Paris में हाई स्कूलों के छात्रों का बड़ा प्रोटेस्ट: ‘स्कूल में पंखा भी नहीं’

The CSR Journal Magazine
फ्रांस में छात्रों और शिक्षकों ने शिक्षण प्रणाली की बिगड़ती स्थिति को लेकर सड़कों पर उतकर विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को देशभर के 1200 से ज्यादा हाई स्कूलों में छात्रों ने अपनी नाराजगी जताई। कई महीनों से खराब सुविधाओं के खिलाफ विरोध शुरू हुआ था, जो अब बड़े पैमाने पर फैल गया है। पेरिस, मार्सिले, स्ट्रासबर्ग, और लिले जैसे शहरों में हजारों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

कक्षाओं की बुरा हाल का आरोप

बॉबिग्नी में अपनी हाई स्कूल के बाहर विरोध कर रही 18 वर्षीय पैरावई कोहेलानाथन ने कहा, ‘हम यह तय किया है कि हम अपनी काम करने की स्थितियों को लेकर एकजुट होंगे।’ उनके अनुसार, कक्षाओं में कुर्सी-टेबल की कमी और कंप्यूटर सिस्टम की खराबी छात्रों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी केवल कुछ कुर्सियाँ होती हैं और शिक्षक भी अक्सर गायब रहते हैं।’

बजट की कमी और छात्रों की शिकायतें

1 अक्टूबर को सरकार द्वारा पेश किए गए 2027 के बजट में शिक्षा पर खर्च बढ़ाने में केवल 1.7% की वृद्धि की गई। यह वृद्धि महंगाई के मुकाबले बहुत कम है, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों की नाराजगी बढ़ गई है। अब शिक्षा पर खर्च 65.53 अरब यूरो हो गया है। छात्रों ने कक्षाओं में पंखों की कमी की भी शिकायत की है। एक 17 वर्षीय छात्र ने कहा, ‘एक छोटे से क्लासरूम में 35 से ज्यादा लोग बैठते हैं, लेकिन पंखे नहीं होते। बहुत गर्मी लगती है।’

सरकार की प्रतिस्पर्धा समर्पण पर सवाल

शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने कहा है कि शिक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है, लेकिन उन्होंने बजट में की गई वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि यह कम जनसंख्या के कारण है। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा में नियमित रूप से कटौती हो रही है, जिससे स्थिति और खराब हो रही है।

नागरिक अशांति और बढ़ती गंभीरता

इन प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण लगभग 5000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने बढ़ती अशांति की निंदा करते हुए शांति की अपील की है। शिक्षा प्रणाली के वर्तमान संकट ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा है, और कई लोग इसके सुधार की मांग कर रहे हैं।

शिक्षा पर खर्च और OECD की स्थिति

फ्रांस में शिक्षा पर खर्च के मामले में OECD देशों के मध्य स्थिति है, लेकिन पिछले दशक में सेकेंडरी स्कूल के हर छात्र पर औसत खर्च में बहुत बदलाव नहीं आया है। यही कारण है कि छात्रों और शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। विद्यार्थियों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी है कि वे बेहतर शिक्षा सुविधाओं के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।

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