वसई रोड टर्मिनस का काम शुरू, मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य; ₹150 करोड़ से ज्यादा खर्च, 12 ट्रेनों को संभाल सकेगा
मुंबई महानगर क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में रेल यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए वसई रोड पर प्रस्तावित नए टर्मिनस का काम अब जमीन पर शुरू हो गया है। पश्चिम रेलवे ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए अलग-अलग कार्यों के ठेकेदार नियुक्त कर दिए हैं और निर्माण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। करीब ₹150.25 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा कर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। टर्मिनस के तैयार होने के बाद वसई-विरार के साथ पालघर क्षेत्र के यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
एक साथ 12 ट्रेनों को संभालने की क्षमता
वसई रोड टर्मिनस को भविष्य की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। प्रस्तावित टर्मिनस में एक साथ 12 ट्रेनों को संभालने की क्षमता होगी। करीब 4.5 हेक्टेयर रेलवे भूमि पर यह सुविधा विकसित की जा रही है। परियोजना में लगभग 1.8 रूट किलोमीटर और 5.1 ट्रैक किलोमीटर का रेल ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके लिए नए ट्रैक, बिजली, सिग्नलिंग और ट्रैक्शन से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। रेलवे के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक नया टर्मिनस तैयार करना नहीं है, बल्कि पश्चिम रेलवे के इस हिस्से में ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाना भी है। वसई रोड पहले से ही मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण जंक्शन है और यहां से लंबी दूरी की कई ट्रेनें गुजरती हैं। पश्चिम रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में वसई रोड की भूमिका को देखते हुए नया टर्मिनस भविष्य में ट्रेन परिचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। पश्चिम रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों में भी वसई रोड को मुंबई मंडल के महत्वपूर्ण स्टेशनों में शामिल किया गया है।
1,200 मीटर लंबी प्लेटफॉर्म दीवार का काम
परियोजना स्थल पर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद शुरुआती ढांचागत काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। टर्मिनस के लिए करीब 1,200 मीटर लंबी प्लेटफॉर्म दीवार बनाई जा रही है। हालिया स्थिति के अनुसार इसमें लगभग 500 मीटर का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही कंक्रीट एप्रन और जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े काम भी चल रहे हैं। रेलवे यार्ड में मौजूद पुराने ट्रैक को हटाने का काम भी शुरू किया गया है। रेलवे के लिए प्लेटफॉर्म, ट्रैक और यार्ड का निर्माण एक साथ करना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि मौजूदा रेल संचालन को प्रभावित किए बिना निर्माण गतिविधियां चलानी पड़ती हैं। वसई रोड क्षेत्र में उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इसलिए परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जोगेश्वरी गुड्स यार्ड भी होगा वसई रोड स्थानांतरित
वसई रोड टर्मिनस परियोजना की एक अहम विशेषता जोगेश्वरी गुड्स यार्ड का स्थानांतरण है। योजना के तहत जोगेश्वरी का माल यार्ड वसई रोड क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा। नया गुड्स यार्ड मौजूदा वसई रोड-दिवा कॉर्ड लाइन और प्रस्तावित नायगांव-जुचंद्रा कॉर्ड लाइन के बीच विकसित किया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 850 मीटर और चौड़ाई 27 मीटर होगी। यहां लगभग 800-800 मीटर लंबी दो गुड्स लाइन बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा दक्षिण दिशा में रैंप तथा वाणिज्यिक और प्रशासनिक उपयोग के लिए इमारत विकसित की जाएगी। इस व्यवस्था से मालगाड़ियों के संचालन को यात्री ट्रेनों की आवाजाही से अलग करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से उपनगरीय ट्रेनों के लिए रेल मार्ग को अधिक व्यवस्थित ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
जोगेश्वरी यार्ड से सीमेंट और ऑटोमोबाइल की ढुलाई
जोगेश्वरी गुड्स यार्ड से फिलहाल सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं की माल ढुलाई होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस यार्ड से पश्चिम रेलवे को करीब ₹100 करोड़ का राजस्व मिलता है। यार्ड को वसई रोड स्थानांतरित किए जाने के बाद भी माल ढुलाई जारी रखने की योजना है। भविष्य में समर्पित माल गलियारे से जुड़ाव बढ़ने पर माल परिवहन की क्षमता में और वृद्धि की संभावना जताई गई है। इसलिए गुड्स यार्ड का स्थानांतरण केवल जमीन खाली करने की कवायद नहीं है। इसका मकसद माल और यात्री रेल परिचालन को अलग-अलग व्यवस्थित करना है, ताकि दोनों तरह की सेवाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त परिचालन क्षमता मिल सके।
मुंबई के प्रमुख टर्मिनस पर दबाव घटाने में मदद
मुंबई में लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस और अन्य प्रमुख टर्मिनस पर लगातार दबाव रहता है। वहीं मुंबई महानगर क्षेत्र के बाहरी हिस्सों में आबादी और दैनिक यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ रेल नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे में वसई रोड पर नया कोचिंग टर्मिनस तैयार होने से पश्चिम रेलवे को लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन की अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है। रेलवे बोर्ड ने भी वसई रोड में नए कोचिंग टर्मिनस को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वसई रोड और जोगेश्वरी में नए कोचिंग टर्मिनस स्वीकृत किए गए हैं। रेलवे की योजना मुंबई क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर टर्मिनस और कोचिंग सुविधाओं को बढ़ाने की है, ताकि मौजूदा टर्मिनस पर ट्रेनों की आवाजाही का दबाव कम किया जा सके। वसई रोड परियोजना इसी व्यापक क्षमता विस्तार का हिस्सा है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
वसई-विरार, नालासोपारा और पालघर क्षेत्र में पिछले वर्षों में आबादी और आवागमन दोनों बढ़े हैं। बड़ी संख्या में लोग रोजाना मुंबई और आसपास के औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में आते-जाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार स्थानीय यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नया टर्मिनस तैयार होने पर लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन के लिए मुंबई के भीतर स्थित टर्मिनस पर निर्भरता कम करने का विकल्प रेलवे को मिलेगा। इससे भविष्य में इस क्षेत्र से नई ट्रेन सेवाएं शुरू करने अथवा मौजूदा सेवाओं के विस्तार के लिए आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सकता है। हालांकि यह जरूरी है कि टर्मिनस का लाभ केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित न रहे। वसई रोड स्टेशन पहले से ही उपनगरीय रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए नए टर्मिनस और मौजूदा उपनगरीय ढांचे के बीच बेहतर समन्वय परियोजना की उपयोगिता को और बढ़ा सकता है।
पहले ₹86 करोड़ के मुख्य काम का ठेका
परियोजना पर काम शुरू होने की प्रक्रिया इससे पहले ही शुरू हो गई थी। जून 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार पश्चिम रेलवे ने करीब ₹86 करोड़ के मुख्य निर्माण कार्य का ठेका 17 अप्रैल 2026 को मंजूरकिया था। इसमें स्टेशन भवन, नए प्लेटफॉर्म, ट्रैक कार्य, यात्रियों और वाहनों के लिए सर्कुलेटिंग एरिया तथा अन्य जरूरी ढांचागत सुविधाएं शामिल थीं। इस हिस्से के लिए करीब 18 महीने की कार्य अवधि निर्धारित की गई थी। उस समय परियोजना स्थल पर ट्रैक हटाने, भू-तकनीकी जांच, सर्वेक्षण और निर्माण स्थल तैयार करने जैसे काम शुरू होने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा स्काईवॉक और पैदल यात्रियों के लिए पुल जैसे पूरक कार्यों के लिए करीब ₹34 करोड़ की अलग निविदा प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। बाद की स्थिति में परियोजना की समग्र लागत करीब ₹150.25 करोड़ बताई गई है। इसलिए ₹86 करोड़ को पूरे टर्मिनस की कुल लागत न मानकर मुख्य निर्माण कार्य के ठेके के रूप में देखना अधिक उचित है।
यात्रियों की सुविधाओं के लिए भी होगा विकास
वसई रोड टर्मिनस के विकास में केवल रेल लाइन और प्लेटफॉर्म बनाना ही शामिल नहीं है। स्टेशन परिसर में यात्रियों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सर्कुलेटिंग एरिया और अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाना है। परियोजना से जुड़े शुरुआती प्रस्तावों में टिकट खिड़कियां, पैदल पुल, लिफ्ट, एस्केलेटर, प्रतीक्षालय और पेयजल जैसी सुविधाओं के लिए जगह तय करने की बात सामने आई थी। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि टर्मिनस पर लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन के साथ यात्रियों की आवाजाही बढ़ेगी। यदि स्टेशन परिसर में प्रवेश-निकास, पैदल आवागमन और वाहन प्रबंधन पर्याप्त क्षमता वाला नहीं हुआ तो नई रेल सुविधा का पूरा लाभ यात्रियों को नहीं मिल पाएगा।
मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
पश्चिम रेलवे ने अब परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा कर एकीकृत रूप से चालू करने का लक्ष्य रखा है। हालिया प्रगति के अनुसार निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है और प्लेटफॉर्म दीवार, एप्रन तथा जलनिकासी से जुड़े हिस्सों पर काम शुरू हो चुका है। मार्च 2028 की समयसीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परियोजना पूरी होने के बाद रेलवे को न केवल अतिरिक्त टर्मिनस क्षमता मिलेगी, बल्कि जोगेश्वरी गुड्स यार्ड को स्थानांतरित करके यात्री रेल संचालन के लिए भी अतिरिक्त परिचालन गुंजाइश तैयार की जा सकेगी।
कुल मिलाकर, ₹150.25 करोड़ की वसई रोड टर्मिनस परियोजना पश्चिम रेलवे के मुंबई क्षेत्र में क्षमता विस्तार की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। करीब 4.5 हेक्टेयर रेलवे जमीन पर विकसित होने वाली इस सुविधा में 12 ट्रेनों को संभालने की क्षमता होगी। 1,200 मीटर लंबी प्लेटफॉर्म दीवार, नए ट्रैक, बिजली, सिग्नलिंग, ट्रैक्शन, जलनिकासी और यार्ड विकास जैसे काम इसके प्रमुख हिस्से हैं। मार्च 2028 तक परियोजना पूरी होने पर वसई-विरार और पालघर क्षेत्र के यात्रियों को बेहतर लंबी दूरी की रेल सुविधाओं का लाभ मिलने के साथ मुंबई के मौजूदा टर्मिनसों पर परिचालन दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
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