल की सभा में LoC की बाड़ के पास धरना देने की बात कही गई है। यदि ऐसा प्रदर्शन सीमा के बेहद नजदीक होता है तो सुरक्षा की दृष्टि से यह अत्यंत संवेदनशील स्थिति बन सकती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि आगे प्रस्तावित धरना कब और किस स्वरूप में होगा तथा प्रशासन या सुरक्षा बल उसकी अनुमति देंगे या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि PoK में चल रहे असंतोष के बीच अब LoC और भारत के साथ पुराने संपर्कों का सवाल भी सार्वजनिक आंदोलनों का हिस्सा बन गया है। मंढोल में हजारों लोगों की मौजूदगी के दावे और LoC हटाने की मांग ने इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है।
PoK में जारी संघर्ष
कुल मिलाकर, मंढोल की रैली PoK में जारी असंतोष के उस बदले हुए स्वरूप को सामने लाती है जिसमें आर्थिक और प्रशासनिक मांगों के साथ अब LoC, सीमा की बाड़ और भारत के पुंछ-मेंढर से पुराने संपर्कों की बहाली जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित LoC धरना आगे बढ़ता है या नहीं और पाकिस्तान प्रशासन इस बढ़ते दबाव का किस तरह जवाब देता है।
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