भारत की अग्नि-5 और ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान में खलबली; रक्षा विशेषज्ञों ने उठाए भारत की नई सैन्य रणनीति पर सवाल
भारत की लगातार बढ़ती मिसाइल क्षमता और अत्याधुनिक सैन्य आधुनिकीकरण ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के रणनीतिक गलियारों में गहरा तनाव पैदा कर दिया है। हाल के वर्षों में भारतीय सेना द्वारा किए गए सफल ऑपरेशनों और उन्नत तकनीकों के प्रदर्शन के बाद, पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य सलाहकारों के बीच भारत की नई रक्षा प्रणालियों—विशेषकर अग्नि-5 (Agni-V) बैलिस्टिक मिसाइल और ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को लेकर गंभीर चिंताएँ और सवाल उठने लगे हैं।
पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक डॉ. राशिद वली जंजुआ ने प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्मों और पूर्व सैन्य कमांडरों के बयानों में यह आरोप लगाया है कि भारत क्षेत्र में ‘परमाणु उन्माद’ को बढ़ावा दे रहा है और पाकिस्तान के रणनीतिक प्रतिरोध (Strategic Deterrence) को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सुरक्षा थिंक टैंकों का मानना है कि भारत की मिसाइलों की असाधारण गति, अचूक मारक क्षमता और नई ‘रुद्र ब्रिगेड’ के गठन ने दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को पूरी तरह से भारत के पक्ष में झुका दिया है।
अग्नि-5 और एमआईआरवी (MIRV) तकनीक: पाकिस्तान की मुख्य चिंता
भारत की अग्नि-5 मिसाइल पाकिस्तान के सैन्य योजनाकारों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है। अग्नि-5 एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है। हाल ही में भारत द्वारा इस मिसाइल का सफल परीक्षण मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक के साथ किया गया था, जिसे ‘मिशन दिव्यास्त्र’ नाम दिया गया था। MIRV तकनीक का मतलब है कि एक ही मिसाइल अपने साथ कई परमाणु या पारंपरिक वॉरहेड (बम) ले जा सकती है और आसमान से अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ सटीक निशाना साध सकती है। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक स्ट्रैटेजिक विजन इंस्टीट्यूट (SVI) ने शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख को चेतावनी दी है कि अग्नि-5 की इस बहु-वारहेड क्षमता के कारण पाकिस्तान का कोई भी कोना अब सुरक्षित नहीं बचा है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक रूप से भारत ‘नो फर्स्ट यूज़’ (NFU यानी पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने) के सिद्धांत का पालन करता आया है, लेकिन अग्नि-5 के आधुनिक संस्करणों के आने के बाद भारत बिना अपनी इस नीति को तोड़े पाकिस्तान के गहरे भूमिगत सैन्य ठिकानों और परमाणु बंकरों को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता हासिल कर चुका है। इस क्षमता को ‘बंकर-बस्टर’ तकनीक भी कहा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान और चीन के अंडरग्राउंड सैन्य ठिकाने भी सीधे निशाने पर आ गए हैं।
ब्रह्मोस पर पाकिस्तानी विशेषज्ञों का ‘फैक्ट चेक’ और लाचारी
अग्नि-5 के साथ-साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defence Systems) की पोल खोल दी है। पाकिस्तानी वायुसेना के पूर्व एयर कोमोडोर आदिल सुल्तान और रक्षा विश्लेषक इकरामुल्लाह भट्टी जैसे विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी मीडिया प्लेटफॉर्मों पर खुले तौर पर स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी कोई एयर डिफेंस प्रणाली नहीं है जो भारत की हवा से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों को रोकने में सक्षम हो। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल की गति लगभग मैक 3 (ध्वनि की गति से तीन गुना तेज) है। हवा से दागे जाने वाले इसके संस्करण (BrahMos-A) की वजह से दुश्मन को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का ‘रिएक्शन टाइम’ न के बराबर मिलता है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने यह भी स्वीकार किया कि अत्यधिक गति और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के कारण इस मिसाइल को 100 फीसदी इंटरसेप्ट करना अमेरिका, रूस या चीन जैसी महाशक्तियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, पाकिस्तानी रक्षा गलियारों में ब्रह्मोस को लेकर कुछ भ्रांतियां भी फैलाई जा रही हैं। डॉ. राशिद वली जंजुआ जैसे कुछ विशेषज्ञों ने अपने लेखों में ब्रह्मोस को परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइल बताया है, जबकि सैन्य विश्लेषकों ने इसका फैक्ट चेक करते हुए साफ किया है कि ब्रह्मोस पूरी तरह से एक पारंपरिक (Conventional) हथियारों से लैस क्रूज मिसाइल है, न कि परमाणु मिसाइल। इसके बावजूद, इसकी अचूक परिशुद्धता (Pinpoint Accuracy) ही इसे पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बनाती है।
ऑपरेशन सिंदूर और भारत का नया रुख
पाकिस्तान की इस ताजा बौखलाहट के पीछे हालिया सैन्य घटनाक्रम और भारत की ‘रुद्र ब्रिगेड’ का खौफ भी शामिल है। पाकिस्तानी रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने अत्यधिक आक्रामक और सटीक रुख अपनाते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) के पार आतंकी बुनियादी ढांचों पर कड़े प्रहार किए थे। इस ऑपरेशन में भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों और वायुसैनिक मारक क्षमता के रणनीतिक इस्तेमाल ने पाकिस्तान के सैन्य अड्डों और एयर डिफेंस को पूरी तरह पंगु बना दिया था।
पाकिस्तानी जनरलों और सलाहकारों का आरोप है कि भारत अब पाकिस्तान की पुरानी रणनीति ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग’ (यानी आतंकी हरकतों के बदले परमाणु युद्ध की धमकी देना) को पूरी तरह से खारिज कर चुका है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा, भले ही पाकिस्तान अपने परमाणु विकल्प खुले रखने की बात करता रहे।
दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन का बदलना
पाकिस्तानी विशेषज्ञों की मुख्य चिंता यह है कि भारत की मिसाइल तकनीक में यह क्रांतिकारी विकास केवल पाकिस्तान केंद्रित नहीं है, बल्कि यह चीन के सैन्य आधुनिकीकरण का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन भौगोलिक निकटता के कारण पाकिस्तान इसका पहला शिकार बनता दिख रहा है। भारत जहां एक तरफ अग्नि-6 (10,000+ किमी रेंज) और ‘प्रलय’ जैसी मिसाइलों के साथ-साथ ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत अपना खुद का उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है, वहीं पाकिस्तान तकनीकी और आर्थिक रूप से इस दौड़ में काफी पिछड़ गया है। पाकिस्तान के पास भारत के इस बहुस्तरीय मिसाइल नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तानी विशेषज्ञों द्वारा अग्नि-5 और ब्रह्मोस पर उठाई जा रही चिंताएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ लॉबिंग करने और खुद को पीड़ित दिखाने की एक पुरानी रणनीतिक कोशिश भी हो सकती हैं। लेकिन सैन्य दृष्टिकोण से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक और ‘मिशन दिव्यास्त्र’ जैसी रणनीतिक सफलताओं ने पाकिस्तान के सैन्य अहंकार और उसकी परमाणु धमकियों को पूरी तरह बेअसर कर दिया है। आने वाले समय में भारत की यह सैन्य श्रेष्ठता दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से री-डिफाइन करने वाली है।
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