प्याज की कीमतों में 76% उछाल, अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ रही महंगाई?

The CSR Journal Magazine
प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र की नासिक मंडी में प्याज का थोक भाव एक महीने में करीब 76 फीसदी बढ़कर 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है। दूसरी ओर, देश में प्याज का औसत खुदरा भाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में रसोई के बजट पर इसका असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।

नासिक मंडी में एक महीने में 76 फीसदी उछाल

नासिक मंडी में 23 जुलाई के आसपास प्याज का भाव करीब 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था। 21 अगस्त तक यह 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया। यानी एक महीने के भीतर थोक कीमत में करीब 76 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। देश के औसत खुदरा भाव में भी तेजी दर्ज की गई है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा मूल्य करीब 40.72 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि एक महीने पहले यह लगभग 34.87 रुपये प्रति किलो था।

प्याज महंगा होने की तीन बड़ी वजह

प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह खरीफ फसल की आवक में देरी बताई जा रही है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बोआई करीब 15 दिन देर से हुई है। कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी बोआई की प्रगति सामान्य से कम रहने की जानकारी है। इससे नई फसल बाजार में आने में समय लग सकता है। दूसरी वजह रबी प्याज की कमजोर होती आवक है। अगस्त-सितंबर में रबी प्याज का भंडार धीरे-धीरे कम होता है, जबकि खरीफ प्याज की नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में समय लगता है। यही अंतर बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ाता है। तीसरी बड़ी वजह सरकारी बफर स्टॉक है। इस साल सरकार ने बफर के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीद हो सकी। बाजार में बेहतर भाव मिलने के कारण किसानों की सरकारी खरीद में दिलचस्पी सीमित रही।

उत्पादन में बड़ी कमी नहीं, फिर क्यों बढ़ रहे दाम?

दिलचस्प बात यह है कि देश में प्याज के उत्पादन को लेकर फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं है। सरकार के अनुसार 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है। यानी समस्या कुल उत्पादन से ज्यादा आवक और बाजार में उपलब्ध स्टॉक के समय को लेकर है।

सरकार बफर स्टॉक से देगी राहत

बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत से इसकी बिक्री शुरू की जा सकती है। सरकार की कोशिश है कि सीमित स्टॉक को सीधे खुदरा बाजार तक पहुंचाकर उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। सरकार जरूरत के हिसाब से प्रमुख शहरों में रिटेल बिक्री बढ़ाने पर भी ध्यान दे सकती है। इससे जमाखोरी पर दबाव बनाने और बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

यूपी समेत इन राज्यों में भी बढ़े भाव

प्याज की तेजी का असर कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में थोक कीमत करीब 45-50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी पिछले महीने की तुलना में प्याज के भाव बढ़े हैं।

अब सरकार की क्या तैयारी?

अगले कुछ हफ्ते प्याज की कीमतों के लिए अहम रहने वाले हैं। अगर खरीफ प्याज की आवक समय पर शुरू होती है और सरकार बफर स्टॉक को बाजार में उतारती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में प्याज के कुल उत्पादन और उपलब्धता को लेकर बड़ी चिंता नहीं है।

क्या है कीमत बढ़ने की वजह?

प्याज की मौजूदा महंगाई उत्पादन की कमी से ज्यादा मौसमी आवक, खरीफ बोआई में देरी और सीमित बफर स्टॉक का असर है। अगस्त-सितंबर का समय वैसे भी प्याज की कीमतों के लिए संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में नई फसल की आवक और सरकारी बफर स्टॉक की बिक्री यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में प्याज की कीमतें नीचे आती हैं या तेजी बनी रहती है।

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