क्या 2029 में होगा एक देश-एक चुनाव? JPC की बैठक में विपक्ष की मौजूदगी से बढ़ी सियासी हलचल

The CSR Journal Magazine

2029 में हो सकता है ‘एक देश-एक चुनाव’! JPC बैठक में प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं की मौजूदगी, चुनावी चक्र बदलने की तैयारी

देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। ‘एक देश-एक चुनाव’ यानी One Nation, One Election को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही। बैठक में कांग्रेस महासचिव एवं JPC सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष तथा NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले सहित कई सदस्य शामिल हुए। 129वें संविधान संशोधन विधेयक और इससे जुड़े प्रस्तावों पर JPC में लगातार विचार-विमर्श चल रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ राज्यों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के विचार भी लिए जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि देश में बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक और वित्तीय संसाधनों पर दबाव पड़ता है, जबकि विपक्ष का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे पर असर डाल सकती है।

2029 में ही लागू हो सकता है ‘एक देश-एक चुनाव’?

JPC की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के बयान ने इस पूरे मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी हों तो ‘एक देश-एक चुनाव’ को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ लागू करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। पी.पी. चौधरी के अनुसार, समिति ने अब तक जिन हितधारकों से चर्चा की है, उनमें से बड़ी संख्या एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में दिखाई दी है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 99 प्रतिशत हितधारकों ने एक साथ चुनाव के विचार का समर्थन किया है। हालांकि, इस दावे के बावजूद विपक्षी दलों का रुख इस व्यवस्था को लेकर काफी अलग है और कई विपक्षी नेता इसके मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं। यदि 2029 में यह व्यवस्था लागू होती है, तो लोकसभा चुनाव के साथ ही देश के अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कराने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए संविधान और चुनावी कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे और विभिन्न राज्यों की मौजूदा विधानसभा अवधियों को भी ध्यान में रखना होगा।

JPC बैठक में विपक्ष की सक्रिय मौजूदगी

सोमवार की बैठक इसलिए भी अहम रही क्योंकि इसमें विपक्ष के कई प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया। प्रियंका गांधी और पी. चिदंबरम जैसे कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी ने बैठक को राजनीतिक रूप से खास बना दिया। पी. चिदंबरम ने समिति के सामने अपनी पार्टी का पक्ष रखा। वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष और NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि क्या लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने से राज्यों की राजनीतिक प्राथमिकताएं राष्ट्रीय चुनाव के मुद्दों के पीछे दब जाएंगी। विपक्ष का एक बड़ा तर्क यह भी है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में राज्यों के अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे होते हैं। ऐसे में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने पर मतदाताओं के सामने राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों को अलग-अलग महत्व देने की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

सरकार क्यों चाहती है एक साथ चुनाव?

‘एक देश-एक चुनाव’ के समर्थकों का कहना है कि भारत में लगातार चुनाव होते रहने के कारण राजनीतिक दलों और सरकारी मशीनरी का काफी समय चुनावी गतिविधियों में चला जाता है। बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता के कारण सरकारों के विकास कार्य और नई घोषणाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा चुनावों पर होने वाले खर्च को कम करने, सुरक्षा बलों की बार-बार तैनाती को रोकने और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने का तर्क भी दिया जाता है।समर्थकों का मानना है कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो राजनीतिक दलों को लंबे समय तक लगातार चुनावी मोड में रहने की जरूरत नहीं होगी। इससे सरकारें अपना पूरा ध्यान नीतियों और विकास कार्यों पर केंद्रित कर सकेंगी।

विपक्ष की आपत्तियां क्या हैं?

विपक्षी दलों की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात को लेकर है कि एक साथ चुनाव कराने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव करना पड़ सकता है। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से अलग समय पर होते हैं। ऐसे में सभी चुनावों को एक चक्र में लाने के लिए कुछ विधानसभाओं का कार्यकाल घटाना या बढ़ाना पड़ सकता है। विपक्ष का यह भी कहना है कि भारत की संघीय व्यवस्था में राज्यों को अपनी राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार चुनाव कराने का अधिकार है। यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभाव राज्य के स्थानीय चुनावों पर बढ़ सकता है। इसके अलावा यदि किसी राज्य की सरकार अपना बहुमत खो देती है और विधानसभा समय से पहले भंग होती है, तो ऐसी स्थिति में ‘एक देश-एक चुनाव’ की व्यवस्था को बनाए रखना भी एक बड़ी संवैधानिक चुनौती होगी।
क्या 2029 तक सभी चुनाव एक साथ कराना संभव है?
यही सवाल फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण है। राजनीतिक स्तर पर 2029 का नाम तेजी से सामने आ रहा है, लेकिन इसे लागू करने के लिए केवल राजनीतिक सहमति पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए संविधान संशोधन, चुनाव संबंधी कानूनों में बदलाव और राज्यों के साथ व्यापक समन्वय की जरूरत होगी। ‘एक देश-एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्ताव में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक निर्धारित चुनावी चक्र में लाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। ऐसे में 2029 में इसे लागू करने की स्थिति बनने के लिए अगले कुछ वर्षों में संसद को विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यानी 2029 का लक्ष्य राजनीतिक रूप से संभव होने की बात कही जा रही है, लेकिन इसे अंतिम तारीख मानना अभी जल्दबाजी होगी। JPC की सिफारिश, संसद में विधेयक का पारित होना, आवश्यक संवैधानिक संशोधन और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं इसके भविष्य को तय करेंगी।

भारत में पहले भी एक साथ होते थे चुनाव

दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना भारत के लिए कोई बिल्कुल नई व्यवस्था नहीं है। आजादी के बाद शुरुआती दशकों में देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव लगभग एक साथ ही होते थे। 1952 में पहला आम चुनाव हुआ और उसी दौर में राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव भी कराए गए। इसके बाद 1957 और 1962 में भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों का चक्र काफी हद तक साथ रहा। 1967 में भी लोकसभा चुनावों के साथ राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। लेकिन इसके बाद कई राज्यों की विधानसभाएं समय से पहले भंग हुईं। कुछ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ और अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे। इससे लोकसभा और विधानसभा चुनावों का एक साथ होने वाला चक्र धीरे-धीरे टूट गया। इसके बाद 1972 के आम चुनाव और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समय पर हुए विधानसभा चुनावों ने चुनावी कैलेंडर को पूरी तरह अलग कर दिया। आज देश में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं।

2029 बनाम 2034 की चर्चा क्यों?

‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर पहले 2034 जैसे संभावित चुनाव चक्र की चर्चा भी सामने आती रही है। इसका कारण यह है कि अलग-अलग राज्यों की मौजूदा विधानसभा अवधि और लोकसभा चुनाव के समय को एक समान चक्र में लाने के लिए संक्रमण अवधि की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन अब JPC अध्यक्ष की ओर से 2029 में इसे लागू करने की संभावना का उल्लेख किए जाने के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र 2029 बन गया है। यदि सरकार और समर्थक दल आवश्यक संवैधानिक तथा कानूनी बदलाव समय पर कराने में सफल होते हैं, तो 2029 का लोकसभा चुनाव देश के चुनावी इतिहास में बड़ा बदलाव ला सकता है।

JPC की अंतिम रिपोर्ट पर टिकीं नजरें

अब सभी की नजर JPC की अंतिम रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों पर है। समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया को लेकर फैसला कर सकती है। इसके बाद संसद में संबंधित संविधान संशोधन और अन्य विधेयकों पर बहस होगी। यह मुद्दा केवल चुनाव कराने की तारीखों का मामला नहीं है, बल्कि भारत की चुनावी और संघीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार के लिए राजनीतिक सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। अगर 2029 में ‘एक देश-एक चुनाव’ लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ता है, तो अगले कुछ साल भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। एक तरफ सरकार इसे चुनावी खर्च, प्रशासनिक बोझ और लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया को कम करने वाला सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राज्यों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक विविधता से जोड़कर देख रहा है।

नया चुनावी अध्याय या और इंतजार

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2029 में निश्चित रूप से लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। लेकिन JPC में जारी विचार-विमर्श और उसके अध्यक्ष के ताजा बयान ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि 2029 को संभावित लक्ष्य के रूप में गंभीरता से चर्चा में लाया गया है। आने वाले महीनों में संसद, राजनीतिक दलों और राज्यों के बीच होने वाली बहस तय करेगी कि भारत वास्तव में 2029 से एक नए चुनावी चक्र की ओर बढ़ पाएगा या ‘एक देश-एक चुनाव’ के लिए अभी और लंबा इंतजार करना होगा।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/ app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/ apps/details?id=com. inventifweb.newspin& pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos