Asian Games Gold Medal: कितना सोना होता है गोल्ड मेडल में? जानिए 265 ग्राम के मेडल का पूरा राज

The CSR Journal Magazine
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास उपलब्धि होती है। वर्षों की मेहनत, ट्रेनिंग और मुकाबलों के बाद जब खिलाड़ी के गले में गोल्ड मेडल आता है तो वह पल उसके करियर की सबसे बड़ी यादों में शामिल हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मेडल को गोल्ड मेडल कहा जाता है, उसमें आखिर कितना सोना होता है? अगर आप सोच रहे हैं कि एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का बना होगा, तो ऐसा नहीं है। Aichi-Nagoya Asian Games 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस बार का गोल्ड मेडल मुख्य रूप से शुद्ध चांदी का बना है और उसके ऊपर सोने की प्लेटिंग की गई है।

265 ग्राम है गोल्ड मेडल का वजन

Aichi-Nagoya 2026 के गोल्ड मेडल का वजन करीब 265 ग्राम है। इसका व्यास 80 मिलीमीटर और मोटाई 5 मिलीमीटर है। मेडल के डिजाइन को भी खास तरीके से तैयार किया गया है। आयोजकों के मुताबिक इसका डिजाइन खिलाड़ियों की मेहनत और अलग-अलग अनुभवों के एक साथ जुड़कर उपलब्धि में बदलने की भावना को दर्शाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसमें असली सोना कितना है?

सिर्फ 1 ग्राम से ज्यादा सोना

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गोल्ड मेडल शुद्ध चांदी से तैयार किया गया है और इसके ऊपर कम से कम 1 ग्राम सोने की प्लेटिंग की गई है। यानी करीब 265 ग्राम वजन वाले इस मेडल का बड़ा हिस्सा सोने का नहीं, बल्कि चांदी का है। इसलिए इसे गोल्ड मेडल कहा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा मेडल ठोस सोने का बना है। सोने की बाहरी परत इसे गोल्ड मेडल का स्वरूप और पहचान देती है।

सिल्वर मेडल में कितना वजन?

एशियन गेम्स 2026 का सिल्वर मेडल करीब 264 ग्राम का है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह पूरी तरह शुद्ध चांदी से बना है। यानी गोल्ड और सिल्वर मेडल के वजन में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। मुख्य अंतर इनके इस्तेमाल किए गए मटेरियल और गोल्ड मेडल पर की गई सोने की प्लेटिंग का है। वहीं, ब्रॉन्ज मेडल करीब 222 ग्राम का है। इसे रेड ब्रास से तैयार किया गया है, जिसमें 95 प्रतिशत तांबा और 5 प्रतिशत जस्ता है।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से निकली धातुओं का भी इस्तेमाल

Aichi-Nagoya 2026 के मेडल की एक खास बात इसका रीसाइक्लिंग से जुड़ा होना भी है। आयोजकों ने बताया है कि मेडल बनाने में इस्तेमाल होने वाली धातुओं के एक हिस्से को छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से रिकवर किया गया है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। यानी खिलाड़ियों की उपलब्धि का प्रतीक यह मेडल खेल के साथ-साथ पर्यावरण से जुड़ा संदेश भी देता है।

गोल्ड मेडल की कीमत से ज्यादा मायने रखती है उपलब्धि

गोल्ड मेडल में भले ही करीब 1 ग्राम या उससे ज्यादा सोना हो, लेकिन खिलाड़ी के लिए इसकी असली कीमत इसमें इस्तेमाल हुई धातु से कहीं ज्यादा होती है। यह मेडल वर्षों की मेहनत, ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल की गई उपलब्धि का प्रतीक है। Aichi-Nagoya 2026 में भारत भी लगातार पदक जीत रहा है और भारतीय खिलाड़ियों के लिए हर गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज देश के लिए गौरव का विषय है।

मेडल सिर्फ धातु नहीं, मेहनत की पहचान

एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का नहीं होने के बावजूद खिलाड़ी के लिए इसकी अहमियत कम नहीं होती। करीब 265 ग्राम के इस मेडल में शुद्ध चांदी और कम से कम 1 ग्राम सोने की प्लेटिंग है। इसके साथ रीसाइकिल की गई धातुओं का इस्तेमाल इसे और खास बनाता है। असल में इसकी सबसे बड़ी कीमत उस मेहनत की है, जिसके बाद खिलाड़ी इसे अपने गले में पहनता है।

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